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विवेक सागर प्रसाद: भारतीय हॉकी का एक ऊभरता हुआ सितारा

15 साल की उम्र में विवेक सागर प्रसाद को कॉलरबोन फ़्रैक्चर हो गया था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दो साल बाद भारतीय हॉकी टीम में दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के तौर पर डेब्यू किया

लेखक सैयद हुसैन ·

आम तौर पर युवापन को एक उत्साह के साथ जोडा जाता है, यह अहंकार के साथ आता है और किसी भी क़ामयाबी को हासिल करने की ललक जैसी होती है। यही वह बात जो भारतीय हॉकी टीम के नवीनतम स्टार विवेक सागर प्रसाद (Vivek Sagar Prasad)को दूसरों से अलग करती है।

हाल ही में उन्होंने साल 2019 के लिए FIH राइज़िंग स्टार का अवॉर्ड अपने नाम किया है, लेकिन इसके बाद भी विवेक ने जिस अंदाज़ में ओलंपिक चैनल के साथ बात की और इसपर अपनी प्रक्रिया दी, वह अद्भुत है। ‘’इसे पाकर मैं बेहद ख़ुश हूं, और ये मुझे इससे भी अच्छा करने के लिए प्रेरित करेगा।‘’

विवेक सागर प्रसाद का शांत व्यक्तित्व तब भी स्पष्ट होता है जब वे टेलीफोन पर बात करते हैं, एक गुण जो उन्होंने अपने बड़े भाई और अपने दोस्तों के साथ शतरंज खेलते हुए अपने अंदर पैदा किया।

भारतीय हॉकी टीम के इस मिडफील्डर ने सीनियर टीम में बेहद जल्द ही स्थान हासिल किया, साल की उम्र में उन्होंने पहली बार हॉकी स्टिक को हाथ लगाया और अगले 6 सालों में वह भारतीय टीम की ओर से खेल चुके थे।

उन्होंने आगे कहा, ‘’मैं देखता था कि मेरे गांव में कैसे बड़े बच्चे हॉकी खेल रहे होते थे, और ये मुझे अच्छा लगता था। जब मैंने भी इसे खेलना शुरू किया तो एक साल के अंदर ही मैं समझ गया था कि मुझे करियर इसी में बनाना है, और उसके बाद से मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।‘’

विवेक सागर प्रसाद को पहली बार 2018 में भारतीय हॉकी पुरुष दस का हिस्सा बनाया गया था, लेकिन चार देशों के बीच होने वाली इस प्रतियोगिता के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में फिर उन्हें पूर्व कप्तान और दिग्गज सरदार सिंह (Sardar Singh) की वापसी के बाद स्थान खोना पड़ा था।

इस दौरान उन्होंने यूथ ओलंपिक में भी भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका अदा की, जो इससे तीन साल पहले विवेक प्रसाद ने सोचा भी नहीं था।

विवेक प्रसाद ने जानलेवा चोट पर दर्ज की जीत

विवेक प्रसाद के लिए साल 2015 बेहद शानदार जा रहा था, और वह एक बेहतरीन फ़ॉर्म से गुज़र रहे थे।  2016 जूनियर वर्ल्ड कप में वह जगह बनाने ही वाले थे, लेकिन उनकी क़िस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि न सिर्फ़ विवेक का करियर बल्कि उनकी ज़िंदगी दांव पर थी।

प्रैक्टिस मैच के दौरान इस मिडफ़िल्डर के कंधे पर साथी खिलाड़ी की स्टिक लग गई, ये चोट इतनी गंभीर थी कि विवेक प्रसाद को कॉलरबोन फ़्रैक्चर हो गया था, तुरंत ही इस युवा खिलाड़ी को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सर्जरी के बाद हड्डी तो जोड़ दी गई लेकिन इस जटिल प्रक्रिया से गुज़रने के दौरान 15 वर्षीय इस खिलाड़ी की हालत इतनी नाज़ुक हो गई थी कि उन्हें तीन दिनों तक डॉक्टर ने ICU (Intensive Care Unit) में रखा था।

विवेक बताते हैं कि इस दौरान उन्हें उनके परिवार का साथ मिला जिससे वह नकारात्मक सोच की तरफ़ नहीं बढ़े, “मेरे माता-पिता और भाई ने मुझे ये पता ही नहीं चलने दिया कि मेरी चोट कितनी गंभीर थी। मुझे पेट में भी चोटें आईं थीं, लेकिन उन लोगों ने कहा कि ये एक सामान्य सी चोट है और जल्दी ही मैं मैदान पर वापस आ जाऊंगा।‘’

हालांकि परिवार वालों ने तो बस विवेक का दिल बहलाने के लिए ऐसा बोला था, पर इस खिलाड़ी का हौसला और जज़्बा ऐसा था कि इतनी गंभीर चोट के तीन महीने बाद ही वह एक बार फिर इस खेल में लौट आए थे। फिर 2017 में उन्होंने जूनियर टीम में वापसी की और सुल्तान ऑफ़ जोहोर कप (Sultan of Johor Cup) में भारतीय टीम के कप्तान थे।

इस बीच उनके खेल को देखते हुए सीनियर टीम भी उनपर लगातार नज़र रखे हुए थी, और फिर 2018 जनवरी में पहली बार विवेक प्रसाद को भारतीय पुरुष हॉकी टीम (Indian Men’s Hockey Team) से बुलावा आ गया था। उसी महीने पहली बार विवेक 17 साल 10 महीने और 22 दिन की उम्र में टीम इंडिया की ओर खेलने वाले अब तक के दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए थे, उनसे आगे बस दिग्गज संदीप सिंह (Sandeep Singh)हैं जो 17 साल 10 महीने और 11 दिन की उम्र में भारतीय हॉकी टीम की ओर से खेल चुके हैं।

दमदार प्रदर्शन

इसके बाद से अब तक विवेक प्रसाद ने भारत के लिए 60 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में खेलते नज़र आए हैं, उनका आक्रामक खेल कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) की रणनीतियों का एक अहम और कारगर हिस्सा है।

19 वर्षीय विवेक प्रसाद अपना आदर्श मौजूदा कप्तान मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh) को मानते हैं, उन्होंने ये भी ख़ुलासा किया कि टीम में स्थान पक्का करने में मनप्रीत, पी आर श्रीजेश (P R Sreejesh) और चिंगलेनसाना सिंह (Chinglensana Singh) ने उनकी मदद भी की थी।

एफ़आईएच प्रो लीग में नीदरलैंड और बेल्जियम के ख़िलाफ़ हुए अब तक के सभी चारों मुक़ाबलों में विवेक टीम का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, और इस दौरान उनके नाम एक गोल भी है।

नीदरलैंड के ख़िलाफ़ पेनल्टी शूट आउट में भारत की ओर से पहला गोल करने वाले विवेक ही थे और ये जीत का कारण भी बना था, उनसे पहले हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh)और रूपिंदर पाल सिंह (Rupinder Pal Singh) चूक गए थे।

विवेक प्रसाद को उम्मीद है कि 21 और 22 फ़रवरी को एफ़आईएच प्रो लीग के अगले मुक़ाबले में वह कई बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी इसी फ़ॉर्म को जारी रखेंगे।