जानें FIVB वॉलीबॉल वर्ल्ड कप का अद्भुत इतिहास

FIVB वर्ल्ड कप ने बीते कई वर्षों में अपने फ़ॉर्मेट में कई बदलाव किए हैं। इसके अलावा इस खेल में समय के साथ बदलते चैंपियंस को भी देखा गया।

एक दिलचस्प और प्रतिस्पर्धी खेल के साथ मनोरंजन के लिए अच्छी शारीरिक गतिविधि वाला वॉलीबॉल का यह खेल जल्द ही दुनियाभर में काफी प्रचलित हो गया।

वॉलीबॉल के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गवर्निंग बॉडी की स्थापना की सोच के साथ साल 1947 में फेडरेशन इंटरनेशनेल डी वॉलीबॉल (FIVB) का निर्माण किया गया।

FIVB ने 1949 में चकोस्लोवाकिया (चेक गणराज्य) में पहली FIVB वर्ल्ड चैंपियनशिप आयोजित की, जिसमें सोवियत संघ विजेता रहा। टूर्नामेंट का दूसरा संस्करण 1952 में आयोजित करने के बाद FIVB ने हर चार साल बाद इस प्रतियोगिता को आयोजित किया है। 1964 में वॉलीबॉल के आधिकारिक तौर पर ओलंपिक खेलों में शामिल होने के बाद FIVB ने दो साल के अंतराल पर दो प्रमुख प्रतियोगिताओं का आयोजन निर्धारित किया।

इन दो टूर्नामेंट के बीच के लम्बे समय अंतराल में एक प्रतियोगिता कराने का विचार करते हुए FIVB ने कम टीमों के प्रवेश के साथ एक और प्रमुख प्रतियोगिता शुरू करने की योजना बनाई। जिसके बाद साल 1965 में FIVB वॉलीबॉल वर्ल्ड कप की शुरुआत हुई।

शुरुआत में FIVB वर्ल्ड कप प्रतियोगिता के प्रत्येक संस्करण के लिए नए राष्ट्र को मेज़बान के तौर पर चुना गया। साल 1977 के बाद इस टूर्नामेंट को जापान में विशेष रूप से पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए आयोजित किया जाने लगा।

चैंपियन्स की बात करें तो FIVB पुरुष विश्व कप में सोवियत संघ और ब्राज़ील क्रमश: चार और तीन स्वर्ण पदक के साथ सबसे आगे हैं। वहीं, FIVB महिला विश्व कप में चीन और क्यूबा क्रमश: पांच और चार गोल्ड मेडल के साथ सबसे आगे हैं।

आइए FIVB विश्व कप के फॉर्मेट और इतिहास पर एक नज़र डालें...

एक ख़ास फ़ॉर्मेट और ओलंपिक क्वालिफ़िकेशन

फीफा (FIFA) वर्ल्ड कप और फीबा (FIBA) बास्केटबॉल वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट के विपरीत FIVB वर्ल्ड कप में नॉकआउट चरण नहीं होते हैं और यह पूरी तरह से एक राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में आयोजित किया जाता है।

FIVB वर्ल्ड कप में भाग लेने वाली 12 राष्ट्रीय टीमों को दो पूलों में विभाजित किया जाता है और यह प्रतियोगिता दो सप्ताह की अवधि में आयोजित होती है। पहले सप्ताह में टीमें पांच इंट्रा-पूल (किसी एक समूह की सभी टीम आपस में मुक़ाबला करती हैं) मैच खेलती हैं, जबकि दूसरे सप्ताह में वे छह इंट्रा-पूल मैचों में प्रतिस्पर्धा करती हैं।

अगर कोई भी टीम तीन या चार सेटों में एक मैच जीतती है, तो उसे उस जीत के लिए तीन अंक दिए जाते हैं। हालांकि, अगर कोई मैच पांच सेट होने के बाद समाप्त होता है तो विजेता टीम को दो अंक और हारने वाली टीम को एक अंक दिया जाता है।

11 मैचों के बाद अंक तालिका में सबसे ऊपर रहने वाली टीम को FIVB वर्ल्ड कप चैंपियन का ताज पहनाया जाता है। इसके साथ ही विजेता और उपविजेता दोनों ही टीमें स्वत: ही ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई कर जाती हैं।

