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भारत की युवा पीढ़ी के लिए मिसाल साइना नेहवाल

विश्व नंबर 1 से लेकर ओलंपिक मेडल हासिल करने तक का साइना का संघर्ष।  

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारत की बेटी और भारतीय बैडमिंटन की चहेती साइना नेहवाल (Saina Nehwal) टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करने से अब महज़ कुछ ही कदम दूर हैं। इस खिलाड़ी के पास 2020 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई करने के मौके कम हो गए हैं। फिलहाल 30 अप्रैल कट ऑफ़ डेट बताई गई है, अगर इस खिलाड़ी को एक बार फिर ओलंपिक गेम्स में अपना जलवा दिनांक से पहले अपनी रैंकिंग को बढ़ाना होगा।

नेहवाल की इंग्लैंड चुनौती

साइना नेहवाल की फेहरिस्त में ऑल इंग्लैंड ओपन जीतना ज़रूर होगा। गौरतलब है कि प्रकाश पादुकोने (Prakash Padukone) और पुल्लेला गोपीचंद दोनों ने ही इस खताब को अपने नाम किया हुआ है और अब उनके पथ पर चल कर नेहवाल भी इस ताज को अपने सर पर सजाना चाहेंगी।

ऑल इंग्लैंड ओपन की बात की जाए तो नेहवाल ने साल 2011 में इस प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा कर खुद के होने का प्रमाण दिया था।

अपने सफ़र को आगे बढ़ाते हुए नेहवाल ने 2015 में ऑल इंग्लैंड फाइनल में पहुंच कर अपने आलोचकों को कड़ा जवाब दिया साइना नेहवाल का ओलंपिक सफ़रनेहवाल और ओलंपिक गेम्स का नाता बहुत पुराना है। 2008 बीजिंग गेम्स में भाग लेने से लेकर कुछ साल बाद इसी गेम्स में मेडल जीतने तक का सफ़र इस खिलाड़ी ने बखूबी निभाया है। हालांकि 2008 में नेहवाल मेडल तो जीत न पाईं लेकिन वे ओलंपिक गेम्स के क्वार्टरफाइनल में पहुंचने वाले पहली भारतीय महिला बैडमिंटन बनीं।

नेहवाल ने ओलंपिक मेडल 2012 ओलंपिक गेम्स में जीता और इस जश्न को पूरे भारत ने मनाया। नेहवाल बैडमिंटन खेल में पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं जिन्होंने कोर्ट से लेकर पोडियम तक का सफ़र तय किया हो। नेहवाल ने ब्रॉन्ज़ मेडल वांग झिन (Wang Xin) के खिलाफ जीता था और इर उस जीत में पूरा भारत देश शरीख हुआ था। साल 2016 में भी यह भारतीय बैडमिंटन स्टार बहुत उम्मीदों से उतरीं थी लेकिन वे कमाल न कर सकीं और शुरूआती दौर में ही बाहर हो गई।

नेहवाल के कारनामें

साइना नेहवाल ने साल 2006 में पेशेवर तौर पर इस खेल को अपनाया था और आज तक इस खेल ने नेहवाल को बहुत सी उपलब्धियों से नवाज़ा है। इस जुनून ने नेहवाल को 24 अंतराष्ट्रीय खिताबों से नवाज़ा है और हर खिताब को भारत ने बेहद जोश से मनाया है।

नेहवाल के नाम बहुत सी उपलब्धियां हैं, पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बैडमिंटन में मेडल जीतने वाली, पहली भारतीय जिन्होंने बीडब्लूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप (BWF World Championships) के फाइनल में कदम रखे हों। इतना ही नहीं नेहवाल पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं जिन्होंने सुपर सीरीज़ का खिताब जीता हो

नेहवाल के पूर्व कोच पुल्लेला गोपीचंद ने कहा “उस समय उनका जाना ठीक था लेकिन मेरे लिए मुश्किल ज़रूर था। इस चीज़ के बाद मुझे पीवी सिंधु के खेल पर काम करने का ज़्यादा मौका मिला।”  

आगे जाकर विमल कुमार की कोचिंग में नेहवाल ने बहुत सी उंचाइयों को छुआ। इस दौरान नेहवाल ने वर्ल्ड नंबर 1 का खिताब अपने नाम किया और ऐसा करने वाली वे पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं।  

अपने 14 साल के करियर में नेहवाल ने भारत को और खेल को बहुत सम्मान दिलाया है। अगर इस खिलाड़ी ने भारत के गौरव को बढ़ाया है तो भारत ने भी पलट कर इस खिलाड़ी को राजीव गाँधी खेल रत्न, अर्जुन अवार्ड और पद्मा भूषण से नवाज़ा है।

साइना बनाम सिंधु 

जहां साइना नेहवाल घर घर का हिस्सा बन गईं थी वहीं सिंधु को खेलते हुए 4 साल हुए थे। जहां नेहवाल ने लंदन गेम्स ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था वहीं चार साल बाद सिंधु ने ओलंपिक गेम्स में सिल्वर मेडल हासिल कर अपने होने का प्रमाण दिया।

इस बीच इन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों का आमना सामना 4 बार हुआ है और तीन बार नेहवाल ने बाज़ी मार अपने लोहे को मनवाया है। सिंधु के खिलाफ नेहवाल की आखिरी जीत 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में आई थी

साइना बनाम सिंधु

• 2014 इंडिया जीपी गोल्ड: साइना नेहवाल की जीत (21-14, 21-17)

• 2017 इंडिया ओपन: पीवी सिंधु की जीत (21-16, 22-20)

• 2018 इंडोनेशिया मास्टर्स: साइना नेहवाल की जीत (21-13, 21-19)

• 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स: साइना नेहवाल की जीत (21-18, 23-21)।

नेहवाल पर आधारित फिल्म में पारीनीति चोपड़ा

नेहवाल के घर गई पारीनीति के बोल थे “यह उम्दा है, काश मैंने भी खेल को अपने जीवन में ज़्यादा महत्व दिया होता। मेरी ज़िन्दगी अलग होती। कितना मज़ेदार है यह सब।” नेहवाल की लोकप्रियता का अंदाज़ा भी तब हुआ जब जनता ने कपिल शर्मा शो में उन्हें बखूबी सरहाया।

नेहवाल ने अपने और अपने पति पारूपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap) को लेकर कहा “हमारी कहानी बहुत अच्छी है। हम पहली बार बैडमिंटन की कोचिंग में मिले और हमने बचपन से एक दोस्ती को उजागर किया है।” 

“फिर धीरे धीरे हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई और हमने ज़्यादा समय बिताना शुरू कर दिया। मुझे समझ अगया कि मैं इन के साथ पूरी ज़िन्दगी बिता सकती हूं।

साइना जुड़ीं भारतीय जनता पार्टी से

जनवरी में नेहवाल ने बताया था वे भारतीय जनता पार्टी से एक नेता के रूप में जुड़ गईं हैं। उन्होंने आगे कहा “में बहुत मेहनत करती हूं, मुझे मेहनत करना पसंद है। हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी भी दिन रात देश के लिए काम करते हैं। अगर मैं भी अपने देश के लिए ज़्यादा काम कर पाऊं तो मैं खुद को खुशनसीब समझूंगी। मुझे मोदी सर से बहुत प्रेरणा मिली है।”

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2020 ओलंपिक गेम्स के लिए साइना नेहवाल की रणनीति क्या होती है और वे इस लड़ाई को कैसे पार पाती हैं।

19 साल की उम्र में साइना नेहवाल

ओलंपिक कांस्य पदक विजेता और भारतीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने अपने करिय...