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कौन है नेत्रा कुमानन

नेत्रा कुमानन ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला हैं और समर खेलों में सीधे प्रवेश पाने वाली पहली भारतीय नाविक हैं।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

नेत्रा कुमानन (Nethra Kumanan) ओलंपिक में एक नौकायन इवेंट के लिए क्वालिफाई करने वाली 10वीं भारतीय हैं, लेकिन उनकी उपलब्धि थोड़ी अधिक खास है।

नेत्रा कुमानन भारत की पहली महिला हैं जिन्होंने ऐसा किया है और एक तरह से ऐसा करने वाली पहली भारतीय नाविक हैं जिन्होंने सीधे ओलंपिक में जगह बनाई है और वो भी समर गेम्स के लिए खेले जाने वाले क्वालिफाइंग इवेंट को जीतकर।

उनके पहले नौ भारतीय सिर्फ खेलों में कोटा स्थान पूरा न होने की वजह से जगह बनाने में कामयाब रहे थे। उन्होंने प्रतीक्षा सूची में रहकर स्थान हासिल किया था। वो सभी 9 खिलाड़ी पुरुष थे।

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि अप्रैल 2021 में ओमान में मुस्सनाह ओपन चैंपियनशिप (Mussanah Open Championship) जीतने के बाद, नेत्रा कुमानन ने लेज़र रेडियल श्रेणी में टोक्यो ओलंपिक में अपना स्थान हासिल किया।

नेत्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फारस की खाड़ी में स्थित सबसे पुराने मिलेनियम रिजॉर्ट में आयोजित एशियाई क्वालिफायर में अपनी जगह बनाई थी।

मुस्सनाह संयोग से वही जगह है, जहां 2013 में अंडर -21 के एक इवेंट में नेत्रा ने अपने अंतरराष्ट्रीय नौकायन करियर की शुरुआत की थी।

चेन्नई की ये नाविक लेजर रेडियल श्रेणी में रेस लगाती हैं। ये एक छोटी शैली की नाव होती है, जिसे एक हाथ से चलाया जाता है।

नेत्रा कुमानन नौकायन में भारत के लिए नई राह दिखाने वाले एथलीट रही हैं। वो पिछले साल जनवरी में मियामी में हेम्पेल विश्व कप सीरीज के दूसरे दौर में कांस्य पदक जीतने के बाद इस खेल में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं।

लेकिन नेत्रा ने उस जीत का ज्यादा जश्न नहीं मनाया क्योंकि वो इटली की खिलाड़ी और अपनी रूममेट और दोस्त मटिल्डा टल्लूरी से हार गई थीं। वो पांचवें स्थान पर रही थी।

नेत्रा कुमानन एक अनुभवी नाविक हैं। उन्होंने 2014 और 2018 एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन इंडोनेशिया के जकार्ता में 2018 सीजन में देखने को मिला था, जहां वो चौथे स्थान पर रही थी।

नेत्रा के लिए जकार्ता में हासिल किया गया चौथा स्थान एक अफलता थी क्योंकि उनका उद्देश्य ओलंपिक में एक स्थान को हासिल करना था। उन्होंने कहा था कि वो हतोत्साहित हो गई थी, जिसकी वजह से पीछे रह गई थीं।

हालांकि देखा जाए को ये भी एक बड़ी उपलब्धि है, यह देखते हुए कि वह कहाँ से आती हैं।

भारत के ऐतिहासिक विश्व कप पदक के बाद, नेत्रा कुमानन ने कहा था, "ज्यादातर लोगों को पता नहीं है कि नौकायन भारत में होता है।" "हमारे यहां क्रिकेट, फुटबॉल या हॉकी जैसे खेलों को ज्यादातर खेला जाता है, जबकि सेलिंग को सिर्फ आर्मी और नेवी में जाना जाता है।" 

21 अगस्त, 1997 को जन्मी, नेत्रा को 2011 में तमिलनाडु सेलिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक ग्रीष्मकालीन शिविर के दौरान नौकायन के बुलाया गया था। ये जल्द ही उनके जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया।

"मुझे ये पसंद है, ये किसी अन्य खेल की तरह नहीं है, और मैंने एक बच्चे के रूप में सब कुछ खेला है," नेत्रा कहती हैं, "नौकायन किसी भी अन्य खेल की तुलना में अलग और अधिक मानसिक तनाव वाला खेल रहा है जिसमें मैंने हाथ आजमाया है।"

नेत्रा चेन्नई के एसआरएम कॉलेज में इंजीनियरिंग की छात्र हैं, उन्होंने दो बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती है और दो अन्य अवसरों पर उपविजेता रही हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय इवेंट में उनका पहला पोडियम फिनिश 2014 में चेन्नई में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल रेगाटा में रहा था।

उन्होंने अपने परिवार में अपने छोटे भाई, नवीन को भी नौकायन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा की लेकिन अंततः मिशिगन में अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने का विकल्प चुना।

बता दें कि नेत्रा के पिता कुमाना एक आईटी कंपनी चलाते हैं, उनका काम नेत्रा को डेटा देना और एनालेटिकल सोपर्ट देना रहा है।

नेत्रा ने कहा था, "अगर कोई युवा खिलाड़ी मेरे पास आता है, तो मैं उन्हें बताती हूं कि इस खेल में बहुत समय लगता है, पानी में बहुत घंटे लगते हैं, लेकिन इन सब का फायदा मिलता है।

उन्होंने आगे कहा, "और आपको दुनिया का सैर करने को मिलता है, विभिन्न देशों के लोगों से मिलने का मौका मिलता है। वहां आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करते हैं और आप उनसे बेहतर करने की कोशिश करते हैं।"

नेत्रा पिछले डेढ़ साल से स्पेन के ग्रैन कैनरिया में हंगरी के कोच और दो बार के ओलंपियन तामस एसजेस (Tamas Eszes) के साथ का ट्रेनिंग कर रही हैं।