देश में मजबूत होगा स्क्वैश का बुनियादी ढांचा, मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में बनेंगे छह कोर्ट

भारत सरकार ने दी मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में छह स्क्वैश कोर्ट के निर्माण को मंजूरी 

लेखक भारत शर्मा ·

भारत सरकार ने देश में स्क्वैश खेल को लोकप्रिय बनाने के लिए दिल्ली के मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में छह नए कोर्ट के निर्माण को मंजूरी दे दी है। 1951 में पहले एशियाई खेलों की मेजबानी करने वाले इस स्टेडियम को हॉकी के लिए अपनी सुविधा के लिए जाना जाता है। अब इसमें स्क्वैश कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा।

स्टेडियम में बनाए जाने वाले इन छह नए कोर्ट की आधारशिला केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने रखी थी, जो खुद एक बेहतरीन स्क्वैश खिलाड़ी रहे हैं। बुधवार को आयोजित हुए इस आधारशिला समारोह में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद थे।

स्टेडियम में बनाए जाने वाले इन छह नए कोर्ट के निर्माण पर करीब 5.52 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इस परियोजना के छह महीने में पूरा होने की उम्मीद है। छह में से तीन कोर्टों में चलित दीवारें होंगी और इसका इस्तेमाल युगल कोर्ट के रूप में भी किया जा सकता है।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर

डॉ जयशंकर ने कहा कि स्क्वैश के खेल को लोकप्रिय बनाने की दिशा में उनके प्रयास की ओर यह पहला कदम है। उन्होंने समारोह में कहा, "हमें खेल को अन्य लोगों तक पहुंचाना होगा, इस खेल पर किसी एक का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए। हमारे द्वारा बेहतरीन प्रदर्शन किए जाने वाले अधिकांश खेल लोकप्रिय हैं और मुझे उम्मीद है कि स्क्वैश के मामले में यह उस दिशा में एक कदम है।"

खेल मंत्री रिजिजू ने कहा, "राष्ट्रीय स्टेडियम में खेल के लिए कोर्ट बनाने का अपना अलग महत्व है। यह सुविधा न केवल विश्व स्तर पर बल्कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनने जा रही है जहां हम विश्व चैंपियन बनेंगे। मुझे यकीन है कि नवोदित खिलाड़ी इस केंद्र का अधिकतम लाभ उठाएंगे।"

स्क्वैश, हालांकि एक ओलंपिक खेल नहीं है, यह राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में भारत की सबसे सफल इवेंटों में से एक रही है। भारत ने एशियाई खेलों में स्क्वैश में एक स्वर्ण, तीन सिल्वर और नौ कांस्य पदक जीते हैं। इसमें सौरव घोषाल, दीपिका पल्लीक्कल और जोशना चिनप्पा ने देश के लिए जीत हासिल की है। भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्क्वैश में एक स्वर्ण और एक रजत जीता है।