लिएंडर पेस के पिता ने उन्हें एक और साल खेलने की सलाह दी

लिएंडर पेस के पिता वीस पेस का मानना है कि उनके बेटे को टेनिस में अभी एक और साल चाहिए। वह भारत का नाम रोशन करने का माद्दा रखते हैं।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

खिलाड़ी कितना भी बड़ा हो, एक न एक दिन उसे खेल को अलविदा कहकर अपनी अगली चुनौती की तरफ जाना ही पड़ता है। भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस (Leander Paes) ने भी 2020 सीज़न को अपना आखिरी सीज़न कहा है, लेकिन उनके पिता वीस पेस का मानना है कि लिएंडर अभी भी एक और साल खेल सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस से बात करते हुए वीस पेस ने कहा, “मैं उन्हें हमेशा कहता हूं कि तुम्हें अभी एक और साल खेलना चाहिए। वे हमेशा इस बात पर हंसते हैं।" गौरतलब है कि वीस पेस भी एक पेशेवर हॉकी खिलाड़ी थे और 1972 ओलंपिक गेम्स में वे भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे। इसी साल भारतीय हॉकी ने अपना ओलंपिक ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीता था।

Leander Paes most likely exited the Davis Cup with a typically grinding win. Photo: Davis Cup 

आपको बता दें कि लिएंडर पेस 7 बार ओलंपिक गेम्स में शिरकत कर चुकें हैं, यदि वे इस बार क्वालिफाई हो जाते हैं तो 2020 ओलंपिक गेम्स उनका 8वां संस्करण होगा।

उनके पूर्व जोड़ीदार महेश भूपति ने भी कहा कि “यदि वे कुछ महीने अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो वे आगे भी खेल सकते हैं।” पिता हो या पूर्व जोड़ीदार, या फिर भारतीय जनता, सभी का मानना है कि पेस को अभी और खेलना चाहिए और हमेशा की तरह भारतीय खेल जगत को खुशियां देनी चाहिए।

‘ली-हैश’ यानि लिएंडर पेस और महेश भूपति एक समय नंबर 1 जोड़ी कही जाती थी। इस जोड़ी ने 3 ग्रैंड स्लैम हासिल किए हैं और साथ ही डेविस कप के लगातार 24 मुकाबले जीतकर टेनिस जगत में अपना नाम रोशन किया है। जंहा यह दौर 1995 से साल 2010 तक रहा।

46 वर्षीय पेस अभी भी डबल्स वर्ग में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जो कि उनकी बेहतरीन फिटनेस को दर्शाता है। हालांकि उन्हें जीत तो हासिल हुई, लेकिन वे कुछ समय से खिताबी जीत से वंचित हैं।

ऑस्ट्रेलिया ओपन (Australia Open) के दूसरे राउंड में शिकस्त का सामना कर उन्हें बाहर होना पड़ा तो दूसरी तरफ टाटा ओपन महाराष्ट्र (TATA Open Maharashtra) में क्वार्टर फाइनल दौर में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बेंगलुरु ओपन (Bengaluru Open) में पेस ने फाइनल तक का सफर ज़रूर तय किया, लेकिन वे उसे जीत न सके। इस बार लिएंडर पेस, रोहन बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाकर खेलते दिखे लेकिन उनके हाथ निराशा ही आई।

यह कहना गलत नहीं है कि लिएंडर पेस भारतीय टेनिस को एक अलग मुकाम तक ले गए हैं और इसके साथ ही वे बहुत सारे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बनें हैं।