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थाईलैंड ओपन: इतिहास, विजेता और क्यों है 2021 ख़ास

1984 में शुरू हुआ थाईलैंड ओपन बैडमिंटन की दुनिया का एक ख़ास हिस्सा बन गया है।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

थाईलैंड ओपन के लिए महवपूर्ण साल

साल 2021 की बात की जाए तो यह साल थाईलैंड ओपन के लिए ख़ास है। कोरोना वायरस की वजह से 2020 में बहुत सी प्रतियोगिताओं को रद्द कर दिया गया है। इस साल BWF 2 थाईलैंड ओपन को होस्ट करेगा एक तो है योनेक्स थाईलैंड ओपन (Yonex Thailand Open) जो कि 12 से 17 जनवरी और टोयोटा थाईलैंड ओपन (Toyota Thailand Open) जो कि 19 से 24 जनवरी को खेला जाएगा।BWF वर्ल्ड टूर फाइनल में ग्रेड 2 लेवल 1 इवेंट को रखा गया है और लेवल 2 में ऑल इंग्लैंड ओपन, चाइना ओपन और इंडोनेशिया ओपन जैसी सुपर 1000 की प्रतियोगिताएं आती हैं।

लेवल 3 की बात की जाए तो डेनमार्क ओपन, जापान ओपन, मलेशिया ओपन और फ़ूज़ौ चाइना ओपन आते हैं जो कि सुपर 750 प्रतियोगिताएं हैं।थाईलैंड ओपन इतिहास

थाईलैंड ओपन का पहला संस्करण 1984 में खेला गया था। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ थाईलैंड ने इस प्रतियोगिता को सालाना प्रतियोगिता बनाने का फैसला किया लेकिन 1986, 1998, 2002, 2010, 2014 और 2020 कुछ ऐसे साल रहे जब इस टूर्नामेंट को ख़ास वजहों से रद्द कर दिया गया था।

थाईलैंड ओपन में पहली बार मेंस सिंगल्स, मेंस डबल्स, वुमेंस सिंगल्स और वुमेंस डबल्स खेला गया था और मिक्स्ड डबल्स को पहली बार तीसरे संस्करण में यानी 1987 में शामिल किया गया था।

बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (Badminton World Federation – BWF) जो कि इस खेल की गवर्निंग बॉडी भी है उन्होंने इस प्रतियोगिता को ग्रेड 2 लेवल 4 (सुपर 500) का दर्जा दिया।

हाल ही में किए गए बदलावों के हिसाब से ओलंपिक गेम्स, थॉमस, उबेर कप और बीडब्लूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप को ग्रेड 1 में रखा गया है। ग्रेड 2 में BWF वर्ल्ड टूर स्पर्धाओं को शामिल किया गया है।

जब से बैडमिंटन की दुनिया में थाईलैंड ओपन ने कदम रखे हैं तब से लेकर आज तक यह इस खेल का मुख्य इवेंट बना हुआ है। कोरोना वायरस (Covid-19) के खलल के बाद अब यह इवेंट वर्ल्ड बैडमिंटन कैलेंडर में मुख्य भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

साल 2021 ऐसा साल है जिसमें इस प्रतियोगिता को दो बार अंजाम दिया जाएगा।

आगे बढ़ने से पहले थाईलैंड ओपन के इतिहास पर एक नज़र डालते हैं और जानते हैं कि इस प्रतियोगिता में किन किन खिलाड़ियों अपनी छाप छोड़ी है।

इस बार थाईलैंड ओपन के दोनों टूर्नामेंट को सुपर 1000 ग्रेड 2 लेवल 2 में रखा गया है ताकि खिलाड़ी अपनी BWF रैंकिंग को बढ़ावा दे सकें।

2021 में खेली जाने वाले थाईलैंड ओपन को 2020 BWF वर्ल्ड टूर के अंतरगत खेले जाएंगे और यह 2020 BWF वर्ल्ड टूर फाइनल के क्वालिफायर्स के रूप में भी आंका जाएगा।

