महान बैडमिंटन खिलाडी लिन डैन को मात देने के बाद भी सुभंकर डे ने क्यों नहीं मनाया जीत का जश्न  

कोलकाता से यूरोप यात्रा की शुरूआत सुभंकर डे ने अपने आदर्श लिन डैन को हराकर की  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

यह भारतीय शटलर सुभंकर डे के लिए जश्न का मौका था जब उन्होंने 2018 में सारलोरक्स ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप में दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और उनके आदर्श लिन डैन के खिलाफ ना केवल मैच खेला बल्कि उन्हें हराया भी।

27 वर्षीय सुभंकर बचपन से ही डैन के बहुत बड़े प्रशंसक रहे और उन्हें अपना आदर्श मानते आए हैं। डे द्वारा स्पोर्ट्स टाइगर के शो बिल्डिंग ब्रिज को बताये अनुसार वो उनके पोस्टर को बगल में लेकर सोते थे।

उन्होंने बताया कि "बचपन में बहन ने मेरे लिए लिन डैन का एक बड़ा पोस्टर बनाया जिसे में बगल में रखकर सोता था। मैं सोचता था कि एक दिन मैं उनके खिलाफ खेलूंगा। हालांकि उस उस समय उन्हें हराने के बारे में नहीं सोचा था। यह हमेशा मेरे लिए एक सपना ही था। मैं लिन डैन को देखना चाहता था, उनकी तरह खेलना चाहता था और कोलकाता में उनकी नकल करता था।"

महान बैडमिंटन खिलाडी लिन डैन

डे ने आगे बताया कि "मैं हर जीत के बाद शानदार जश्न मनाता हूं लेकिन लिन डैन को हराने के बाद, मैंने ऐसा नहीं किया। सभी को यह आश्चर्यजनक लगा, वो कहने लगे कि आपने लिन डैन को हराया है। कुछ तो जश्न होना चाहिए लेकिन मेरे मन में उनके लिए सम्मान है इसलिए केवल हाथ मिलाकर ही चला गया।"

2017 में नागपुर में आयोजित सीनियर बैडमिंटन नागरिकों के क्वार्टर फाइनल में बी साई प्रणीत को हराकर डे ने पेशेवर सर्किट में आगाज किया लेकिन डैन के खिलाफ जीत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात कर दिया।

वह कोलकाता में पले-बढ़े और भाई-बहनों से खेलों में जाने के लिए प्रेरित हुए लेकिन शहर में बुनियादी सुविधाओं की कमी ने उन्हें मुम्बई जाने के लिए मजबूर कर दिया। हालांकि उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत भी नहीं था।

उन्होंने याद करते हुए कहा कि "मुझे लगता है कि जब मैं मुंबई आया था उस समय भारत अच्छा प्रदर्शन करने लगा जो मेरे के लिए सही समय था। शुरू में प्रायोजक नहीं मिले लेकिन फिर भी मैं भारत छठे नंबर पर पहुंच गया और एशियाई चैम्पियनशिप अंडर-19 का हिस्सा बन गया। उस समय मुझे हिंदुस्तान पेट्रोलियम से 12000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलती थी। मेरे लिए यह उस समय बड़ी राशि थी।"

डे प्रीमियर बैडमिंटन लीग में अवध वारियर्स के लिए खेलते हैं। उन्होंने यूरोप में भी अपनी किस्मत आजमाई। यूरोप में अस्थायी प्रवास की तैयारियों के लिए उन्होंने बैंगलोर में टॉम जॉन से प्रशिक्षण लिया। डेनमार्क के ग्रीव स्ट्रैंड्स क्लब में जाने के फैसले ने उन्हें कई प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में भाग लेने का मौका दिया और उन्हें एक खिलाड़ी के रूप में विकसित में मदद मिली।

विश्व रैंकिंग में 46वां स्थान हासिल करने वाले डे ने कहा कि “मैंने पूरे यूरोप में करीब 30 क्लबों को मेल किया और उनमें से डेनमार्क से जवाब आया। हालांकि यहां से पैसा कम मिल रहा था लेकिन यह अच्छा मौका था। यहां मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा।"

डे ने कोलकाता और मुंबई में अपनी अकादमी खोली है। यहां वो अन्य प्रशिक्षुओं के साथ खुद भी पसीना बहाते हैं। वह शीर्ष-50 में पहुंए गए हैं। अब उन्होंने अगले साल के अंत तक शीर्ष -20 में पहुंचने का लक्ष्य तय किया है।