"कैसे लड़ना भूल गई": विश्व कप में स्वर्ण पदक जीत कर सिमरनजीत कौर ने लाॅकडाउन के तनाव को किया दफन  

भारत 9 पदक जीतकर पदक तालिका में रहा दूसरे स्थान पर

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारत की उदयमान मुक्केबाज सिमरनजीत कौर ने पिछले सप्ताह जर्मनी में कोलोन बॉक्सिंग विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर कोरोनो महामारी के तनावभरे साल को दफन कर दिया है।

कौर (60 किग्रा) ने अंतिम मुकाबले में स्थानीय लोगों की चहेती मुक्केबाज माया क्लेनहंस को मात दी। विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता कौर ने कुछ तीव्र प्रहार करके विभाजित फैसले से जर्मनी की मुक्केबाज को हराया।

25 वर्षीय कौर के लिए पूरा साल कोविड-19 महामारी के कारण खेल कैलेंडर और सामान्य जीवन को प्रभावित करने वाला रहा। मुक्केबाज ने यह भी उल्लेख किया कि लॉकडाउन एक मुश्किल वक्त था जिसमें वह यह भी भूल गई थी कि कैसे लड़ना है।

कौर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, "लॉकडाउन के हालातों ने मानसिक स्थिति को भी प्रभावित किया। ऐसा लगा कि अब कुछ बचा ही नहीं है जैसे में लड़ना ही भूल गई थी।"

कौर ने उल्लेख किया कि शानदार प्रदर्शन के साथ शीर्ष पर रहते हुए साल का अंत हो रहा है। साल के अंत में स्वर्ण पदक हासिल करना बहुत अच्छा लग रहा था।

भारत ने बाॅक्सिंग वर्ल्ड कप में कुल नौ पदक जीते। भारत तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक हासिल कर पदक तालिका में दूसरे स्थान पर रहा।

बॉक्सिंग मुकाबला लड़ती सिमरनजीत कौर

बाॅक्सिंग वर्ल्ड कप ने मुक्केबाजों को खुद को साबित करने का एक महत्वपूर्ण मौका दिया। इस विख्यात आयोजन में जर्मनी, बेल्जियम के साथ क्रोएशिया, डेनमार्क और फ्रांस के शीर्ष मुक्केबाज भी शामिल हुए।  

सिमरनजीत कौर नौ पुरुष और पांच महिलाओं के भारतीय मुक्केबाजी दल का हिस्सा थीं जो अगले साल अक्टूबर से टोक्यो विश्व कप की तैयारियों के लिए कोलोन विश्व कप तक यूरोप में प्रशिक्षण के लिए गई थीं।

उन्होंने मार्च 2020 में अम्मान में एशियाई मुक्केबाजी ओलंपिक क्वालीफायर में अपनी श्रेणी में रजत पदक हासिल करने के बाद टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया।

कौर को लगता है कि उनका लम्बा और थका देने वाले टूर का उन्हें कोलोन में बेहतर प्रदर्शन के रूप में प्रतिफल मिला। खुद को फिट रखने के लिए यह दौरा भी जरूरी था। क्योंकि महामारी के कारण बॉक्सिंग कैलेंडर पूरी तरह से स्थगित हो गया था। 

उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "यह करीब दो महिने तक चला लम्बा टूर था। हम इटली और फ्रांस सहित विभिन्न देशों से आये प्रतिभागियों के साथ घूमने भी गए। फिर जर्मनी में लंबे समय के बाद हमें एक प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला।"

कौर रैंक में सुधार करते हुए आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में एक कांस्य पदक (2018) और एशियाई चैंपियनशिप में एक रजत पदक (2019) अपने नाम किया है।