भविष्य में मुझे भारत के लिए आकाशदीप सिंह के साथ खेलने की उम्मीद- सुदीप चिरमको

जूनियर टीम के फॉरवर्ड को बड़े टूर्नामेंट में भारत की सीनियर टीम का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारत के जूनियर पुरुष हॉकी टीम के फॉरवर्ड सुदीप चिरमको में निश्चित रूप से भविष्य में आगे तक पहुंचने की प्रतिभा है। जूनियर सर्किट में उल्लेखनीय प्रदर्शन की बदौलत उनसे जल्द से जल्द सीनियर टीम में पहुंचने की अपेक्षा की जा रही है।  

चिरमको ने 2018 की स्पेन में आयोजित 8-नेशंस इंविटेशनल टूर्नामेंट में भारत की जूनियर टीम में पर्दापण किया। 2018 में अर्जेंटीना में आयोजित तीसरे युवा ओलंपिक खेलों में भारत के रजत पदक जीतने में भी उनकी अहम भूमिका रही थी।

लेकिन अब वो एक कदम आगे बढाते हुए सीनियर टीम में अपनी जगह बनाना चाहते हैं। ताकि अपने आदर्श मौजूदा भारतीय स्ट्राइकर और 2018 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट आकाशदीप सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेल सकें।

मैच के दौरान बॉल के पीछे दौड़ लगाते सुदीप चिरमको

ओडिशा में सुंदरगढ़ जिले के रहने वाले चिरमको ने कहा, “मैं जिस क्षेत्र में खेलता हूं वह आकाशदीप सिंह की सीनियर टीम के लिए खेलने जैसा ही है। वो हमेशा गेंद को तेजी से मारते हैं। उनकी स्थिति और ऑफ-द-बॉल रन हमेशा टीम के लिए उपयोगी होते हैं। इसलिए मैं हमेशा उनके खेल को गौर से देखता हूं। उम्मीद करता हूं कि एक दिन मैं भी भारतीय टीम में उनके साथ खेलने में सक्षम बन सकूं।”

चिरमको ने पहले से ही सफलता के साथ अपनी प्रतिष्ठा बनाई है और तीसरे युवा ओलंपिक खेलों में 11 गोल के साथ शीर्ष स्कोरर होने का गौरव भी हासिल किया। वह ग्राहम रीड के निर्देशन में प्रशिक्षण लेकर माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

चिरमको ने कहा कि “यह मेरे जीवन और करियर में एक शानदार स्थिति है। मुझे जूनियर टीम में उच्चतम स्थान पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान मिला है। मैं कडी मेहनत करना चाहता हूं ताकि एक सीनियर टीम के लिए खेल सकूं।”

उन्होंने आगे कहा कि “देश के लिए कई सालों तक खेलने का मेरा एक सपना है जिसे में अपने माता-पिता के लिए पूरा करना चाहता हूं। मेरा क्षेत्र अपनी हॉकी के लिए जाना जाता है और यहां के कई खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है। मैं भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए अपना कत्तर्व्य निभाना चाहता हूं।” 

लेकिन 18 वर्षीय यह खिलाड़ी सामने आने वाली चुनौतियों से अच्छी तरह से वाकिफ हैं क्योंकि जूनियर टीम में खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। उन्हें लगता है कि सीनियर टीम में पहुंचने से पहले उन्हें अपने खेल में सुधार करने की जरूरत है। 

उन्होंने कहा कि “इस समय हॉकी में जूनियर स्तर पर पहुंचने के लिए भी बहुत प्रतिस्पर्धा है। हमें देशभर में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिले हैं। मैं इन सभी से बहुत कुछ सीखकर खुद को बेहतर बनाना चाहता हूं।”

चिरमाको कहते हैं कि "मुझे लगता है कि यदि आप भारतीय टीम के लिए फॉरवर्ड खिलाड़ी बनना चाहते हैं तो आपको अपने खेल में सब कुछ करने की जरूरत है। यह बड़ी चुनौती है लेकिन मैं जिस भी टीम में खेलने के लिए चुना गया हूं उसके लिए हर दिन बेहतर बनाकर अपनी स्थिति हासिल करने के लिए सब कुछ करने को तैयार हूं।"