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दीपा मलिक के अनुसार सरकार के समर्थन से मुख्य धारा में आ रहा पैरा स्पोर्ट 

भारत की पैरालंपिक समिति वित्तीय सहायता योजना के जरिए बिना बाधा के जारी रखेगी टोक्यो जाने वाले एथलीटों की तैयारी 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ (FICCI) के बैनर तले दिसंबर, 2020 में आयोजित हुए इंडिया स्पोर्ट्स अवार्ड्स 2020 कार्यक्रम में पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) को 'सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय खेल महासंघ पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।

यह अवार्ड PCI की अध्यक्ष दीपा मलिक (Deepa Malik) के नेतृत्व में बोर्ड के सदस्यों का खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के साथ तालमेल बिठाते हुए ईमानदारी और गंभीरता के साथ किए काम को सम्मानित करने का प्रतीक है।

यह अवार्ड कमेटी के लिए इसलिए भी खास था, ​क्योंकि यह ऐसे समय दिया गया जब कोरोना वायरस महामारी ने सभी के सामने एक चुनौती पेश की थी, जिसके लिए पहले से कोई भी तैयार नहीं था।

दीपा मलिक ने ओलंपिक चैनल को बताया, "मुझे लगता है कि कोरोनाकाल में भी महासंघ ने जबरदस्त काम किया है।"

"हमने कई वेबिनार आयोजित किए। एथलीटों के मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा। घर पर प्रशिक्षण के दौरान भी उनके साथ खडे रहे और सोशल मीडिया के जरिये सम्पर्क बनाये रखा। एक फेडरेशन के रूप में हमारे पास टारगेट ओलंपिक पोडियम (TOP) स्कीम में अधिकतम लोग (38) हैं। यह दर्शाता है कि हम अच्छा काम कर रहे हैं।"

"प्रत्येक एथलीट जो या तो टोक्यो जाने के लिए कतार में है या वित्तीय सहायता योजना में कुछ आर्थिक मदद पाने की उम्मीद कर रहा है। टोक्यो के लिए क्वालीफाई करने वाली लड़की (भाविना हसमुखभाई पटेल) को विशेष रूप से टेबल टेनिस खेलने के लिए उसके अनुरूप व्हीलचेयर मिली है। उसे खुद की अंतरराष्ट्रीय मानक वाली टेबल के लिए भी फंड मिला है। केवल उपकरणों के लिए उसे सात लाख दिए गए हैं। यह तो सिर्फ एक एथलीट की बात है, ऐसे कई उदाहरण हैं। हमारे पास सात-आठ एथलीट प्रतीक्षा सूची में हैं। एक बार वो अपने अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से वापस लौट आयें तो उन्हें TOP की सूची में शामिल किया जा सकता है।"

हालांकि, लोगों के बीच एक व्यापक धारणा बन चुकी है कि पैरा-स्पोर्ट्स के साथ अक्सर सौतेली मां जैसा व्यवहार किया जाता है। मलिक को लगता है कि केंद्र सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के निरंतर सहयोग से वे धीरे-धीरे मुख्यधारा में आते जा रहे हैं।

एक कार्यक्रम के दौरान PCI अध्यक्ष दीपा मलिक

2016 में रियो पैरालंपिक्स की शॉटपुट स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली मलिक का कहना है, "एक बार जब नीतियां मुख्य धारा बन जाती हैं, तो स्वाभाविक रूप से इसे बहुत सारे लोग स्वीकार करेंगे।"

"आप केंद्र सरकार की किसी भी योजना को देख लें, ये सभी के लिए समान हैं। यहां तक ​​कि मीडिया ने भी इस बात को स्वीकार करना शुरू कर दिया है। वे श्रेणियों और विकलांगता कोटा आवंटन से अवगत हैं। सरकार की हर पहल में एक पैरा-एथलीट भागीदार होता है।"

उन्होंने कहा, "फिट इंडिया अभियान, फिर खेलेगा इंडिया या फिर स्वच्छ भारत अभियान में पैरा—एथलीट को ऐम्बैसडर बनाया गया। सरकार बहुत मददगार रही है। TOP योजना में 38 एथलीट शामिल हैं और हम उनके केंद्र बिंदु हैं। वहां बहुत सारी मुख्यधारा की भावना है, जो हमें मिल रही हैं।"

हालांकि, ऐसी कुछ गंभीर चुनौतियां हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि समुदाय दीर्घावधि में विकसित हो सके।

"मैं और अधिक पैरा—अकादमियां खोलना चाहती हूं, क्योंकि इसके बिना खेल आगे नहीं बढ़ेगा। वर्तमान में हमारे पास पांच अकादमियां हैं। हालांकि इसमें समय लगेगा। उन्होंने घोषणाएं की है, लेकिन इन्हें पूरा होने में कम से कम तीन-चार साल लगेंगे। पैरा-स्पोर्ट के लिए प्रत्येक राज्य सरकार के लिए एक नीति होना भी जरूरी है।"

"पैरा-स्पोर्ट के साथ—साथ शिक्षा प्रणाली को विकसित करना भी महत्वपूर्ण है। हम पाठ्यक्रम शुरू करना चाहते हैं ताकि हमें योग्य क्लासीफायर्स मिल सकें। क्योंकि अभी कई श्रेणियों में हमारे पास नहीं हैं। यदि हमारे पास अपने IPC से अनुमोदित तीसरे स्तर के क्लासिफायरियर होंगे तो चीजें काफी आसान होंगी।"

उन्होंने कहा, "हमें देश में कम से कम 40-50 क्लासिफायर चाहिए। ताकि बच्चे सही श्रेणी में खेल सकें। आप दो साल खेलते हैं या दौड़ लगाते हैं और फिर खेलने के लिए विदेश जाते हैं, तो वहां आपको एक अलग श्रेणी में रख दिया जाता है। इससे आपके दो साल की मेहनत बेकार चली जाती है। जब तक आप विदेश नहीं जाते हैं तब तक आप वर्गीकृत नहीं हो पाते हैं।"

मलिक और उनकी टीम आगामी टोक्यो पैरालंपिक का समापन भारत के लिए पदकों की संख्या को दोहरे अंकों तक पहुंचाने में एथलीटों की मदद में कोई कसर नहीं छोड़ रही। यदि भारत उस उपलब्धि को हासिल करने में कामयाब रहता है तो यह PCI और उसके पहले एथलीट अध्यक्ष की एक और शानदार उपलब्धि होगी।