सानिया मिर्ज़ा का ग्रैंड स्लैम से लेकर ओलंपिक तक का सफ़र रहा है शानदार

सानिया मिर्ज़ा ने सभी चार ग्रैंड स्लैम टेनिस में डेब्यू 2005 में किया था, जबकि 2008 बीजिंग गेम्स उनका पहला ओलंपिक था।

भारतीय टेनिस इतिहास की सबसे सफलतम खिलाड़ियों में से एक सानिया मिर्जा (Sania Mirza) ने भारत का नाम कई बार दुनिया में रोशन किया है।

हैदराबाद की ये खिलाड़ी टेनिस स्टार डब्ल्यूटीए युगल रैंकिंग में नंबर 1 पर पहुंचने वाली, डब्ल्यूटीए एकल रैंकिंग में शीर्ष 30 में पहुंचने वाली या ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। अभी वह अपने करियर में ऊंचे मुकाम पर है लेकिन उनकी शुरुआत भी एक समय कुछ ऐसे हुई थी।

सानिया मिर्जा नो 15 साल की उम्र में सीनियर सर्किट पर अपनी शुरुआत की। टूर्नामेंट में वाइल्ड कार्ड के रूप में प्रवेश करते हुए, उन्होंने भारतीय टेनिस खिलाड़ी गीता मनोहर (Geeta Manohar) का सामना किया, जो उनसे तीन साल सीनियर थीं। सानिया मिर्ज़ा ने यह मैच 6-0, 6-1 से जीता और अपने करियर की शानदार शुरुआत की।

हम सानिया मिर्ज़ा के लगभग दो दशकों के अविश्वसनीय टेनिस करियर के बारे में बताते हैं। इसमें ग्रैंड स्लैम (Grand Slams), ओलंपिक (Olympics), डब्ल्यूटीए (WTA), राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games), फेड कप (Fed Cup) और एशियाई खेलों (Asian Games) सहित उनके सभी प्रमुख डेब्यू शामिल हैं।

2008 बीजिंग ओलंपिक में सानिया मिर्ज़ा का डेब्यू

तीन बार की ओलंपियन और रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) के साथ मिलकर मिक्स्ड डबल्स में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाली सानिया मिर्जा का ओलंपिक करियर साल 2008 बीजिंग ओलंपिक में शुरू हुआ था।

कलाई की चोट के कारण तीन महीने बाद कोर्ट पर उतरी सानिया का सिंगल्स में ओलंपिक पर्दापण 11 अगस्त 2008 को हुआ।

यहां 21 साल की सानिया को कठिन ड्रॉ मिला था, उन्होंने चेक गणराज्य की इवेता बेनेसोवा (Iveta Benesova) का सामना किया, जो उनसे अधिक रैंक की खिलाड़ी थी।

सानिया ने कहा कि “मैं बस इतना कर सकती थी कि अपना सर्वश्रेष्ठ दूं। आप ग्रैंडस्लैम में हो सकता है कि 30, 40 या 50 बार भी हिस्सा लें लेकिन ओलंपिक आपकी ज़िंदगी में एक बार आता है, अगर आप भाग्यशाली हैं, तो शायद दो या तीन बार।”

बेनेसोवा के खिलाफ लेफ्टी सानिया को कलाई के साथ अपने प्रसिद्ध फोरहैंड शॉट खेलने में काफी परेशानी हुई और उन्होंने पहला सेट आसानी से 6-1 से गंवा दिया। वहीं दूसरे सेट में सानिया ने अच्छी वापसी की और कोर्ट को आसानी से कवर किया, उनकी वापसी ने बेनेसोवा की राह कठिन कर दी थी।

सानिया ने बेनेसोवा की पहली बार सर्विस तोड़ी और मैच में 1-0 की बढ़त बना ली लेकिन उनकी विरोधी भी पीछे नहीं रही और अंत में वह 2-1 से आगे रही।

46 मिनट तक संघर्ष करने के बाद सानिया मिर्जा को कलाई की चोट के कारण रिटायर होना पड़ा, जब वह मैदान छोड़ रही थी तो उनके और उनके परिजनों और महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) की आंखों में आंसू साफ तौर पर देखे जा सकते थे।

मैच के बाद भारतीय स्टार ने कहा कि मैं ओलंपिक में भारत के लिए हमेशा अच्छा करना चाहती थी लेकिन ये मौका अब मुझसे दूर चला गया।