अगर 11 मैचों के बाद दो टीमों के अंक समान होते हैं तो विजेता टीम का फैसला FIVB तीन टाईब्रेकर के जरिए करता है।

पहला सेट भागफल है, जो कि जीते गए सेटो की संख्या और हारे हुए सेटों की संख्या का विभाजन होता है। अगर अंक तालिका में अग्रणी दो टीमें फिर से समान सेट के भागफल के साथ ही रहती हैं, तो दूसरा टाईब्रेकर कराया जाता है, जिसमें अंकों का भागफल (हासिल किए गए अंक और जीते गए अंकों को विभाजित किया जाता है) देखा जाता है।

अगर पहले दो टाईब्रेकर के बाद भी दोनों टीमें समान स्तर पर रहती हैं, तो राउंड-रॉबिन चरण के दौरान दोनों के बीच मैच के विजेता को FIVB विश्व चैंपियन का ताज पहनाया जाता है।

पुरुष वॉलीबॉल वर्ल्ड कप का इतिहास

*सोवियत संघ की जीत का सफ़र *

पोलैंड में 1965 में आयोजित किए गए FIVB मेंस वर्ल्ड कप के पहले संस्करण में ग्यारह टीमें हिस्सा लेती हैं।

उस समय की ओलंपिक चैंपियन सोवियत संघ की टीम खिताब जीतने के लिए प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। हुआ भी ऐसा ही, प्रतियोगिता में खेले गए 8 में से 7 मैच जीतकर यह टीम पहले FIVB मेंस वर्ल्ड कप की विजेता बनी।

सोवियत संघ 1991 में देश का विघटन होने तक मेंस वॉलीबॉल की चैंपियन बनी रही। पूर्वी जर्मनी में आयोजित के गए 1969 मेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप में सोवियत संघ पहली बार स्वर्ण पदक जीतने में असफल रहा और उसे कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। मेज़बान देश पूर्वी जर्मनी ने इस संस्करण की चैंपियन रही और जापान ने रजत पदक जीता।

सोवियत संघ को इसके बाद अपना ताज दोबारा हासिल करने के लिए आठ साल का लम्बा इंतजार करना पड़ा। उसने उरुग्वे के मांटेवीडियो में 1973 में आयोजित किए गए FIVB वॉलीबॉल मेंस वर्ल्ड कप में गोल्ड जीता। इसके बाद जापान ने 1977 में मेज़बान के तौर पर इस प्रतियोगिता को आयोजित करने की जिम्मेदारी ली और वह अब तक इसे बखूबी निभा रहा है।

मॉन्ट्रियल 1976 के ओलंपिक में मेंस वालीबॉल टूर्नामेंट के फाइनल में सोवियत संघ और पोलैंड के बीच पांच सेट का रोमांचक फाइनल हुआ और 1977 के FIVB मेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप में चैंपियन बनने की उम्मीद दोनों ही टीमों से लगाई जा रही थी।

सोवियत संघ ने इस टूर्नामेंट में सिर्फ एक मैच हारते हुए अपना दूसरा FIVB वर्ल्ड कप जीता। 1981 के संस्करण में व्याचेस्लाव ज़ेत्सेव (Vyacheslav Zaytsev) के नेतृत्व में सोवियत संघ ने सभी सात मैचों में जीत हासिल की और अपने FIVB वर्ल्ड कप के खिताब का बचाव करते हुए तीसरी बार चैंपियन बना।

मौजूदा चैंपियन से कार्च किर्ले की अगुवाई वाली संयुक्त राज्य अमेरिका की टीम के हारने के बाद चकोस्लोवाकिया की टीम की वजह से सोवियत संघ को 1985 FIVB मेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा। क्यूबा और इटली ने 1989 के FIVB मेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप में सोवियत संघ को शिकस्त दी और नतीजतन तीन बार की चैंपियन टीम ने तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पदक पर कब्ज़ा किया।

इस खेल पर सोवियत संघ की पकड़ कमज़ोर होती जा रही थी। हालांकि, 1991 के FIVB मेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप में इस चर्चा पर भी विराम लग गया, 23 वर्षीय दिमित्री फोमिन (Dmitry Fomin) के नेतृत्व में इस देश ने अपना चौथा वर्ल्ड कप स्वर्ण पदक हासिल किया। यहा इस प्रतियोगिता में USSR के रूप में उनकी अंतिम उपस्थिति रही।

