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टोक्यो 2020 की राह: प्रियंका गोस्वामी का रेस वॉकिंग में जाना भले ही आकस्मिक हो, लेकिन सफलता मेहनत से मिली    

मेरठ की 24 वर्षीय एथलीट ने महिलाओं की 20 किमी रेस वॉकिंग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए टोक्यो ओलंपिक का कोटा हासिल किया  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

रेस वॉकिंग पूरी तरह से नपे-तुले डग भरते हुए (कदम बढ़ाते हुए) गति को पाने से जुड़ा है। लेकिन, प्रियंका गोस्वामी (Priyanka Goswami) के लिए इसका मतलब है एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ना जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की थी।

राष्ट्रीय सर्किट में अनुभवी प्रतिभाओं में से एक 24 वर्षीय प्रियंका ने महिलाओं की 20 किमी रेस वॉकिंग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए टोक्यो ओलंपिक के लिए स्थान सुनिश्चित किया। 

झारखंड के रांची में आयोजित महिला प्रतियोगिता 8वीं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रेस वॉकिंग चैंपियनशिप 2021 में शनिवार को प्रियंका ने भावना जाट (Bhawna Jat) के 1:29:54 समय के साथ बनाये राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा और एक मिनट दस सेकंड पहले 1:28:45 समय में रेस पूरी कर खिताब जीता। 

राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के कुछ घंटों बाद, मेरठ की एथलीट ने रेस वॉकिंग में अपनी शानदार शुरुआत को याद किया। 

छह साल की उम्र में उसने जिम्नास्टिक में हाथ अजमाया और छह महीने बाद ही छोड़ दिया। क्योंकि वह एथलेटिक्स में अपनी किस्मत को आजमाना चाहती थी। ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार हासिल करने के लिए उसने मुख्य रूप से जिला स्तरीय चैंपियनशिप में भाग लिया। 

प्रियंका गोस्वामी ने कहा, "सभी पदक विजेताओं को पुरस्कार में बैग मिलते थे। यह अब छोटी बात लगती है, लेकिन उस समय पुरस्कार के रूप में यह काफी था। मैंने वहां चल रही कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, लेकिन एक भी बैग नहीं जीत पाई। उस दिन की अंतिम स्पर्धा रेस वॉकिंग थी और मैंने देखा कि इसमें केवल तीन लड़कियां प्रतिस्पर्धा कर रही थीं। मेरे कोच ने मुझे इसमें भाग लेने के लिए कहा। मैंने इसमें भाग लिया और एक जिम्नास्ट और लचीला होने के कारण काफी अच्छा प्रदर्शन किया।" 

प्रियंका ने इसमें कांस्य पदक और काफी महंगा बैग जीता। हालांकि, वह पहले से एथलेटिक फाउंडेशन में थी, लेकिन रेस वॉकिंग जैसी गहन तकनीकी स्पर्धा के लिए आवश्यक कौशल को हासिल में उसे कुछ समय लगा।

उन्होंने कहा, "मेरे कोच गौरव त्यागी (Gaurav Tyagi) ने इसके लिए आधार तैयार करने में मदद की। इसमें दौड़ते समय आप अपने घुटनों को नहीं मोड़ सकते। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण मुश्किल पहलू ये है कि दौड़ते समय एक पैर जमीन के संपर्क में रहना चाहिए।" 

एक और सुखद घटना केरल में 2015 के राष्ट्रीय खेलों में हुई। प्रियंका खेलों के लिए मुख्य रूप से जूनियर प्रतियोगिताओं के लिए गई थी, लेकिन रेस वॉकिंग स्पर्धा में उनके राज्य उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं था। इस कारण उन्हें महिलाओं की रेस वॉकिंग में पदोन्नत किया गया। एक बार फिर उसने प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया। 

इस नई पहुंच ने प्रियंका को स्फूर्तिदायक, खुला और तनावमुक्त बना दिया। उसका लक्ष्य 20 किमी की दूरी एक घंटे से ज्यादा समय में पूरा करना था।

24 वर्षीय ने कहा, "मुझे काफी समय बाद पता चला कि यह 20 किमी की दौड़ है। अगर मुझे यह पहले पता होता, तो शायद मैं इसमें प्रवेश नहीं करती। जूनियर्स में हमें मुख्य रूप से तीन या पांच किलोमीटर दौड़ना होता था। जब तक मैंने नेशनल्स में भाग नहीं लिया, तब तक इस बात का पता ही नहीं था कि स्पर्धा को पूरा करने के लिए 20 किमी तक चलना पड़ता है।" 

