फ़ीचर

एडिले सुमिरवाला ने बताया कि कैसे AFI ने कोरोना महामारी की विकट परिस्थितियों को संभाला  

भारतीय ग्रां प्री की पूर्व संध्या पर एडिले सुमिरवाला ने कोरोनो महामारी और ओलंपिक वर्ष में एथलीटों का मनोबल बढ़ाने के राष्ट्रीय महासंघ द्वारा किए प्रयासों के बारे में चर्चा की 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

पटियाला के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में 18 फरवरी से शुरू होने वाले तीन इंडियन ग्रां प्री मुकाबलों के साथ घरेलू सीनियर एथलेटिक्स सीजन का आगाज होगा।

यह एक नियमित फीचर और सीजन कैलेंडर का भी प्रमुख फीचर है। ओलंपिक वर्ष में ग्रां प्री का आयोजन बहुत मायने रखता है। यह इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि तनावभरे साल के बाद यह एथलीटों के लिए औपचारिक प्रतियोगिता में वापसी को चिह्नित करेगा।

मार्च में जब कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण देशभर में लॉकडाउन लगा दिया गया, तब भी अधिकांश भारतीय एथलीट पटियाला, बैंगलोर और ऊटी के कोचिंग कैंप में थे। इस दौरान एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सबसे पहले एथलीटों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि वे निष्क्रियता और ठहराव के लम्बे वक्त के दौरान प्रेरित रहें।

AFI के प्रमुख एडिले सुमिरवाला (Adille Sumariwalla) ने ओलंपिक चैनल से कहा, "पहले हमने बबल बनाया और यह सुनिश्चित किया कि कोई इसके अंदर—बाहर ना हो।

उन्हें वहां सख्त प्रोटोकॉल के तहत रखा गया। एक स्थिति में तो उन्हें ट्रैक और प्रशिक्षण पर जाने तक की भी अनुमति नहीं थी। क्योंकि वे सभी स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के परिसरों में थे। इसलिए सरकार के साथ काम करते हुए प्रोटोकॉल लागू करना हमारे लिए बहुत आसान था।"

उन्होंने कहा, "हम अपने एथलीटों के लगातार संपर्क में थे। हर हफ्ते उनसे व्यक्तिगत और ग्रुप में बात करते थे। हमने बहुत सी अलग-अलग चीजें कीं। ताकि, उन्हें प्रोत्साहित कर सकें और वहां की परेशानियों के बारे में जानकर, उनका उत्साह बनाये रख सकें।"

जैसे-जैसे चीजें बेहतर होती गईं, AFI ने प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू कर दी और एथलीटों को ट्रैक पर जाने की अनुमति दी। उन्होंने इन-हाउस मीट की व्यवस्था की, ताकि एथलीट अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त को हासिल कर सकें।

पूर्व धावक सुमिरवाला ने कहा, "ना सही तरह से प्रतिस्पर्धा, बिना प्रशिक्षण, वातावरण की समस्या थी। इसलिए समय प्रणाली को अपनाते हुए सही तरीके से प्रतिस्पर्धा शुरू की गई, ताकि उन्हें महसूस हो कि वे एक प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं।"

अधिकांश अन्य महासंघ केवल एक खेल का संचालन करते हैं। इसके विपरीत सभी ट्रैक और फ़ील्ड इवेंट AFI के दायरे में आते हैं। अपने आप में प्रतियोगिताओं को आयोजित करना बहुत बड़ी चुनौती है। यह तब और बढ़ जाती है जब महामारी के दौरान SOP का भी ध्यान रखते हुए इसे पूरा करना हो।

AFI ने जनवरी में जूनियर फेडरेशन कप के साथ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की फिर से शुरुआत की।

सुमिरवाला ने संगठनात्मक पहलू के बारे में कहा, "यह बहुत मुश्किल था। भोपाल में हर थ्रो के बाद सामान को सेनेटाइज करना होता था। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाता था कि स्टेडियम में केवल निर्धारित संख्या में ही लोग प्रवेश करें। इसके अलावा सामाजिक दूरी बनाये रखना भी जरूरी था। ताकि, एथलीट को सुरक्षित रखते हुए, उन्हें प्रतियोगिता उपलब्ध कराई जा सके, जिसकी उन्हें जरूरत थी।"

लॉकडाउन हटने के बाद AFI ने भाला फेंकने वाले एथलीटों को शिफ्ट कर दिया। इनमें भारत के चमकते हुए पदक की उम्मीद नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) भी शामिल थे। उन्हें भुवनेश्वर भेज दिया गया, क्योंकि वो गर्म मौसम में प्रशिक्षण लेना चाहते थे। एथलीटों को पहले दक्षिण अफ्रीका में एक प्रशिक्षण कार्यकाल के लिए जाना तय किया गया था, लेकिन कोविड-19 के नए स्ट्रेन मिलने के बाद देश में बढ़ते संक्रमण को खतरे को देखते हुए उनकी यात्रा रद्द कर दी गई थी।

AFI प्रमुख ने कहा, "अभी हमारे पास अपने एथलीटों को कहीं भेजने की कोई योजना नहीं है। क्योंकि उनकी सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। अगर वे प्रदर्शन दौरे के लिए जाते हैं, तो यह संभवत: अप्रैल के बाद होगा।"

कोरोना महामारी ने न केवल टोक्यो खेलों के आयोजन में विलम्ब किया है, बल्कि इसके लिए एथलीटों की तैयारी को भी और मुश्किल बना दिया है। यह उनके लिए और भी परेशानी भरा हो सकता है, जिन्होंने एडवांस में अच्छी तरह से योग्यता हासिल कर ली थी और उन्हें इसके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तेज रहना पड़ा था।

सुमिरवाला ने कहा, "हमने कोरोना काल का प्रबंधन बहुत अच्छे से किया है। हर एक एथलीट के पीछे खड़े रहकर महीने, सप्ताह और फिर दिन के हिसाब से काम किया। हां, हमें इसमें कुछ बदलाव करने होंगे क्योंकि अब स्थितियां बदल गई हैं। हमारे एथलीट ओलंपिक के दौरान अपने शिखर पर हों इसके लिए एथलीटों से लगातार बात करके एक योजना तैयार की है।"

ओलंपिक में जाने वाले एथलीटों का टीकाकरण भी एक चुनौतीपूर्ण मामला हो सकता है। AFI प्रमुख ने कहा कि हालांकि, महासंघ ने इस मामले पर अभी कोई चर्चा नहीं की। वह एथलीटों को टीका लगाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें मजबूर नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "अगर टोक्यो ओलंपिक के लिए यह कहा जाता कि बिना टीका लगवाये इसमें भाग नहीं ले सकते, तो यह एक व्यक्तिगत विकल्प होगा।"

पांच स्पर्धाओं में 12 भारतीय एथलीटों ने टोक्यो खेलों के लिए अपना स्थान पहले ही पक्का कर लिया है।