फिर इस देश ने 1995 के FIVB विश्व कप में हिस्सा नहीं लिया और 1999 के संस्करण में रूस की टीम के तौर पर वापसी की। टूर्नामेंट में एमवीपी रोमन याकोवलेव (Roman Yakovlev) के नेतृत्व में इस टीम ने नौ जीत और दो हार के रिकॉर्ड के साथ देश के लिए पांचवां FIVB मेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप का खिताब जीता।

21वीं सदी में ब्राज़ील का उदय

1981 और 1995 के FIVB मेंस वॉलीबॉल विश्व कप में सिर्फ दो कांस्य पदक के साथ ब्राज़ील का इस खेल पर प्रभुत्व नहीं था। हालांकि नई शताब्दी में यह बदल गया। उन्होंने 2002 विश्व चैंपियनशिप जीतकर अपनी शुरुआत की और 2003 के FIVB मेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप में सबसे पसंदीदा टीम के तौर पर उभरकर सामने आई। दक्षिण अमेरिका भी शानदार प्रदर्शन करता है और पहली बार विश्व कप पर कब्ज़ा करता है। यही नहीं, अगले साल वह 2004 का ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने में भी सफल रहते हैं।

परिणामस्वरूप वे 2007 के FIVB मेंस वर्ल्ड कप के लिए जापान में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन के तौर पर शामिल होते हैं और वर्ल्ड कप को भी जीतकर दक्षिण अमेरिका सबसे पसंदीदा टीम बन जाती है।

हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका ने उन्हें पहले मैच में सीधे सेटों में हरा दिया था। हालांकि, ब्राज़ील ने अगले 10 गेम जीतते हुए सोवियत संघ को पीछे छोड़ दिया और FIVB वर्ल्ड कप का खिताब जीतने वाली एकमात्र टीम बन गई।

रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्रमशः 2011 और 2015 FIVB मेंस वॉलीबॉल विश्व कप जीता और ब्राज़ील को 2011 के संस्करण में कांस्य पदक से समझौता करना पड़ा।

कोच बर्नार्डो रेज़ेंडे (Bernardo Rezende) के सानिध्य में रिचो 2016 में देश के लिए जीत हासिल करने के साथ 17 साल की सफलता का यह कारवां लेकर ब्राज़ील साल 2017 में प्रवेश करता है।

जिसके बाद पूर्व खिलाड़ी रेनन डाल ज़ोट्टो (Renan Dal Zotto) टीम की बागडोर संभालते हैं। उनकी अगुवाई में होने जा रहे पहले FIVB मेंस वर्ल्ड कप में देश शानदार प्रदर्शन करते हुए 11-0 के रिकॉर्ड के साथ अंक तालिका में सबसे ऊपर होता है और 2019 में अपना तीसरा वर्ल्ड कप खिताब जीतता है।

महिला वॉलीबॉल वर्ल्ड कप का इतिहास

शुरुआती वर्षों में चीन का रहा प्रभुत्व

पुरुष टीम की तरह ही सोवियत संघ की महिला वॉलीबॉल टीम ने जापान को फाइनल में सीधे सेटों में हराते हुए 1973 का पहला FIVB वॉलीबॉल वर्ल्ड कप जीता।

जापान में 1977 के संस्करण में चीन की महिलाओं की वालीबॉल टीम ने FIVB महिला विश्व कप में अपनी शुरुआत की और सभी तीन टीमों को हराते हुए शीर्ष स्थान पर रही। हालांकि, दक्षिण कोरिया के साथ सेट विभाजन में हारते हुए उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा।

ऐसा लग रहा था कि 1977 के FIVB महिला वॉलीबॉल विश्व कप में चैंपियन जापान को हराने वाली चीन एकमात्र टीम थी।

1981 के FIVB महिला वॉलीबॉल विश्व कप में चीन की महिला वॉलीबॉल टीम में काफी बेहतरीन खिलाड़ी थे। कैप्टन और सेटर सुन जिनफैंग (Sun Jinfang) के नेतृत्व में चीन बाकी दलों से बेहतर नज़र आ रहा था। उसने टूर्नामेंट में सभी सात मैच जीते और सिर्फ चार सेट हारते हुए FIVB महिला वॉलीबॉल विश्व कप जीता।