इतिहास के विजेता और विजयी देश

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो थाईलैंड ओपन की पहली मेंस चैंपियनशिप को जीतने वाले इकुक सुगियार्तो (Icuk Sugiarto) थे और वहीं वुमेंस सिंगल्स का ताज इंग्लिश शटलर हेलेन ट्रोक (Helen Troke) ने पहना था।

अभी की बात की जाए तो चीनी शटलरों का सबसे ज़्यादा दबदबा बना हुआ है और सालों से उन्होंने अपने खेल से लाखों दिल और ख़िताब भी जीते हैं।

थाईलैंड ओपन में चीन आज तक का सबसे सफल देश है और इनके नाम कुल 58 मेडल हैं जिनमें मेंस सिंगल्स में 9, वुमेंस डबल्स में 17 और मिक्स्ड डबल्स में 9 मेडल शामिल हैं।

वहीं इंडोनेशिया के नाम 37 मेडल हैं (मेंस सिंगल्स में 10, वुमेंस सिंगल्स में 4, मेंस डबल्स में 12, वुमेंस डबल्स में 5 और मिक्स्ड डबल्स में 6)। इंडोनेशिया इस फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर विराजमान है।

इस बीच एलन बुडीकुसुमा (Alan Budikusuma), लिन डैन (Lin Dan), चेन लॉन्ग (Chen Long), सूसी सुसंती (Susi Susanti) कुछ दिग्गज शटलर निकले हैं जिन्होंने ओलंपिक गेम्स में अच्छा प्रदर्शन कर विश्व भर में खूब नाम कमाया है।

बार्सिलोना 1992 गोल्ड मेडल विजेता ने थाईलैंड ओपन वुमेस सिंगल्स को 1991 से 1994 तक हासिल किया है जो कि एक रिकॉर्ड भी है।

सी सुसंती ने थाईलैंड ओपन के वुमेंस सिंगल्स को लगातार 4 बार जीता है।

थाईलैंड ओपन में भारतीय खिलाड़ियों का कमाल

खेल की बात की जाए तो भारत और भारतीय खिलाड़ी भी पीछे नहीं रहते। थाईलैंड ओपन के पहले संस्करण में भारतीय दिग्गज प्रकाश पादुकोण (Prakash Padukone) ने फाइनल तक का सफ़र तय किया था लेकिन जीत से वंचित रह गए थे। उन्हें सुगियार्तो (Sugiarto) ने फाइनल में हराकर अपने मुल्क को खुशियों से लैस कर दिया था।

इसके बाद भारत को थाईलैंड ओपन को जीतने के लिए 28 साल लग गए हैं। भारतीय दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल (Sina Nehwal) के 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने से दो महीने पहले उन्होंने रत्चानोक इंतानोन (Ratchanok Intanon) को 2012 के फाइनल में पछाड़ कर पहला थाईलैंड ओपन खिताब जीता था।

साइना नेहवाल थाईलैंड ओपन जीतने वाली पहली भारतीय शटलर हैं

इसके बाद किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) ने साल 2013 में मेंस सिंगल्स का ताज अपने सर सजाया था। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने बूनसाक पोनसाना (Boonsak Ponsana) को धूल चटाते हुए ख़िताब अपने नाम कर अपने देश को गौरवान्वित किया था। भारतीय खेमा यहीं नहीं रुका और इसके बाद बी साई प्रणीत (B Sai Praneeth) ने सिंगल्स वर्ग में खेलते हुए 2017 थाईलैंड ओपन पर अपने नाम की मुहर लगा दी थी।

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने सिंगल्स के बाद डबल्स वर्ग में अपनी छाप बाखूबी छोड़ी है और इस जीत की लय को आगे बढ़ाया सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी (Satwiksairaj Ranjireddy) और चिराग शेट्टी (Chirag Shetty) की जोड़ी ने। 2019 संस्करण में इस भारतीय बैडमिंटन जोड़ी ने चीन की जोड़ी ली जुन हुई (Li Jun Hui ) और लिऊ यू चेन (Liu Yu Chen) को फाइनल में पस्त किया था।

यह जीत भारत के लिए BWF सुपर 500 इवेंट की पहली डबल्स टाइटल जीत थी।