साल 2005 में सानिया मिर्जा का ऑस्ट्रेलिया ओपन

सानिया मिर्जा ने अपने करियर का पहला ग्रैंडस्लैम मैच साल 2005 ऑस्ट्रेलियन ओपन में खेला, यह मैच सिंडी वॉटसन (Cindy Watson) के खिलाफ था।

केवल 18 साल की उम्र में भारतीय खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में वाइल्ड कार्ड एंट्री ली थी, अपने पहले मैच में अपने से 9 साल सीनियर खिलाड़ी के सामने वह शुरू से ही दबाव में दिखी।

इस मैच में उन्होंने कई गलतियां की और अंत में उन्हें पहला सेट 6-3 से गंवाना पड़ा। दूसरे सेट में वह 3-2 से पीछे थी, उन्होंने विरोधी के शक्तिशाली स्ट्रोक को दूर करने और लंबी रैलियां खेलने का फैसला किया।

ऑस्ट्रेलिन ओपन 2005 में सिंडी वॉटसन के ख़िलाफ़ एक्शन में सानिया मिर्ज़ा।
ऑस्ट्रेलिन ओपन 2005 में सिंडी वॉटसन के ख़िलाफ़ एक्शन में सानिया मिर्ज़ा।ऑस्ट्रेलिन ओपन 2005 में सिंडी वॉटसन के ख़िलाफ़ एक्शन में सानिया मिर्ज़ा।

ये मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और इस वजह से वॉटसन गलतियां करने पर मजबूर हुई, इसके बाद सानिया ने लगातार 4 गेम जीते और दूसरा सेट 6-3 से अपने नाम किया, निर्णायक मुकाबले में तो उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और 6-0 से जीत हासिल की।

इस मैच के बार में सानिया ने बताया कि “मैं पहले सेट में काफी परेशान हुई, वहीं दूसरे सेट में भी मुझे दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन मैं नेट पर मार रही थी ना कि ज्यादा बड़े या दूर, फिर मैंने अपने शॉट पर ध्यान दिया और अंत में यह काम कर गया।"

अपने पहले ग्रैंड स्लैम मैच में जीत के साथ, सानिया मिर्ज़ा एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के दूसरे दौर में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी बनीं, उनसे पहले  निरुपमा संजीव (Nirupama Sanjeev) ने 1998 में इसी इवेंट में ये कारनामा किया था।

सानिया में इस मैच के बाद काफी सुधार देखने को मिला और दूसरे दौर में उन्होंने हंगरी की पेट्रा मंडुला (Petra Mandula) को 6-2, 6-1 से हराया।

तीसरे दौर में सानिया मिर्जा की भिड़ंत सेरेना विलियम्स (Serena Williams) से हुई। इस स्टार खिलाड़ी के सामने वह कमजोर नजर आई और उन्हें 6-1, 6-4 से शिकस्त झेलनी पड़ी।

2009 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में सानिया मिर्ज़ा ने महेश भूपति के साथ, मिश्रित युगल प्रतियोगिता जीती, जो उनके 6 ग्रैंडस्लैम में से पहली जीत थी।

साल 2005 फ्रेंच ओपन में सानिया का पर्दापण

उस वर्ष के अंत में, सानिया मिर्ज़ा ने 2005 फ्रेंच ओपन के लिए रोलैंड गैरोस की पवित्र मिट्टी पर कदम रखा, जहां उन्होंने अर्जेंटीना की गिसेला डुल्को (Gisela Dulko) का सामना किया, फिर पहले दौर में 32 वें स्थान पर रहीं।

ऑस्ट्रेलियन ओपन के पहले मैच की तरह ही सानिया मिर्जा ने काफी धीमा खेल दिखाया और पहले सेट में वह 5-1 से पीछे थी, इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने थोड़ी वापसी की कोशिश करी लेकिन 35 मिनट में ही वह 6-3 से हार गई

सानिया ने दूसरे सेट में वापसी की लेकिन उनकी विरोधी ने जल्दी ही उनका तोड़ निकाल लिया। गिसेला ने बहुत सारे ड्रॉप शॉट्स का सहारा लेकर सानिया मिर्जा को मैच में काफी पीछे छोड़ दिया और उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