वर्तमान चीनी महिला वॉलीबॉल टीम की कोच और अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल हॉल ऑफ फ़ेम का हिस्सा बने लैंग पिंग (Lang Ping) 1981 की विजेता टीम का हिस्सा रहीं। उनकी ही कप्तानी में चीन FIVB महिला विश्व कप में एक और सफल अभियान बनाने में सफल रहा। उन्हें टूर्नामेंट का सबसे मूल्यवान खिलाड़ी माना गया था।

प्रतियोगिता में चीन पूरी तरह से प्रभावशाली रहा। उसने टूर्नामेंट में सिर्फ एक सेट ड्रॉ किया, जो रजत पदक विजेता क्यूबा के खिलाफ हुआ था।

महिला विश्व कप में क्यूबा का अद्भुत प्रदर्शन

क्यूबा की महिलाओं की वॉलीबॉल टीम ने FIVB महिला विश्व कप के पहले चार संस्करण में दो रजत पदक जीते थे।

हालांकि, टूर्नामेंट की MVP मिरेया लूइस (Mireya Luis) और डिप्टी मैगली कार्वाजल (Magaly Carvajal) के नेतृत्व में क्यूबा ने आखिरकार 1989 में FIVB महिला विश्व कप में स्वर्ण पर कब्ज़ा करने में कामयाबी हासिल की और वॉलीबॉल इतिहास में किसी भी अन्य दल के विपरीत बेहतरीन प्रदर्शन किया।

1991 की विजयी टीम के सात खिलाड़ियों ने 1991 के FIVB महिला विश्व कप के लिए जापान पहुंची और अपने ताज का बचाव करते हुए लगातार दूसरी बार FIVB महिला विश्व कप जीतने वाली मात्र तीसरी वॉलीबॉल टीम बन गई।

लुइस और कार्वाजाल ने वापसी की और टीम को बेहतर रखते हुए 1995 में क्यूबा को तीसरा FIVB महिला विश्व कप दिलाया। लुइस दो MVP पुरस्कार जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनीं।

12-टीम 1999 के FIVB महिला विश्व कप में क्यूबा ने खेल में अपनी पैर जमाने की कोशिश की। कोच एंटोनियो पेरडोमो ने टीम स्पोर्ट्स के इतिहास में सबसे सफल रनों में से एक को कवर करते हुए चौथे सीधे FIVB महिला विश्व कप खिताब के लिए अपना पक्ष रखा।

नई शताब्दी में चीन और इटली का प्रदर्शन

क्यूबा में घर वापसी आने के वजह से क्यूबा की महिलाओं की वॉलीबॉल टीम की खेल में पकड़ खत्म हो गई और चीन ने 2003 में तीसरा FIVB विश्व कप खिताब अपने नाम किया।

2000 के दशक के मध्य में महिलाओं के वॉलीबॉल स्टेज में एक नए राष्ट्र का उदय हुआ। इटली एक ऐसा देश था जिसने कभी भी विश्व कप पदक नहीं जीता था। उसने 2007 के साथ-साथ 2011 FIVB महिला विश्व कप भी जीता।

स्टैंड-आउट ब्लॉकर सिमोना गियोली (Simona Gioli) के नेतृत्व में इटली की महिला टीम ने FIVB महिला विश्व कप के 2007 और 2011 के संस्करण कुल 22 मैचों में जीत हासिल की।

झू टिंग (Zhu Ting) के नेतृत्व में चीन की महिला वालीबॉल टीम ने इस खेल में सफलता के एक मंत्र को अपनाया और 2015 और 2019 के FIVB महिला विश्व कप के साथ-साथ रियो 2016 में स्वर्ण पदक जीता।

झू टिंग को FIVB महिला विश्व कप के 2015 और 2019 संस्करण में सबसे बेहतरीन खिलाड़ी माना गया। यह एकमात्र महिला है, जिसने इस खेल के इतिहास में क्यूबा की मिरिया लुइस (Mireya Luis) के साथ दो बार यह पुरस्कार जीता है।

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