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फ़ेडरर के ख़िलाफ़ उस सेट से आगे अब सुमित नागल की नज़र है टोक्यो 2020 पर

22 वर्षीय इस युवा भारतीय टेनिस स्टार ने 2020 में अपनी उम्मीदों और लिएंडर पेस के बारे में भी बात की

लेखक Olympic Channel Writer ·

सुमित नागल ने अंतर्राष्ट्रीय टेनिस जगत में तब ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरीं थीं, जब उन्होंने यूएस ओपन में रोजर फ़ेडरर के ख़िलाफ़ एक सेट जीत लिया था। हांलाकि उस मैच में फ़ेडरर को 4-6, 6-1, 6-2, 6-4 से जीत मिली थी। 2020 में सुमित की शुरुआत कुछ ख़ास नहीं रही है। ऑस्ट्रेलियन ओपन 2020 के बारे में भी सुमित नागल ने बात की, जहां वह इस साल क्वालिफ़ायर्स में ही रह गए थे।

रोजर फ़ेडरर के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक मैच

‘’ये साल का पहला टूर्नामेंट था और जब आप ब्रेक के बाद खेल रहे होते हैं तो मुश्किल तो होती है। और यही वजह है कि आप पूरी तरह लय में नहीं होते हैं, तो बस मेरे साथ भी यही हुआ और मैं थोड़ा बीमार भी था। यही वजह थी कि ऑस्ट्रेलियन ओपन से पहले हुई एक प्रतियोगिता से मैंने नाम वापस ले लिया था।‘’

क्वालिफ़ायर्स से आगे नहीं जाने को लेकर सुमित नागल ज़्यादा निराश नहीं दिखे और कहा कि वह ख़ुश हैं कि उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन में किसी भी तरह शिरकत करने का मौक़ा हासिल हुआ। ‘’मैं वहां बिना किसी तैयारी के गया था, लेकिन मैंने अपने लिए एक उम्मीद बनाई रखी थी और यही मुझे अच्छा लगा कि मैंने एक कोशिश तो की, घर पर बैठा तो नहीं था।“

किसी भी युवा एथलीट से अगर आप पूछेंगे कि आपका सपना क्या है, तो उनका जवाब यही होगा कि ओलंपिक पदक जीतना है। भारतीय टेनिस स्टार सुमित नागल का ख़्वाब भी इससे अलग नहीं है, और उन्होंने साफ़ कर दिया कि इस साल उनका पहला लक्ष्य यही है कि 2020 टोक्यो के लिए क्वालिफ़ाई किया जाए।

ग्रैंड स्लैम के रास्ते टोक्यो का सफ़र

ओलंपिक चैनल के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में सुमित नागल ने कहा, ‘’इस साल का मेरा पहला लक्ष्य है कि मैं टोक्यो ओलंपिक में जगह बनाऊं। 2019 में कोई ओलंपिक नहीं था, और मैंने तीन महीने हार्ड कोर्ट पर ही खेला जिसकी वजह से साउथ अमेरिका नहीं गया।‘’

‘’ज़ाहिर है अभी दबाव तो काफ़ी है क्योंकि ये ओलंपिक का साल है और मैं ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहता हूं। एक खिलाड़ी के तौर पर आपको ये तय करना होता है कि आप दबाव को कैसे झेलते हैं।‘’

‘’जैसा मैंने पहले कहा, पहले तीन महीने मैं हार्ड कोर्ट पर ध्यान दूंगा और फिर क्ले कोर्ट की तरफ़ फ़ोकस शिफ़्ट करूंगा।‘’ : सुमित नागल, भारतीय टेनिस खिलाड़ी

भारत की ओर से टेनिस में अब तक एकमात्र ओलंपिक पदक लिएंडर पेस ने हासिल किया है, जब उन्होंने 1966 अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। पेस के उसी पदक ने कई युवाओं को टेनिस में आने के लिए प्रेरित किया था और सुमित नागल भी उन्हीं में से एक हैं।

‘’चैंपियन’’, इसी शब्द का इस्तेमाल सुमित नागल ने किया जब उनसे लिएंडेर पेस के बारे में बात की गई। ‘’देश के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है, जो मुझे लगता है कि कहीं से आसान नहीं है। उनकी जीत, कुछ बेहतरीन मुक़ाबले जो उन्होंने डेविस कप में खेला है और अभी तक वह एकमात्र भारतीय टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्हें एकल मुक़ाबलों में ओलंपिक पदक हासिल है, जो सोच से भी परे है।‘’

वर्ल्ड नम्बर-127 सुमित नागल ने एटीपी प्राग चैलेंजर में छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी के तौर पर प्रवेश किया।

टोक्यो ओलंपिक की राह

इस साल अपने खेल को लेकर भी सुमित नागल काफ़ी आश्वस्त दिखे, उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि ये साल साबित करे कि पिछली बार कोई तुक्का नहीं लगा था। ‘’ये बहुत ज़रूरी है कि सभी को समझ आए कि साल 2019 एक तुक्का नहीं था, लेकिन ये तभी मुमकिन है जब मैं धैर्य और संयम के साथ इस साल भी खेलूं।“

‘’मैं हड़बड़ाहट में कुछ नहीं करना चाहता, न ही अपने ऊपर कोई दबाव डालना चाहता हूं, और न ही ये कहूंगा कि मैं इस साल कई प्रतियोगिता जीतूंगा। पिछले साल की तुलना में इस साल मेरा लक्ष्य थोड़ा अलग है, मैं इस बार ऊंचे स्तर पर भी खेल रहा हूं, तो मुझे लगता है कि मंज़िल तक पहुंचने के लिए सही दिशा और धैर्य के साथ बढ़ना चाहिए।‘’

सुमित नागल फ़िलहाल बेंगलुरु टेनिस ओपन में शिरकत कर रहे हैं, जहां उन्होंने पहले राउंड के मुक़ाबले में मालेक जज़िरी को मात दी है। इस बार भी उनकी नज़र 2017 के इतिहास को दोहराने पर है, जब उन्होंने बेंगलुरु टेनिस ओपन का ख़िताब अपने नाम किया था।