अभिनव बिंद्रा जैसा प्रदर्शन दोहराने में सक्षम हैं नई पीढ़ी के भारतीय निशानेबाज- जॉयदीप कर्माकर

पूर्व निशानेबाज के अनुसार टोक्यो ओलंपिक में निशानेबाजी में कम से कम दो पदक जीतेगा भारत

लेखक भारत शर्मा ·

अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग और जीतू राय जैसे स्टार भारतीय निशानेबाजों की तहत ही अब सौरभ चौधरी, राही सरनोबत, मनु भाकर और अभिषेक वर्मा जैसे नई पीढ़ी के भारतीय निशानेबाजों को भी उनकी सफलता का मंत्र दे दिया गया है। 

हालांकि, बिंद्रा ओलंपिक में भारत के लिए एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता हैं। उन्होंने 2008 में बीजिंग में 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में इस पदक पर कब्जा जमाया था। भारत के पूर्व निशानेबाज जॉयदीप करमाकर का मानना ​​है कि निशानेबाजों की नई पीढ़ी बिंद्रा के करतब को दोहराने में सक्षम है और यह सुनिश्चित करती है कि बिंद्रा भारत के लिए ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले क्लब में अकेले नहीं हैं।

17 वर्षीय चौधरी ने 2018 एशियाई खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अपना नाम कमाया था। भारतीय शूटिंग के भविष्यों में से एक चौधरी के ने पहले ही ISSF विश्व कप में छह स्वर्ण पदक अपने नाम कर रखे हैं।

सरनोबत 2012 में 25 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली महिला थीं। हालांकि वह 2016 के रियो ओलंपिक क्वालीफिकेशन से चूक गईं, इस दिग्गज ने ISSF म्यूनिख विश्व कप के दौरान टोक्यो ओलंपिक के लिए अपना स्थान पक्का किया था।

प्रतियोगिता में निशाना लगाते निशानेबाज जॉयदीप करमाकर

खुद को एक विलक्षण प्रतिभा का धनी बताते हुए भाकर ने म्यूनिख में ISSF विश्व कप में चौथे स्थान पर रहने के बाद टोक्यो ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के लिए अपना स्थान पक्का किया है।

वर्मा ने एक बेहतरीन प्रदर्शन के साथ अपने सीजन की शुरुआत की थी। उन्होंने ISSF विश्व कप से दो स्वर्ण पदक और एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया है। इसके बाद उन्होंने बीजिंग में ISSF विश्व कप में स्वर्ण पदक के साथ टोक्यो ओलंपिक के लिए 10 मीटर एयर पिस्टल श्रेणी में अपना स्थान पक्का किया।

करमाकर ने ओलंपिक चैनल को बताया, "मुझे लगता है कि संभावनाएं (ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने के लिए) बदल रही हैं। इस बाद निश्चित रूप से मौका है! यदि आप शूटिंग टीम में वर्तमान प्रवृत्ति का अनुसरण करते हैं, तो ’एकलप्रिय’ मानसिकता धीरे-धीरे खत्म हो रही है और अब यही खेल की सुंदरता है। भारतीय निशानेबाजी में बेंच स्ट्रेंथ अभूतपूर्व है। यदि आप देखते हैं तो ज्यादातर इवेंटों में 'शीर्ष निशानेबाज’ अक्सर नई प्रतिभाओं से मात खा जाते हैं और इसलिए 'शीर्ष स्थान पर बने रहने की असुरक्षा' की भावना मजबूत प्रतिस्पर्धा को जन्म देती है। यह एक स्वस्थ और एक स्वागत योग्य चीज है!"

"अभिनव (बिंद्रा) ने हमेशा शूटिंग में एकछत्र राज किया है, लेकिन मुझे यकीन है कि वह बहुत जल्द अपने साथ कुछ अन्य एथलीटों को पाएंगे और सबसे अच्छी बात यह होगी कि इनमें से कुछ एथलीट उनके खेल (शूटिंग) से ही होंगे।"

जहां टोक्यो ओलंपिक में भारतीय निशानेबाजों की अगली पीढ़ी के लिए बहुत कुछ दांव पर होगा, वहीं कुछ युवाओं के लिए यहां और अधिक सीखने का मौका होगा।

विश्व कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक में भारत राइफल शूटर करमाकर ने इस बार युवा पीढ़ी के भारतीय निशानेबाजों के पीछे अपना पूरा जोर लगा दिया है और उन्हें लगता है कि यह उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उन्हें संभावित 'इतिहास निर्माता' करार दिया है।

करमाकर ने कहा, "वे एक निडर पीढ़ी के निशानेबाज हैं और मुझे उनके सकारात्मक दृष्टिकोण से लगाव है। निशानेबाजों को शायद कुछ उच्चतम उपलब्धियों के साथ सबसे अच्छे लोगों के रूप में देखा जाता है, फिर भी ये निशानेबाज अपने पैर जमीन पर रखते हुए विनम्रता से भरे हुए हैं। इतना ही नहीं वो सब पेशेवर तरीके से अपने ’काम’ के साथ जुड़े हुए हैं। शायद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और वह सम्मान के हकदार हैं।"

उन्होंने कहा, "नई पीढ़ी के निशानेबाजों को एक अधिक व्यवस्थित तरीके से प्रशिक्षित किया जाता है, और वे एक स्थिर विकास पर हैं, जहां वे बहुत गंभीरता से शोहरत हासिल करने के पीछे नहीं भागते हैं। वो पूरी तरह से अपने खेल के प्रति न्यौछावर हैं। मुझे लगता है कि ये संभावित रूप से इतिहास रचने वाली प्रतिभाएं हैं।"

करमाकर के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि 2012 के लंदन ओलंपिक में आई थी। जहां वह पुरुषों की 50 मीटर राइफल प्रोन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाले स्लोवेनिया के राजमंड डेवेक के बाद चौथे स्थान पर रहे थे।

उनका मानना ​​है कि जब भारतीय निशानेबाजों को टोक्यो से कम से कम दो पदक जीतने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, उसी बीच कोरोना वायरस महामारी ने वास्तव में संदेह के कुछ बीज बो दिए हैं।

उन्होंने कहा, "ईमानदारी से कहूं, तो चीजें अब थोड़ी मुश्किल और अप्रत्याशित हो गई हैं। टोक्यो ओलंपिक निश्चित रूप से भारतीय निशानेबाजों के लिए एक ब्लॉकबस्टर इवेंट होगा। हालांकि, महामारी ने चीजों को थोड़ा बिगाड़ दिया दिया है। उन्होंने कहा कि, मेरा वास्तव में मतलब यह नहीं है कि प्रदर्शन नीचे जाएगा! बल्कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि एक लंबे ठहराव के बाद निशानेबाज किस तरह से प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा, "निडर युवा ब्रिगेड पूरी तरह से सकारात्मक है। मुझे यकीन है कि निशानेबाज पिछले 7-8 महीनों में खराब हुए समय के बाद भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में वर्तमान की संदेशास्पद स्थिति होने के बाद भी मैं कम से कम दो पदक मिलने की उम्मीद कर रहा हूं।"