2005 विंबलडन चैंपियनशिप में पर्दापण

सीनियर लेवल पर विंबलडन डेब्यू में भारतीय खिलाड़ी का सामना जापान अकीको मोरीगामी से हुआ। उन्होंने 2003 में विंबलडन गर्ल्स डबल्स का खिताब पहले ही जीत लिया था।

जापान की अनुभवी खिलाड़ी के सामने सानिया मिर्जा ने एक मजबूत शुरुआत की और पहले सेट में उन्होंने 5-1 से बढ़त हासिल कर ली, हालांकि इसके बाद अकीको ने वापसी करते हुए स्कोर 5-3 तकर दिया लेकिन अंत में भारतीय खिलाड़ी 6-3 से जीत हासिल करने में सफल रही।

दूसरे सेट बेहद ही रोमांचक रहा और दोनों में से कोई भी हार मानने को तैयार नहीं था। एक समय जापानी खिलाड़ी 5-3 से आगे थी हालांकि सानिया ने इसके बाद बहुत कोशिश की लेकिन अंत में वह 6-3 से हार गई

वहीं निर्णायक सेट में जापानी खिलाड़ी ने 4-3 से बढ़त हासिल कर ली थी लेकिन सानिया ने जल्दी ही स्कोर 4-4 से बराबर करते हुए मुकाबले को और रोमांचक बना दिया। इस मैराथन मुकाबले में दर्शकों को दोनों खिलाड़ियों की तरफ से लंबी रैलियां देखने को मिली।

विंबलडन 2005 में अकिको मोरिगामी के ख़िलाफ़ प्वाइंट जीत के बाद जश्न मनाती सानिया मिर्ज़ा
विंबलडन 2005 में अकिको मोरिगामी के ख़िलाफ़ प्वाइंट जीत के बाद जश्न मनाती सानिया मिर्ज़ाविंबलडन 2005 में अकिको मोरिगामी के ख़िलाफ़ प्वाइंट जीत के बाद जश्न मनाती सानिया मिर्ज़ा

अंत में सानिया मिर्जा ने बाजी मारते हुए अपने ट्रेडमार्क फॉरहैंड शॉट से निर्णायक सेट अपने नाम किया और 8-6 से जीतने में सफल रही।

सानिया ने बताया कि “मैच में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई, ये मैच कहीं भी जा सकता था, मुझे खुशी है कि मैं जीतने में सफल रही।”

दूसरे सेट में उन्हें दुनिया की नंबर 6 खिलाड़ी स्वेतलाना कुज़नेत्सोवा (Svetlana Kuznetsova) के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा और अंत में उन्हें तीन सेट तक चले मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।

हालाँकि, ऑल इंग्लैंड क्लब वह स्थान था, जहां सानिया मिर्जा ने अपना पहला महिला डबल्स क खिताब जीता। इस खिलाड़ी ने साल 2015 में मार्टिना हिंगिस (Martina Hingis) के साथ मिलकर खिताब अपने नाम किया था।

2005 यूएस ओपन में सानिया का डेब्यू

2005 में अपने पहले यूएस ओपन में, सानिया मिर्ज़ा ने शानदार प्रदर्शन किया, उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ एकल ग्रैंड स्लैम रन भी मान सकते हैं।

अपने पहले मैच में सानिया मिर्ज़ा एक ऐसे दिग्गज खिलाड़ी के खिलाफ थीं, जिन्होंने अपना करियर तब शुरू किया, जब सानिया केवल 8 साल की थी। अमेरिकी मैशोना वॉशिंगटन (Mashona Washington) के खिलाफ उनका मुकाबला शायद ही कोई भूल पाए।

यूएस ओपन में सानिया मिर्ज़ा की पहली प्रतिद्वंदी माशोना वाशिंगटन थीं।
यूएस ओपन में सानिया मिर्ज़ा की पहली प्रतिद्वंदी माशोना वाशिंगटन थीं।यूएस ओपन में सानिया मिर्ज़ा की पहली प्रतिद्वंदी माशोना वाशिंगटन थीं।

सानिया मिर्जा टूर्नामेंट में मांसपेशियों की चोट से जूझ रही थीं और यूएस ओपन में इस खिलाड़ी के लिए स्थिति कठिन होती जा रही थी।

