इन पांच प्रमुख भारतीय एथलीटों को अभी करना है टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई! 

किसी के लिए चुनौती तो किसी के लिए आसान होगा टोक्यो में क्वालीफाई करना

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

हर चार साल में होने वाले ओलंपिक के पिछले तीन संस्करणों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एथलीटों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है।

2008 के बीजिंग ओलंपिक में 12 खेलों में कुल 57 एथलीट भारतीय दल का हिस्सा थे और चार साल बाद लंदन में यह संख्या बढ़कर 83 हो गई। 13 स्पर्धाओं में 60 पुरुष और 23 महिलाएं शामिल थीं।

2016 के रियो ओलंपिक में भारत ने अपना सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजा। इसमें 15 स्पर्धाओं में 117 एथलीट शामिल थे, जिसमें 63 पुरुष और 54 महिलाएं शामिल थीं।

इन सभी बातों से संकेत मिलता है कि भारत अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में इस क्रम को जारी रखेगा। भारत पहले ही टोक्यो ओलंपिक के लिए 70 से अधिक स्थानों पर अपनी जगह बना चुका है।

फर्राटा दौड़ लगाती दुति चंद

कोरोना महामारी ने मार्च 2020 तक क्वालिफिकेशन प्रतियोगिता को बाधित कर दिया था, इतना ही नहीं ओलंपिक के आयोजन को एक साल के लिए आगे खिसका दिया। जैसे धीरे-धीरे दुनियाभर में जीवन पटरी पर लौट रहा है ठीक वैसे ही अब खेलों ने भी वापसी कर ली है और ओलंपिक में एथलीटों के क्वालिफाई करने के लिए आयोजन 23 जुलाई, 2021 से फिर शुरू करना निर्धारित किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने अपनी योग्यता अवधि की समय सीमा को संशोधित करते हुए 29 जून 2021 तक कर दिया है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय महासंघ इस तिथि से पहले भी अपनी समय सीमा निर्धारित कर सकेंगे।

कई बड़े भारतीय एथलीटों ने अभी तक ओलंपिक के लिए योग्यता हासिल नहीं की है। आइए उन पांच शीर्ष भारतीय एथलीटों पर नजर डालते हैं जिन्होंने अभी तक अपनी जगह पक्की नहीं की है। 

दुती चंद

स्टार भारतीय धावक (स्प्रिंटर) दुती चंद के पास टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने की एक मुश्किल चुनौती है। 36 साल बाद रियो ओलंपिक (2016) में 100 मीटर स्पर्धा के लिए क्वालिफाई करने वाली वह भारत की पहली महिला एथलीट थीं। उन्होंने चार साल पहले के ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए 11:32 सेकंड के रिकॉर्ड को तोड़ा।

इस समय सबसे तेज़ भारतीय महिला धावक के पास योग्यता हासिल करना काफी मुश्किल है क्योंकि टोक्यो के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए उन्हें 11:15 सेकंड के समय में दौड पूरी करनी होगी। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 11:22 सेकंड (राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी) है, जो उन्होंने पिछले साल नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बनाया था। 

चंद ने 2020 में सकारात्मक शुरुआत करते हुए एक नया राष्ट्रीय विश्वविद्यालय रिकॉर्ड बनाया। कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी का प्रतिनिधित्व करने वाली ओडिशा स्टार ने 11:49 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। हालांकि यह ओलंपिक क्वालीफाइंग मानक से नीचे है।

वह महिलाओं की 4x100 मीटर रिले टीम के माध्यम से टोक्यो में योग्यता प्राप्त करने का भी प्रयास करेंगी। अप्रैल और मई, 2021 में कुछेक क्वालिफिकेशन आयोजन होंगे।

हिमा दास

2018 में IAAF वर्ल्ड U20 चैंपियनशिप में ट्रैक इवेंट (400 मीटर) में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट हिमा दास का ओलंपिक खेलों में पहली उपस्थिति बनाना अभी बाकी है। हालांकि वह टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। 

