जानिए कौन है ओलंपिक एथलीट नोह निर्मल टॉम, जिन्हें चेल्सी FC पेज पर मिली है खास जगह

दोहा में धावकों के कारनामों को चेल्सी FC द्वारा प्रदर्शित किया गया

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

नोह निर्मल टॉम 400 मीटर और 4 x 400 मीटर रिले श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करने वाले भारत के शीर्ष एथलीटों में से एक हैं। उन्होंने दोहा में 2019 में आयोजित विश्व चैम्पियनशिप में पुरुषों की 4x400 मीटर रिले टीम में अमोज जैकब, मुहम्मद अनस और के सुरेश जीवन के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया।

लेकिन ये मिश्रित रिले श्रेणी थी जिसने उन्हें ओलंपिक में जगह दिलाई। मोहम्मद अनस, विस्मया, कृष्णा मैथ्यू और नोह निर्मल की भारतीय मिश्रित रिले टीम ने फाइनल में पहुंचने के लिए सेमीफाइनल में पोलैंड और ब्राजील के साथ तीसरे स्पॉट के दूसरी हीट में 3 मिनट 16.14 सेकंड का समय लिया। भारत का यह अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ 3 मिनट 16.47 सेकंड से भी बेहतर प्रदर्शन था।

चेल्सी के प्रशंसक के लिए सादगीपूर्ण शुरुआत

नोह निर्मल टॉम कालीकट, केरल के रहने वाले हैं। यहां स्कूल में उनके कोच जोस सेबेस्टियन थे, जिन्होंने टॉम के बचपन में ही उसके कौशल को पहचान लिया और एथलेटिक्स में अपना करियर बनाने की सलाह दी। वह छोटी उम्र से ही प्रीमियर लीग के संगठन चेल्सी का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा है। हाल ही में एक चैट शो में बॉलीवुड स्टार अर्जुन कपूर के साथ उन्हें चेल्सी के पेज पर छापा गया।

उस चैट शो में नोहा ने खुलासा किया कि छोटी उम्र से ही उसमें खेलों को लेकर दीवानगी थी। इसिलए वह कक्षा से ज्यादा समय खेल के मैदान में गुजारता था।

नोह निर्मल टॉम और अर्जुन कपूर

उन्होंने कहा कि "स्कूल के दिनों में मुझे कक्षा में बैठने की बजाय खेल के मैदान में ज्यादा खुशी मिलता थी। मैं उस समय एथलेटिक्स की बजाय फुटबॉल खेलता था। छठी क्लास में मैंने एथलेटिक्स में करियर शुरू किया।"

चेल्सी के पूर्व स्ट्राइकर डिडिएर ड्रोग्बा उनके आदर्श और 2012 में UEFA चैंपियंस लीग के सेमीफाइनल में बार्सिलोना पर उसकी जीत पसंदीदा चेल्सी की याद है।पेशेवर एथलेटिक्स बनने और सर्वश्रेष्ठ सीखने के लिए टॉम ने 2010 में कोझिकोड के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के हॉस्टल में प्रवेश लिया।

SAI में उन्हें कोच जॉर्ज पी जोसेफ ने बताया कि उनके लिए 400 मीटर की श्रेणी में दौड़ लगाना सबसे बेहतर होगा। इसे वो अपने करियर का अहम मोड़ मानते हैं। चार साल बाद वो भारतीय वायु सेना (IAF) में शामिल हो गए। एयरफोर्स के कोच राजमोहन एमके के निर्देशन में उन्होंने एक पेशेवर 400 मीटर स्प्रिंट में खुद को तैयार किया और घरेलू सर्किट में नाम कमाया। उन्होंने अक्टूबर 2018 में एक प्रतियोगिता 45:96 सेकंड में जीत कर भारतीय शिविर में प्रवेश पा लिया।

प्रशिक्षण और दौड़ने की शैली

नोह ने पटियाला में सैकड़ों अन्य राष्ट्रीय एथलीटों के साथ प्रशिक्षण लिया। वह रिले दौड़ में चौथे धावक हैं जो 'अंतिम समय में उन्हें पकड़ो' की धारणा में विश्वास करते हैं। भारत के ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में सहायक होने के कारण दोहा में उन्होंने यह बात कही।

