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तरुणदीप राय का ओलंपिक मेडल के साथ भारतीय तीरंदाजी को आगे ले जाने का संकल्प

अनुभवी भारतीय तीरंदाज तरुणदीप राय ने कहा कि वह टोक्यो में अपना आखिरी ओलंपिक खेलेंगे

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

अपने 24 साल के करियर में तरुणदीप राय (Tarundeep Rai) ने विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में सफलता हासिल की है, लेकिन ओलंपिक का गौरव उसे अभी तक नहीं मिल पाया है। 

2004 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में पुरुषों की व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में उन्होंने 43वां स्थान हासिल किया था। वे 2012 के ओलंपिक में 11वें स्थान पर रहने वाली भारतीय पुरुष तीरंदाजी टीम का भी हिस्सा रहे। जबकि, रिकर्व इवेंट में 12वां स्थान हासिल किया। 

राय, टोक्यो ओलंपिक में अंतिम बार धनुष और तीर उठायेंगे। उन्होंने रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल किया है। नामची के तीरंदाज का मानना ​​है कि यह पदक लाने और भारतीय तीरंदाजी को आगे ले जाने का सबसे अच्छा मौका होगा। 

राय ने ओलंपिक चैनल से कहा, "ओलंपिक को छोड़कर बाकी अन्य प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुका हूं। इसलिए, अब मेरा पूरा ध्यान ओलंपिक पर है। टोक्यो 2020, शायद मेरा आखिरी ओलंपिक होगा। इसमें मैं खुद की और देश की उम्मीदों को पूरा करना चाहता हूं। इसके लिए मैंने कड़ी मेहनत की है और मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार मेरे पास इसे हासिल करने का एक मौका है।" 

दो बार के ओलंपियन जानते हैं कि उनके समुदाय को आगे बढ़ाने में पदक एक भूमिका निभा सकता है। वह किरती नामक एक सिनो-तिब्बती जातीय समूह से संबंधित हैं। माना जाता है कि किरात हिमालय के शिकारी कबीलों में से एक है। 

उन्होंने कहा, "मैं देश के लिए खेलता हूं और विशेष रूप से किराती समुदाय के लिए एक उदाहरण बनने की कोशिश नहीं करता।" 

राय कहते हैं, "अगर मैं उनके लिए कुछ करना चाहता हूं, तो भी मुझे ओलंपिक पदक जीतने के अपने लक्ष्य को हासिल करना होगा। हमारे देश में ओलंपिक पदक के बिना अपने समुदाय के लिए कुछ करना बहुत मुश्किल है। अगर मैं इसे जीतता हूं, तो मैं पूरे देश को तीरंदाजी में आगे ले जा सकता हूं।" 

राय आठ पुरुष और आठ महिला तीरंदाजों के कोर ग्रुप में शामिल हैं- जो कि पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में टोक्यो ओलंपिक की तैयारी कर रहा है। उन्हें विश्व कप के लिए राष्ट्रीय चयन ट्रायल के लिए भी शॉर्टलिस्ट किया गया है।

टोक्यो ओलंपिक के लिए पूरी तरह से तैयार है तीरंदाज तरुणदीप राय

उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक है, लेकिन इससे पहले तीन विश्व कप (चरण) हैं जिन्हें हम मील के पत्थर की तरह मान रहे हैं।" 

"टोक्यो जाने से पहले टीम इस विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करेगी। इसका फायदा ये मिलेगा कि हम यहां अच्छा प्रदर्शन करते हैं या नहीं। हम अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं। हम में से कई कमजोर भी पड़ सकते हैं, क्योंकि हमने लंबे समय से प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लिया है।" 

राय ने 19 साल की उम्र में अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला था। उनका मानना ​​है कि तीरंदाजी में तब से बहुत उछाल आया और चुनौतियां बढ़ गई हैं। एक अन्य प्रमुख सकारात्मक बदलाव पर राय ने प्रकाश डाला कि तीरंदाजी में आने वाले युवा, घरेलू प्रतियोगिताओं को और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। 

उन्होंने कहा, "जब मैंने शुरुआत की थी, तब नेशनल चैंपियनशिप में 50-60 तीरंदाज शामिल हुआ करते थे। लेकिन, इन दिनों बहुत सारे प्रतिभागी हैं। प्रतियोगिता में निर्धारित निश्चित संख्या के कारण सभी नहीं खेल पाते। मेरे समय पर तीरंदाजों का स्कोर पहले या दूसरे नम्बर के लिए होता था, लेकिन अब शीर्ष 12 में भी खत्म नहीं होगा।" 

उन्होंने कहा, "घरेलू प्रतिस्पर्धाएं कठिन होती जा रही हैं। हमें लगता है कि अगर हम समर्पित नहीं रहेंगे, तो हार जाएंगे और टीम में जगह नहीं बना पायेंगे।" 

राय तीरंदाजी विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उतरेंगे। इसका पहला चरण 19 से 25 अप्रैल तक ग्वाटेमाला सिटी में होगा।