अभिनव बिंद्रा ने शुरुआती सालों में नहीं किया था सामाजिकता पर समय बर्बाद- शिमोन शरीफ

देश का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बेहतरीन एथलीटों में से एक अभिनव बिंद्रा

लेखक भारत शर्मा ·

भारत के लिए एकमात्र ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा बिना किसी संदेह के देश का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बेहतरीन एथलीटों में से एक हैं।

38 वर्षीय निशानेबाज बेहद गंभीर और सीखने के लिए हमेशा लालायित रहने वाले पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन 1996 में नई दिल्ली स्थित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में बिंद्रा के साथ प्रशिक्षण लेने वाले शिमोन शरीफ ने उनका हल्का और विनोदपूर्ण पक्ष भी देखा है।

10 मीटर रनिंग टार्गेट निशानेबाजी में अंतर्राष्ट्रीय ग्रेड बनाने वाले पहले भारतीय शरीफ ने खुलासा किया कि शुरुआत में उन्होंने बिंद्रा को एक ऐसे बच्चे के रूप में देखा जो सिर्फ एक खेल की विशिष्टता के रूप में निशानेबाजी करना चाहता था, लेकिन जल्द ही उनके विचार बदल गए और बिंद्रा ने पूरी तरह से निशानेबाजी पर ध्यान केंद्रित कर दिया।

बीजिंग 2008 में 10 मीटर एयर राइफल स्वर्ण जीतने के बाद अभिनव बिंद्रा ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने याद करते हुए कहा कि बिंद्रा ऐसे इंसान थे अपने शुरुआती वर्षों के दौरान दूसरों के साथ सामाजिक रूप से अधिक जुड़ने में समय बर्बाद नहीं करते थे। हालांकि, शरीफ ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बिंद्रा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर लाएंगे।

हालांकि, देहरादून में जन्मे निशानेबाज 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता जीतते हुए आगे बढ़ गए।

शरफी ने ओलंपिक चैनल को बताया, "बिंद्रा के प्रति मेरी पहली धारणा एक अमीर बच्चे की थी जो सिर्फ शौकिया तौर पर बंदूक चलाना चाहता था। वह रेंज के अन्य निशानेबाजों के साथ कम बोलता था और इसलिए मैंने शुरू में सोचा कि वह घमंडी है, लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि वह बहुत ही मिलनसार है और एक अच्छे दोस्त भी है।"

शरीफ ने कहा, "हां, वह हमेशा एक शूटर के रूप में काम करने वाला और बहुत मेहनती थे। किसी भी प्रशिक्षण सत्र या प्रतियोगिता के बाद अभिनव जल्दी से वहां से चले जाते थे और उन्हें कभी भी दूसरों के साथ सामाजिक होने में समय बर्बाद करना पसंद नहीं था। वह आते, शूटिंग करते और फिर चले जाते थे।"

शरीफ ने कहा, "अभिनव के साथ मेरी पहली प्रतियोगिता 1997 में दिल्ली में हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप थी। अभिनव ने गोल्ड जीतने के लिए 568 और मैंने 4 पॉइंट कम शूट किए। यह नेशनल में उनका पहला मेडल था।"

उन्होंने कहा, "बाद में उन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कोचों के साथ विदेश में प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने कुछ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को छोड़ दिया और पंजाब के फिल्लौर में 2000 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए वापस आ गए, जहां उन्हें वरिष्ठ राष्ट्रीय चैंपियन के रूप में ताज पहनाया गया।"

शरीफ ने कहा, "शूटिंग में बिंद्रा ने जिस तरह से चैंपियन वाली बॉडी लैंग्वेज को प्रदर्शित किया, उससे नवोदित निशानेबाजों को अच्छा सबक लेना चाहिए। बिंद्रा ने अपने करियर में ओलंपिक के महान प्रदर्शन के अलावा 2006 में विश्व चैम्पियनशिप स्वर्ण सहित कुल 150 से अधिक पदक हासिल किए हैं। उनकी सफलता उनके दृढ़ संकल्प और मजबूत मानसिकता का परिणाम है।"

उन्होंने कहा, "वह खेल में इसे बड़ा बनाने के लिए बहुत दृढ़ थे। एक बार जब उन्होंने विदेश में प्रशिक्षण शुरू किया और 90 के दशक के उत्तरार्ध में तेजी से प्रगति की, तो मुझे पता था कि वह और आगे जाएंगे, लेकिन किसने सोचा था कि वह आगे चलकर देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतकर लाएंगे।"