उन्होंने कहा, "जब मुझे बैटन सौंपा गया, तब भारत पांचवें स्थान पर था। अंतिम 10 मीटर में हम तीसरे स्थान पर थे और हम क्वालिफाइड हो गए। यह फुटबॉल मैच के अंतिम मिनट की तरह था। यह गर्व का क्षण था। जब भारतीय जर्सी को अपने हाथों में लेने का वक्त आया।"परिणाम देखकर हम बहुत खुश हुए। यही नहीं हम गर्वित और आभारी भी थे। हमारे लिए टोक्यो में जगह पक्की हो गई। दोहा में विश्व चैम्पियनशिप एक बड़ा मंच था। हमारे अंदर उत्साह और घबराहट के मिलेजुले भाव थे, लेकिन भारत को आगे ले जाने और गौरवान्वित करने का फैसला किया।"प्रेरणा स्त्रोत

नोह के जीवन में कोई प्रेरणास्रोत नहीं है लेकिन वह अपने साथी और नायक मोहम्मद अनस से जरूर प्रेरित होता है। एथलीट ने फिस्टोसपोर्ट से कहा "मैं हमेशा उनके जैसी ही चुनौतियों का अनुभव करता हूं। यह मुझे अच्छा लगता है क्योंकि मैं सोचता हूं कि अगर वो कर सकते हैं तो मैं भी कर सकता हूं।"

उपलब्धियां

ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के अलावा नोहा ने 2018 नेशनल चैंपियनशिप में 4 x 400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीता। लेकिन नेशनल चैंपियनशिप 2019 में 400 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण पदक ने उनके मुकुट में हीरा जड़ दिया।

उन्होंने क्वार्टर मिलर की याद करते हुए कहा "हमें विश्व चैम्पियनशिप के तुरंत बाद राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए कहा गया था। इसलिए हम सीधे दोहा से रांची, झारखंड पहुंच गए। मैं अपनी फिटनेस को लेकर अनिश्चित था और मैं 400 मीटर में डिफेंडिंग चैंपियन था। मुझे उम्मीद नहीं थी। मैं चैंपियनशिप पर जीत के लिए भगवान का शुक्रगुजार हूं।“

भविष्य के लक्ष्य और टोक्यो ओलंपिक

नोह ने रिले में उत्कृष्टता हासिल की और अब वह टोक्यो में सर्वश्रेष्ठ स्थिति में पहुंचने पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। महामारी के दौरान वह अपने फिजियो और कोच की निगरानी में दैनिक फिटनेस दिनचर्या का पालन कर रहा है क्योंकि वह दुनिया की कुछ शीर्ष प्रतियोगिताओं में जाने से पहले कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है।

नोह ने अपने भविष्य के प्रशिक्षण सत्रों के बारे में कहा "2021 के ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए, मैं वर्तमान में केवल रिले पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं। खुद को फिट बनाना और रिले में अपना सर्वश्रेष्ठ देना इस समय मेरी सबसे अहम प्राथमिकता है। मुझे रिले के लिए 400 मीटर के अपने व्यक्तिगत समय में सुधार करने की जरूरत है

ओलंपिक में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए वह एकाग्रता के साथ प्रशिक्षण ले रहा है लेकिन उसका मानना है कि 2022 उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि एशियाई खेल (हांग्जो) और राष्ट्रमंडल खेल (बर्मिंघम) होने वाले हैं। उनका लक्ष्य इन टूर्नामेंटों में अपनी व्यक्तिगत साख में सुधार करना है और इसलिए वह एकल दौड़ प्रतियोगिताओं पर भी ध्यान दे रहे हैं।

"मैं एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उत्सुक हूं और मैं व्यक्तिगत कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं।"

भारत की ओर से दोहा में उन्होंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। अब यह देखा बाकी है कि नोह और उनके साथी ओलंपिक में अपना प्रदर्शन किस ऊंचाई पर ले जाते हैं।