"उन्हें याद है कि अपनी पहली 20 किमी दौड़ लगाते समय उसे कोई घबराहट नहीं हुई। दौड़ में प्रवेश करने के बाद उसका ध्यान केवल इसे खत्म करने पर था। उन्होंने कहा, "जब तक मैंने अपनी पहली 20 किमी दौड़ पूरी नहीं कर ली, तब तक मुझे विश्वास नहीं था कि मैं ऐसा भी कर सकती हूं।" 

उन्होंने न केवल रेस पूरी की, बल्कि जिस समय के साथ रेस पूरी की वह अगले सत्र में रोम में होने वाले सर्वश्रेष्ठ आयोजन 2016 IAAF विश्व रेस वॉकिंग टीम चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने के लिए काफी था। 

अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रियंका खुद को अकेला सा महसूस कर रही थी। उन्होंने कहा, "वहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों में से कुछ मौजूद थे। वे सभी काफी संजीदा थे, इसके अलावा भाषा गतिरोध भी था। इसलिए मैंने उनमें से किसी के साथ बात नहीं की। मैं सिर्फ भीड़ का अनुसरण कर रही थी, ताकि यह पता लग सके कि कहां जाना है।" 

दौड़ से पहले वह प्रतिद्वंद्वियों से भयभीत महसूस कर रही थी, लेकिन अपने प्रदर्शन से उसने सभी को चौंका दिया। उसने 1:40:04 समय के साथ अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाया। एक साल बाद उसने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। 

उन्होंने कहा, "मुझे एथलेटिक्स पसंद है और हमेशा रहेगी। मैं जिम्नास्टिक से डरती थी, खासकर बीम से। जबकि रेस वॉकिंग में डरने जैसी कोई बात नहीं है, कठोर मेहनत करो और चलते रहो।" 

पिछले 18 महीनों से वह सिर्फ कड़ी मेहनत और चलने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। बैंगलोर के SAI कॉम्प्लेक्स में राष्ट्रीय एथलेटिक्स शिविर की सदस्य हैं। वह प्रशिक्षण चरण में हर सप्ताह में 250 किलोमीटर की रेस करती हैं। 

उन्होंने बताया, "गुरमीत सिंह (Gurmeet Singh) जो खुद एक डबल ओलंपियन हैं, राष्ट्रीय शिविर में मेरे कोच हैं । इसके अलावा मुझे गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन का भी सहयोग मिल रहा है, जिसने डाईटिशन और मनोवैज्ञानिक की सुविधा मुहैया कराई है।" 

पिछले साल झारखंड के रांची में नेशनल और इंटरनेशनल रेस वॉकिंग चैंपियनशिप में वह 36 सेकंड से ओलंपिक में कोटा हासिल करने से चूक गई थी। इसके बाद कोरोना महामारी के कारण निराश होने या टूटने की बजाय प्रियंका ने अपने नुकसान की भरपाई करने की दिशा में काम किया। 

शनिवार, को उसने ओलंपिक क्वालीफाइंग मार्क 1:31:00 को पीछे छोड़ दिया। टोक्यो ओलंपिक तब कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण प्रियंका ने कहा कि वह अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ में और सुधार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। उसने टोक्यो खेलों के लिए करीब 1:27 समय का लक्ष्य तय किया है। 

प्रियंका 20 किमी रेस वॉकिंग में ओलंपिक कोटा हासिल करने वाली तीसरी भारतीय महिला बन गई हैं। इस स्पर्धा को 2000 के सिडनी खेलों में पेश किया गया था। जबकि 2016 में रियो ओलंपिक में रेस वॉकर खुशबीर कौर (Khushbir Kaur) ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था, जबकि भावना जाट (Bhawna Jat) ने 2020 टोक्यो खेलों के लिए स्थान हासिल किया। 

उन्होंने कहा, "हर एथलीट का ओलंपियन बनने का सपना है। यह मेरा पहला ओलंपिक होगा, जिसमें मैं प्रतिस्पर्धा करूंगी। मैं अपना ध्यान समय पर केंद्रित करना चाहती हूं, ना कि प्रतिस्पर्धा पर। हम सभी स्टार्ट लाइन पर बराबर होंगे।"