भारत की लंबी कूद स्टार अंजू बॉबी जॉर्ज अपने फाउंडेशन को लेकर बना रही बड़ी योजनाएं

'ब्रांड अंजू' को बढावा देने के लिए स्वर्ण पदक विजेता ने सरकारी नौकरी से भी ली थी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

अंजू बॉबी जॉर्ज किसी परिचय की मौहताज नहीं है। इस चैंपियन एथलीट का शानदार करियर जितना प्रेरणादायक है उतना ही चमकदार भी है। उन्होंने भारत को कई बार गौरवान्वित किया है।

2005 के विश्व एथलेटिक्स की लम्बी कूद प्रतिस्पर्धा के फाइनल में स्वर्ण पदक (उन्होंने रजत पदक जीता था लेकिन बाद में विजेता के अयोग्य घोषित होने के बाद उन्हें स्वर्ण दिया गया था) जीतने वाली अंजू एथलेटिक्स में भारत की एकमात्र विश्व चैंपियन हैं।

अब वो देश के एथलीटों को खेल के शिखर तक पहुंचने और विकसित करने में मदद करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने बेंगलुरु के केंगेरी में अंजू बॉबी स्पोर्ट्स फाउंडेशन की स्थापना की है। उन्होंने इसमें सुविधाएं विकसित करने के लिए बड़ी योजना तैयार की है।

बॉबी ने द हिन्दू को बताया, "मैंने बेंगलुरू में टाटवा स्कूल के साथ पांच साल का अनुबंध किया है। हम उनके खेलों में भी मदद करेंगे। स्कूल की ओर से वहां एक सिंथेटिक ट्रैक बनाया जा रहा है। फिर स्कूली बच्चों के लिए मिलो होम ग्राउंड कार्यक्रम होगा है।"  

"हमारी अकादमी में सिंथेटिक ट्रैक का काम पूरा होने के बाद हम अपने एथलीटों को केंगेरी में अपने केंद्र में पहुंचा देंगे। ट्रैक का काम अगले साल के बीच में खत्म हो जाना चाहिए। प्रमुख कार्य यही है अन्य व्यवस्थाएं साथ में चलती रहेंगी।"

हालांकि वह एक कोच की भूमिका अदा नहीं करेंगी, यह दायित्व उनके पति बॉबी जॉर्ज निभायेंगे जो लम्बे समय तक प्रशिक्षक रहे हैं।

लंबी कूद में ब्रांज मैडल जीतने के बाद अंजू बॉबी जॉर्ज

अंजू ने कहा, "मैं अपने एथलीटों का तकनीकी रूप से सपोर्ट कर रही हूं, लेकिन बॉबी उन्हें पूरा प्रशिक्षण दे रहे हैं। मेरी कोच की भूमिका निभाने की कोई योजना नहीं है क्योंकि यह काम बॉबी मुझसे बेहतर कर रहे हैं। इसलिए मुझे इस बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।"  

अंजू के पास पहले से ही एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी ही काफी है। इसके बजाय वह खुद की एक ब्रांड के रूप में छवि बनाना चाहती हैं ताकि इसका इस्तेमाल अपने फाउंडेशन में एथलीटों के प्रशिक्षण के लिए फंड और निवेश जुटाने में कर सके। 

उन्होंने अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी नौकरी से भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। 

"कस्टम विभाग में लम्ब समय से कोई पदोन्नति नहीं हो रही थी। 1998 में ज्वाइन करने के बाद से 2009 में मुझे अधीक्षक के रूप में पहली पदोन्नति मिली। इसके बाद कोई पदोन्नति नहीं मिली।"

उन्होंने कहा, "अब मैं नौकरी से मुक्त हूं। इसलिए अपने ब्रांड का सपोर्ट कर सकती हूं, विज्ञापन कर सकती हूं। पहले सरकारी कर्मचारी होने के कारण मैं सीधे तौर अन्य स्रोतों से कमाई नहीं कर सकती थी। अब मैं 'ब्रांड अंजू' के बारे में बहुत कुछ पता लगा सकती हूं। मेरा ब्रांड मेरे सक्रिय करियर के साथ खत्म नहीं हुआ है। मैं अकादमी के एथलीटों के माध्यम से अपनी विरासत को आगे तक जारी रख सकती हूं।" 

2003 में पेरिस में आयोजित विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य जीतने वाली ओलंपियन ने केवल एक किडनी के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करके अपने दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है।

अगर वह कुछ करना चाहती हैं तो यह बात निश्चित है कि अंजू अपने फाउंडेशन को उत्कृष्टता के केंद्र में बदलने के लिए सब कुछ कर देंगी।