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ल्यूज दिग्गज शिवा केशवन ने ऐल्प की अपनी पहली क्रिसमस यादों को किया साझा 

38 वर्षीय को एक युवा खिलाड़ी के रूप में यूरोप में प्रशिक्षण के दौरान क्रिसमस के त्योहार का लुत्फ उठाने का मौका मिला, जिसके लम्हें आज भी उनकी यादों में ताज़ा हैं।

लेखक रितेश जायसवाल ·

हिमालय की तलहटी के विषम जलवायु परिस्थितियों में पले-बढ़े इस छह बार के शीतकालीन ओलंपिक खिलाड़ी शिवा केशवन का स्नो स्पोर्ट्स (बर्फ के खेल) से बहुत खास लगाव रहा। खासतौर पर ल्यूज से। बचपन में एथलेटिक्स से लेकर जिमनास्टिक्स तक कई खेल खेलने के बावजूद केशवन ने पारंपरिक खेलों से परे ल्यूज में अपना करियर बनाने का फैसला किया। जो कि वास्तव में संभव ही नहीं था, लेकिन केशवन के जुनून के आगे कोई भी मुश्किल टिक न सकी।

अपने फैसले पर अड़े रहने की वजह से ही वह इस खेल में भारत के सबसे प्रतिष्ठित एथलीटों में से एक बन गए। उन्होंने 1998 के बाद से छह ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया और परिणामस्वरूप इस उपलब्धि को हासिल करने वाले लिएंडर पेस के बाद दूसरे भारतीय बन गए। उन्होंने एशिया कप में 10 मेडल जीते, जिसमें चार गोल्ड भी शामिल हैं। इसी के साथ एशियाई खेलों में सबसे अधिक गति हासिल करने का रिकॉर्ड भी बनाया।

ल्यूज में देश के एक बड़े खिलाड़ी होने के चलते केशवन को अपने करियर में विभिन्न स्थानों पर यात्रा करने का मौका मिला, जहां उन्होंने कम उम्र से ही विभिन्न संस्कृतियों का अनुभव किया। अपने शुरुआती प्रशिक्षण के दिनों से केशवन अपनी एक खास याद को साझा करते हैं, जिसमें उन्हें ऐल्प्स पर्वत श्रृंखलाओं पर क्रिसमस के त्योहार से प्यार हो गया था।

क्रिसमस की यादें

अपने शहर मनाली में रहते हुए केशवन ने कभी क्रिसमस को इतने उत्साह से मनाए जाने वाले त्योहार के रूप नहीं देखा था। लेकिन यूरोप में अपने प्रशिक्षण के दौरान उन्हें इस उत्सव की भव्यता को अनुभव करने का पहला अवसर प्राप्त हुआ। इतने बड़े स्तर पर इस त्योहार को मनाते हुए देखना केशवन के लिए बेहद रोमांचक था और उनकी सबसे खूबसूरत यादों में से एक भी। 

वह कहते हैं, “क्रिसमस रोमांचक है, लेकिन मुझे याद नहीं है कि इसे कभी घर पर मनाया गया। वह एक समय था जब मैं कई साल पहले एक प्रतियोगिता के लिए यूरोप में प्रशिक्षण लेने ऐल्प्स गया था। उस वक्त मैनें पहली बार क्रिसमस के त्योहार को इतने भव्य रूप में मनाते हुए देखा। वहां यह त्योहार बिल्कुल अलग स्तर पर मनाया जाता है। उनके लिए क्रिसमस वह है, जो हमारे लिए दीवाली है। मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे उस संस्कृति को करीब से अनुभव करने का अवसर मिला।”

तो आखिर क्रिसमस के बारे में ऐसा क्या है, जो केशवन को सबसे ज्यादा पसंद है? इस पर केशवन कहते हैं, “क्रिसमस की भावना बेहद सकारात्मक है। इस त्योहार में उपहार लेने और देने की परंपरा मेरे लिए इसे बहुत ही खास बनाती है।”

केशवन का इटली कनेक्शन

2018 में थोड़ा विराम लेने के बाद, भारतीय ल्यूज दिग्गज ने शीतकालीन खेलों को विकसित करने और ओलंपिक आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए भारत और इटली में काफी समय बिताने की कोशिश की। केशवन भारत में एक सीज़नल इटैलियन रेस्टोरेंट चलाने के साथ-साथ एक राष्ट्रीय प्रतिभा स्काउट कार्यक्रम भी चलाते हैं।

इटली न केवल उनकी मां का मूल देश है, बल्कि वह राष्ट्र भी है जिसने उन्हें उनके प्रारंभिक वर्षों के दौरान अधिक से अधिक प्रशिक्षण लेने में सहायता की। जिसके चलते इटली ने केशवन को शीतकालीन ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी दिया, लेकिन यह बताने की जरूरत नहीं है कि इस खिलाड़ी ने उस प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया। आज वह देश के युवाओं के लिए मिसाल हैं।