दास ने 400 मीटर (50:79 सेकंड) में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। ढींग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर दास को पीठ की चोट के कारण 400 मीटर की बजाय 200 मीटर स्पर्धा में जाना प।

उन्होंने 2018 एशियाई खेलों की 400 मीटर स्पर्धा में रजत पदक पर कब्जा जमाया तो वहीं महिलाओं की 4x400 मीटर और मिश्रित 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहीं।

महामारी के कारण ओलंपिक के लिए योग्यता आयोजनों को विश्व एथलेटिक्स ने 30 नवंबर तक रोका हुआ था। अब धीरे—धीरे सब पटरी पर लौट रहा है तो इसके बाद अब भारतीय दल भी टोक्यो में अपनी जगह पक्की करने के लिए तैयारी कर रहा है। 

साइना नेहवाल और पीवी सिंधु

भारतीय बैटमिंटन खिलाडी साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने पहले भी भारत के लिए ओलंपिक पदक जीते हैं और टोक्यो में एक बार फिर उनसे ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद है।

साइना ने 2012 के लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था तो वहीं सिंधु ने 2016 में बेहतर प्रदर्शन करते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया था।

कोरोना महामारी के कारण इस साल कई बैडमिंटन स्पर्धाओं को या तो रद्द करना पडा या स्थगित करना पडा। इसी ने भारतीय बैडमिंटन खिलाडियों के लिए टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का इंतजार और बढ़ा दिया। बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन रैंकिंग सूची के आधार पर 29 अप्रैल, 2021 तक स्थान आवंटित करेगी।

‘रेस टू टोक्यो’ रैंकिंग में शीर्ष-16 एकल खिलाड़ी और शीर्ष-8 डबल जोड़े अपने आप टोक्यो ओलंपिक के लिए जाएंगे।

सिंधु, वर्तमान में वर्ल्ड रैंकिंग में सातवें स्थान पर है। ऐसे में वो आसानी से ओलंपिक के लिए योग्यता हासिल कर लेंगी। साइना (20वें) को 2021 में होने वाली योग्यता प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत पडेगी।

नेहवाल को कई बार लगी चोटों ने आगे बढाने के रूप में काम किया। नेहवाल BWF एशियन टूर पर अपना लक्ष्य साध रही हैं, जो उनके टोक्यो में जगह बनाने में मदद करेगा। यह आयोजन कोरोना के कारण जनवरी 2021 तक स्थगित कर दिया गया था अब यह फिर से होने जा रहा है।

साक्षी मलिक

2016 ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक (58 किग्रा वर्ग) बड़े नामों में से एक है। इन्हें भी अभी टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना बाकी है। मलिक ने 2020 की एक खराब शुरुआत की, क्योंकि इस साल के शुरू में लखनऊ में कुश्ती के दौरान उन्हें करारी हार मिली थी।

उनकी टोक्यो ओलंपिक के लिए योग्यता हासिल करने की उम्मीद कुश्ती महासंघ (WFI) के साथ फिर से शुरू हुई है, जो अगले साल की शुरुआत में एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली टीम का चयन करने के लिए नए सिरे से ट्रॉयल करेगा।

इसके मायने है कि टोक्यो ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए पर मलिक को एक और मौका मिलेगा।

पूजा ढांडा

2018 विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में कांस्य पदक विजेता (57 किग्रा वर्ग) पूजा ढांडा टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वालों की सूची में एक और बड़ा नाम अभी तक गायब है।

इस साल की शुरुआत में कुश्ती के मुक़ाबले में हारने के बाद ढांडा की टोक्यो के लिए क्वालीफाई करने की उम्मीदें धराशायी हो गईं थी। उनके लिए भी आगे का रास्ता साक्षी मलिक जैसा ही होगा, क्योंकि यह जोड़ी एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारतीय टीम में जगह बनाएगी।

एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर मार्च 2021 में आयोजित होगा।