भारतीय जिम्नास्ट की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए दीपा करमाकर ने दिखाया एक नया रास्ता  

रियो ओलंपिक में चौथा स्थान हासिल करने वाली करमाकर ने युवाओं को प्रेरित करने और देश में बुनियादी ढांचे के विकास में लंबा रास्ता तय किया  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) ने भारत में जिम्नास्टिक का स्वरूप बदल दिया। वह ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट और 52 साल बाद ऐसा करने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट थीं। वह रियो ओलंपिक के वॉल्ट इवेंट में अमेरिका की सिमोन बाइल्स (स्वर्ण), रूस की मारिया पासेका (रजत) और स्विट्जरलैंड की गिउलिया स्टिंग्रबर (कांस्य) से पीछे रह गईं और चौथा स्थान हासिल किया। उन्होंने न केवल युवाओं को इस स्पर्धा को चुनने के लिए प्रेरित किया, बल्कि देश में इसके लिए बुनियादी ढांचे में सुधार का मार्ग प्रशस्त किया।

करमाकर राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं। उनका मानना ​​है कि आने वाले समय में कई लोग इस खेल को अपनाएंगे। अगर वे एक समय में एक ही मानसिकता बनाए रखते हैं, तो वे इसे आगे बढ़ाने में भी सहयोग करेंगे।

दीपा करमाकर ओलंपिक चैनल को बताया, "मुझे लगता है कि 52 साल के अंतराल के बाद ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने और जिम्नास्टिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद, मैं कई युवा लड़कियों और लड़कों को प्रेरित करने में समर्थ थी।"

उन्होंने आगे कहा, "मैंने देखा की बहुत सारे निजी कोचिंग सेंटर खोले जा रहे थे, माता-पिता ने भी अपने बच्चों को जिम्नास्टिक में भेजने के लिए दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया।"

एक टूर्नामेंट के दौरान दीपा करमाकर

उन्होंने कहा, "मुझे इस बात की बहुत खुशी हुई कि मेरी उपलब्धि खेल के प्रति लोगों की मानसिकता पर प्रभाव डाल रही है। सरकार ने भी ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं का आयोजन और बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाने में पहल करना शुरू कर दिया। मेरा मानना ​​है कि अगर हम इसी मानसिकता के साथ आगे बढ़ते रहे और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लगातार प्रदर्शन करना शुरू कर दिया, तो निश्चित रूप से बहुत से लोग इससे जुड़ेंगे।"

अगरतला की जिम्नास्ट बहुत मुश्किल प्रोडुनोवा की चाल का सही तरह से रियो ओलंपिक में महिलाओं की वॉल्ट स्पर्धा में फायदा नहीं उठा सकीं। नतीजतन, वह एक ऐतिहासिक पदक से चूक गई।

27 वर्षीय ने कहा, "मैं चौथे स्थान पर रही थी और सिर्फ 0.15 अंकों से पोडियम में पहुंचने से चूक गई। यह वास्तव में मेरे लिए निराशाजनक और परेशान करने वाला था। लेकिन, इस बात की खुश थी कि मैंने सिमोन (बाइल्स), मारिया (पासेका), गूलिया (स्टिंग्रूबेर) और ओक्साना (चुसोविटिना) के खिलाफ प्रतिस्पर्धा की थी।"

उन्होंने आगे कहा, "आप नहीं जानते कि मैं उस समय बहुत खुश हुई थी जब मुझे पता चला कि मैं कड़ी प्रतिस्पर्धा में चौथे स्थान पर रही। लेकिन, जब मुझे पता चला कि मैं सिर्फ 0.15 अंक कम होने के कारण चौथे स्थान पर रह गई, तो मुझे निराशा हुई और मैं रोने लगी।"

चोटों के कारण वो पिछले तीन वर्षों से प्रतिस्पर्धा से दूर रही हैं। करमाकर ने टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल नहीं किया है, लेकिन उन्हें अगले साल होने वाले एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, "2024 ओलंपिक के लिए पहला लक्ष्य निश्चित रूप से क्वालीफाई करना होगा, लेकिन इससे पहले हमारे पास 2022 एशियाई खेलों के साथ-साथ राष्ट्रमंडल खेल भी हैं। इसलिए मैं इन आगामी प्रतियोगिताओं के आयोजन का इंतजार कर रही हूं।"