पहले सेट में सानिया मिर्जा ने टाई ब्रेकर्स के दौरान शांत और रचित रहने के बाद 7-6 (8-6) से जीत हासिल कर सभी को प्रभावित किया। दूसरे सेट में मुकाबला उनके लिए कठिन हो गया, इस सेट में अमेरिकी खिलाड़ी उनसे अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, विरोधी के शक्तिशाली शॉट का सानिया के पास कोई जवाब नहीं था।

इसके बाद तीसरे सेट में सानिया मिर्जा ने वापसी की और अपने विरोधी की सर्विंस जल्दी ही तोड़ दी, हालांकि वाशिंगटन ने भी वापसी में ज्यादा देर नहीं लगाई और स्कोर 3-3 से बराबर कर लिया। अब मैच बराबरी पर था और विरोधी द्वारा की गई गलती का सानिया ने फायदा उठाते हुए सेट 6-4 से अपने नाम कर लिया।

इसी के साथ सानिया मिर्जा टूर्नामेंट के चौथे राउंड में पहुंच चुकी थी, मारिया शारापोवा (Maria Sharapova) के खिलाफ हारने से पहले उन्होंने इटली की मारिया एलेना कैमरिन (Maria Elena Camerin) और फ्रांस की मैरियन बारटोली (Marion Bartoli) को मात दी।

शारापोवा ने मैच के बाद “सानिया के लिए कहा कि वह बहुत अच्छी खिलाड़ी हैं और उनका भविष्य उज्जवल है”

2002 एशियन गेम्स में सानिया मिर्जा का डेब्यू

सानिया मिर्जा के फेवरेट टूर्नामेंट में से एक एशियन गेम्स, क्योंकि इस भारतीय स्टार ने एशियाई खेलों में 8 पदक जीते हैं।

2002 में बुसान (दक्षिण कोरिया) में हुए एशियन गेम्स में सानिया मिर्जा ने लिएंडर पेस (Leander Paes ) के साथ मिलकर मिक्स्ड डबल्स में कांस्य पदक जीता, उस समय सानिया की उम्र केवल 15 साल थी।

दूसरे चरण में शीर्ष वरीयता प्राप्त जापानी जोड़ी शिनोबु असागो (Shinobu Asagoe) और थॉमस शिमदा (Thomas Shimada) के खिलाफ बिना वरीयता वाली जोड़ी थी।

युवा खिलाड़ी शुरुआती पलों में थोड़ी दबाव में दिखी लेकिन पेस उन्हें कोर्ट पर गाइड करते रहे, जिसके बाद वह लय में आ गई। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ने बढ़त बना रखी थी और इस युवा खिलाड़ी ने भी उनका अच्छा साथ देते हुए एक बड़ा उलटफेर किया, भारतीय जोड़ी ने मैच 6-3, 6-3 से अपने नाम किया।

पेस ने अपने पार्टनर के बारे में कहा कि उन्हें अपनी साथी पर कोई दबाव नहीं दिखा और वह अच्छा खेली, उनमें सबसे अच्छी बात ये है कि वह अपनी गलतियों से जल्दी सीखती हैं।

दोनों खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन के बाद इस जोड़ी ने कांस्य पदक जीता, यह सानिया मिर्जा का पहला बड़ा मेडल था।

डबल्यूटीए, फेड कप और कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू

साल 2003 में सानिया मिर्जा ने हैदराबाद में हुए इंडियन ओपन से अपने डबल्यूटीए का पर्दापण किया। उनका पहला मैच ऑस्ट्रेलियाई ईवी डोमिनिकोविच के खिलाफ था। युवा खिलाड़ी ने अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ एक शानदार शुरुआत की, लेकिन अंत में उन्हें 6-2, 1-6, 2-6 से हार झेलनी पड़ी।

इसी साल बाद में सानिया ने फेड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जो महिलाओं के डेविस कप के बराबर है। टूर्नामेंट में उनकी शुरुआत 21 अप्रैल को फिलीपींस के फ्रांसेस्का लाओ (Francesca La’) के खिलाफ हुई थी। इस मैच में सानिया मिर्जा ने 6-2, 6-3 से जीत दर्ज की।

उनका पहला कॉमनवेल्थ मैच 2010 में नई दिल्ली में कुक आइलैंड्स ब्रिटनी तेई (Brittany Teei) के खिलाफ था। इस दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी ने 6-2, 6-0 से जीत दर्ज कर रजत पदक जीता।

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