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पीवी सिंधु बनाम नोज़ोमी ओकुहारा : मौजूदा बैडमिंटन जगत की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता

पीवी सिंधु और नोज़ोमी ओकुहारा के बीच मुकाबला हमेशा से ही रोमांचक होता आया है

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

पीवी सिंधु (PV Sindhu) और नोज़ोमी ओकुहारा (Nozomi Okuhara) के बीच मैच हमेशा से ही कांटे का रहता है, मैच से पहले भविष्यवाणी करना कि कौन जीतेगा, यह लगभग नामुमकिन होता है।

जापानी शटलर की हाईट जहां करीब 5 फीट है और वह मुश्किल से नेट कॉर्ड तक पहुंच पाती हैं, वहीं भारतीय स्टार उनसे करीब एक फीट लंबी है।

पीवी सिंधु ने अपने खेल को जबरदस्त शक्ति के साथ शटल को स्मैश करने करने के साथ खास बनाया है तो वहीं  पर बनाया है नोज़ोमी ओकुहारा के पास कोर्ट को कवर करने की जबरदस्त काबिलियत है।

इसके बावजूद इन दोनों में कई बात कॉमन है। दोनों बैडमिंटन सितारों ने ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में कई पदक जीते हैं, इसके अलावा ये दोनों खिलाड़ियों का जन्म चार महीने के गैप में हुआ है।

बड़ी बात ये है कि दोनों ही खिलाड़ी इस समय वर्ल्ड बैडमिंटन का बड़ा नाम है और जब ये खिलाड़ी एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं तो मैच अलग ही लेवल पर पहुंच जाता है।

इन दोनों स्टार खिलाड़ियों के बीच पिछले एक साल में 17 बार भिड़ंत हुई है। वहीं इन दोनों के बीच रिकॉर्ड की बात करें तो पीवी सिंधु ने 9 और ओकुहारा ने 8 मैच अपने नाम किए हैं।

पीवी सिंधु कहना है कि "जब भी हम एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं तो वह नया मैच होता है। मैं पिछले मैचों के बारे में नहीं सोचती और हर मैच को फ्रेश मैच के रूप में देखती हूं।" अधिकांश महान प्रतिद्वंद्वियों की तरह पीवी सिंधु बनाम नोजोमी ओकुहारा कहानी भी जूनियर स्तर पर शुरू हो गई थी।

शुरुआती मुकाबले

इन दोनों खिलाड़ियों की पहली भिड़ंत साल 2012 में कोरिया में हुई एशिया यूथ अंडर-19 चैंपियनशिपर (Asia Youth U-19 championships) के फाइनल में हुई थी। इस मुकाबले को देख फैंस को समझ आ गया था कि आगे चलकर इन दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा कैसी होगी। वह मैच तीन गेम तक चला था।
उस समय दोनों खिलाड़ियों की उम्र 17 साल थी। पहला गेम ओकुहारा ने जीता तो दूसरा गेम सिंधु जीतने में सफल रही। निर्णायक गेम में भारतीय स्टार ने 19-16 की बढ़त ले रखी थी लेकिन जापानी खिलाड़ी ने लगातार 4 अंक जीत मैच में वापसी की।

हालांकि सिंधु दबाव के पलों में खुद को शांत रखने में कामयाब रही  और तीन अंक अपने नाम कर मुकाबला जीत लिया। सिंधु ने यह मुकाबला 18-21, 21-17, 22-20 से जीता और दो दिन बाद आने वाले जन्मदिन पर खुद को उन्होंने बेहतरीन तोहफ दिया।

इसके बाद दोनों की टक्कर सीनियर लेवल पर हुई। ये दोनों खिलाड़ी 2014 में हांगकांग ओपन में फिर एक दूसरे के खिलाफ खेल रहे थे। इस बार ओकुहारा ने बाजी मारते हुए जीत हासिल की, हालांकि ये मैच भी तीन गेम तक चला था।

अगले दो मैच में भी इतिहास ने खुद को दोहराया क्योंकि जापानी शटलर को अपने अविश्वसनीय सहनशक्ति के साथ निर्णायक गेम में जीत हासिल की।

2016 रियो में मुकाबला

2016 रियो ओलंपिक (Rio 2016 Olympic) के सेमीफाइनल में ये दोनों खिलाड़ी 5वीं बार एक दूसरे के खिलाफ खेलीं। 21 साल की दोनों खिलाड़ियों के लिए यह पहला ओलंपिक था और पीवी सिंधु ने इस बड़े मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और जीत दर्ज की।

जैसा कि पिछले तीन साल से इन दोनों के बीच टक्कर चल रही थी, दोनों खिलाड़ियों के बीच यहां भी कड़ी टक्कर हुई लेकिन पीवी सिंधु पहला गेम जीतने में कामयाब रही।

