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कौन हैं टोक्यो 2020 में दिखने वाला भारत का आगामी कुश्ती सितारा रवि कुमार दहिया?

टोक्यो ओलंपिक में लिए क्वालीफाई करने वाले चार पहलवानों में दहिया भी शामिल  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारतीय पहलवान जब टोक्यो 2020 के मैट पर मुकाबला करने उतरेंगे तो उनके कंधों पर देशवासियों की बहुत सी उम्मीदों का बोझ होगा। इस स्पर्धा में भारत ने पिछले तीन ओलंपिक में कम से कम एक पदक हासिल किया है।

इस बार भारत से चार पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया और रवि कुमार दहिया पहले ही मार्की स्पर्धा के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं।

पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में मुकाबला करने वाले रवि कुमार दहिया ओलंपिक में भारतीय पहलवानों की सफलता की कहानी को जारी रखना चाहते हैं।

22 वर्षीय, अपने पहले ओलंपिक की सावधानीपूर्वक तैयारी कर रहे हैं और दमदार प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रहे हैं। हरियाणा के पहलवान के बारे में क्या आप यह जानते हैं?

कुश्ती में भारत का हॉटस्पॉट है हरियाणा निवासी दहिया

दहिया हरियाणा के सोनीपत जिले के नाहरी गांव के रहने वाले हैं। यह राज्य भारत को कुछ बेहतरीन पहलवान देने के लिए बिख्यात है। जैसे योगेश्वर दत्त, बजरंग पूनिया, फोगाट बहनें सभी हरियाणा से हैं।

स्वभाविक रूप से छोटी उम्र में ही उनके अंदर कुश्ती के लिए रुचि पैदा हो गई। उनके पिता भले ही एक किसान रहे, लेकिन वो हमेशा से दहिया की कुश्ती में महत्वाकांक्षाओं के बड़े समर्थक रहे।

प्रसिद्ध छत्रसाल स्टेडियम में मिला प्रशिक्षण

कुश्ती के लिए दहिया की लगन को कोच सतपाल सिंह ने बहुत पहले ही देख लिया था। उन्होंने 10 साल की उम्र में दहिया को अपनी विंग में शामिल करते हुए नई दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोचिंग दी, जो उनके गांव से करीब 40 किमी की दूरी पर था।

भारतीय कुश्ती के लिए प्रसंशनीय इस स्कूल ने देश को दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त जैसे पहलवान दिए हैं। एक सच यह भी है कि दहिया के पिता एक दशक से भी ज्यादा वक्त तक बेटे के लिए दूध और फल नियमित गांव से दिल्ली लेकर जाते थे।

कुश्ती के मुकाबले में दाव लगाती विनेश फोगाट

जूनियर लेवल पर सफलता और चोट की परेशानी

सालियाडोर डी बाहिया में 2015 जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में दहिया की प्रतिभा नजर आई। उन्होंने 55 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता, लेकिन सेमीफाइनल में चोटिल भी हो गए।

सीनियर वर्ग में करियर बनाने के दौरान चोट के कारण उन्हें पीछे भी हटना पड़ा। 2017 के सीनियर नेशनल्स में चोट ने उन्हें परेशान किया। इस कारण उन्हें कुछ समय मैट से दूर रहना पड़ा।

उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में करीब एक साल लगा। हालांकि, चोट के कारण लगे ब्रेक के बाद उन्होंने उसी जगह से वापसी की जहां से छोड़ा था। दहिया ने बुखारेस्ट में 2018 विश्व अंडर 23 कुश्ती चैम्पियनशिप के 57 किग्रा वर्ग में रजत पदक पर कब्जा जमाया।

इसके बाद उन्होंने शीआन2019 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कांस्य पदक जीतने से चूक गए। इसके बाद वो 57 किलोग्राम वर्ग में भारत के प्रमुख पहलवान के रूप में जल्द ही स्थापित हो गए। उन्होंने 2019 विश्व चैम्पियनशिप के लिए चयन ट्रायल में ओलंपियन संदीप तोमर और सीनियर पहलवान उत्कर्ष काले को हराया।

टोक्यो ओलंपिक क्वालिफिकेशन

दहिया ने नूर सुल्तान में विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के बाद टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई किया। वह ओलंपिक में पहली बार खेलेंगे।

5 फीट 7 इंच की लम्बाई वाले दहिया अपनी श्रेणी में सबसे लम्बे पहलवानों में से एक हैं। नूर सुल्तान में उन्होंने लम्बाई का पूरा फायदा उठाया। क्वार्टर फाइनल में 2017 के विश्व चैंपियन युकी ताकाहाशी को बाहर करने से पहले उन्होंने यूरोपीय चैंपियन आर्सेन हरुट्युनियन को 16वें राउंड में हराया।

ताकाहाशी पर उस जीत में उनका दमखम और मानसिक दृढ़ता सामने आई, जो उन्हें टोक्यो 2020 में स्थान पक्का करने के लिए काफी था।

आखिरकार वह सेमीफाइनल में स्वर्ण पदक विजेता झाउ उगेव से हार गए और उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। यूग्वेव के खिलाफ भी उनके लड़ने की खूबियां उजागर हुई। एक समय पर 0-6 से पिछड़ने के बाद भी उन्होंने समय पूरा होने से पहले रूसी खिलाड़ी पर दो अंक अर्जित करते हुए वापसी की।

प्रो रेसलिंग लीग में अजेय रिकॉर्ड

भारत में 2019 प्रो रेसलिंग लीग में प्रदर्शन ने दहिया का सीना चौड़ा कर दिया। हरियाणा हैमर्स के लिए यह अहम पड़ाव साबित हुआ। उन्होंने एक नाबाद अभियान के साथ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने उनको खिताब दिलाने में बड़ी मदद की।

दहिया का फार्म

2020 में भी वह प्रभावशाली रहे हैं। उन्होंने कोरोना महामारी की मार से पहले मार्च में नई दिल्ली में 2020 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।

हालांकि उन्हें हाल ही में सर्बिया में आयोजित व्यक्तिगत विश्व कप के शुरुआती दौर में हार का सामना करना पड़ा। क्योंकि कोरोना महामारी के बाद उन्हें सीधे मुकाबले में उतारा गया था। दहिया टोक्यो में भारत के लिए पदक की मजबूत संभावना बनी हुई हैं।