दूसरे गेम में ओकुहारा अपनी लय में नहीं दिख रही थी और भारतीय बैडमिंटन स्टार ये मौका आसानी से नहीं जाने देती और उन्होंने किया भी कुछ ऐसा ही। पीवी सिंधु ने बड़े मंच पर ओकुहारा को 21-19, 21-10 से मात दी।

ये पहली बार था, जब पीवी सिंधु ने नोज़ोमी ओकुहारा को सीधे गेम में हराया था , उनकी ये जीत इसलिए भी खास हो जाती है क्योंकि ओकुहारा इसी साल की शुरुआत में ऑल इंग्लैंड ओपन का खिताब जीता था।

रियो 2016 जीतने के लिए पीवी सिंधु ने नोज़ोमी ओकुहारा को मात दी 

पीवी सिंधु ने फाइनल तक का सफर तय किया हालांकि उन्हें सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद वह पूरे भारत में छा गई, हर तरफ उन्हीं की चर्चा हो रही थी। ओकुहारा ने भी अपने पहले ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर पीवी सिंधु के खिलाफ हार के गम को कम किया।

वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनल्स

एक साल बाद सिंधु-ओकुहारा के बीच प्रसिद्ध अध्याय लिखा गया, बिना किसी शक के शायद यह खेल के इतिहास का सबसे शानदार पलो में से एक था।

ग्लासगो, स्कॉटलैंड के अमीरात एरेना में एक ऐसा मुकाबला खेला गया, जो सहनशक्ति और मानसिक शक्ति का एक जबरदस्त उदाहरण था। ये मुकाबला करीब दो घंटे तक चला और नोज़ोमी ओकुहारा बीडब्ल्यूएफ चैंपियनशिप (BWF World Championships) फाइनल से एक विजेता बनकर उभरी।

दोनों ही खिलाड़ी अपनी पूरी ताकत के साथ खेली लेकिन ओकुहारा को मैच से पहले फेवरेट माना जा रहा था। ओकुहारा ने दो ओलंपिक मेडलिस्ट कैरोलिना मारिन (Carolina Marin ) और साइना नेहवाल (Saina Nehwal) को मात दी।

पीवी सिंधु और जापानी खिलाड़ी के बीच एक एक पॉइंट के लिए संघर्ष हो रहा था। कोई भी 2 पॉइंट से ज्यादा के अंतर से जीत हासिल नहीं कर पा रहा था। मैच के माध्यम से कई बार पर्याप्त सहनशक्ति नहीं रखने की सामान्य धारणा को भी इन दोनों ने बदल दिया।

दोनों ही खिलाड़ियो के बीच 73 शॉट रैली खेली गई, यह वुमेंस गेम्स की सबसे बड़ी रैली थी। इस दौरान दोनों ही खिलाड़ी थक कर चूर हो गई थी।

पीवी सिंधु ने मैच के बाद ईएसपीएन से बातचीत में बताया था कि "यह किसी का भी मैच हो सकता था, इस तरह के मैच में हारना दुखद होता है। लेकिन आप इस तरह के मैच के अंत में कुछ नहीं कह सकते। हर पॉइंट के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही थी और हम दोनों ही पॉइंट जीतने की कोशिश कर रहे थे।"

जापानी ने अंत में अपने दो विश्व चैंपियनशिप पदक जीते, वहीं पीवी सिंधु को इसके लिए दो साल का इंतजार करना पड़ा।

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा क्षण तब आया, जब दुनिया की नंबर 6 खिलाड़ी ने वर्ल़्ड चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला केवल 38 मिनट में 21-7, 21-7 से जीत लिया। इसी के साथ वह बीडबल्यूएफ टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।

अन्य मैच

साल 2019 से पहले ये दोनो खिलाड़ी दो बार एक दूसरे के खिलाफ खेली। पहला इंडोनेशिया ओपन और दूसरा सिंगापुर ओपन। दोनों ही खिलाड़ी ने 1-1 खिताब अपने नाम किया।

पीवी सिंधु ने 2018 में  बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल में ओकुहारा को हराते हुए खिताब जीता था। वहीं इसके बाद ऑल इंग्लैंड ओपन और बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में भी उन्होंने जापानी विरोधी को शिकस्त दी थी।

इन दोनों के बीच हालिया भिड़ंत साल 2020 मार्च में ऑल इंग्लैंड ओपन के दौरान हुई थी, जहां ओकुहारा ने 12-21, 21-15, 21-13 से जीत हासिल कर सिंधु से अपनी पिछली हार का बदला लिया।

कोई संदेह नहीं है कि इन दोनों के बीच कई और एक्शन से भरे अध्याय बनेंगे, और यह वह है जो खेल के प्रशंसकों के लिए बहुत खुशी देता है।