सैंटियागो नीवा: भारतीय मुक्केबाजों की ओलंपिक तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण है यूरोपीय दौरा   

17 दिसंबर से होने वाले कोलोन विश्व कप में एक्शन में होंगी पुरुष और महिला टीम

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारतीय मुक्केबाज जर्मनी में 17 दिसम्बर से शुरू होने वाले कोलोन विश्व कप में अपना दम दिखाने के लिए तैयार हैं। भारत के उच्च प्रदर्शन निदेशक सैंटियागो नीवा टीम की ताकत और कमजोरियों का आकलन करने के लिए टूर्नामेंट का फायदा मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

कोचिंग स्टाफ के साथ नौ पुरुष और पांच महिला मुक्केबाजों का एक दल अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक की तैयारियों को लेकर अक्टूबर से ही यूरोप में डेरा डाले हुए है। 

नीवा का मनना है कि जिस तरह से चीजें बदल रही हैं। उससे यह लगता है कि यूरोप का टूर अभ्यास के लिए जरूरी था। क्योंकि कोविड-19 महामारी ने बॉक्सिंग कार्यक्रमों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी।

बॉक्सिंग मुकाबले में विरोधी को पंच जड़ते सैंटियागो नीवा

नीवा ने स्पोर्टस्टार को बताया कि, "हमारे लिए पटियाला से बाहर निकल कर कुछ अलग तरह से तैयारी करना बहुत जरूरी था। इटली में अभ्यास बहुत अच्छा हुआ। फ्रांस ओलंपिक क्वालीफायर (मार्च में) के बाद हम पहली प्रतियोगिता में गए थे। मिलान में एक और प्रतियोगिता थी। हमें ट्रैक पर वापस आने और विभिन्न शैलियों के मुक्केबाजों के साथ खुद को परखने की जरूरत थी। यह ओलंपिक तैयारी के लिए काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि भारत में हम स्पष्ट रूप से सीमित थे। मुझे लगता है कि हम अपने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में अन्य देशों से आगे हैं।”

भारतीय टीम यूरोप में 'बायो-बबल' में रही और किसी भी अवकाश गतिविधियों में शामिल नहीं हो पाई है, क्योंकि फ्रांस और इटली कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से हैं।

उन्होंने कहा कि “हम रोम या वेनिस के कुछ दर्शनीय स्थलों पर जाना चाहते हैं, लेकिन हम ओलंपिक के लिए एक मिशन पर हैं। इसलिए खुद को किसी जोखिम में नहीं डाल सकते।”

दिसंबर के पहले सप्ताह में भारत लौटने की जल्दबाजी थी, लेकिन प्रबंधन ने यात्रा फिलहाल के लिए टालने का फैसला किया, ताकि वे कैमेस्ट्री कप भी कहे जाने वाले कोलोन विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाडियों में से कुछ के खिलाफ खुद का आंकलन कर सकें। यह आयोजन 13 भार वर्गों में यूरोप और भारत के 100 मुक्केबाजों के बीच होगा।

उन्होंने बताया कि "कैमेस्ट्री कप अक्टूबर में होना था लेकिन उस समय जर्मनी में कोरोना महामारी की समस्याएं थी। इस कारण इसे स्थगित कर दिया। हमें भी इस आयोजन का आमंत्रण मिला, जिसके बारे में विचार करने पर हमने तय किया कि इसके लिए हम अपनी यात्रा को एक—दो हफ्तों के लिए आगे खिसका सकते हैं। हालांकि यह अन्य सालों की तरह इतना मुश्किल नहीं था क्योंकि पहले इसमें क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल थे लेकिन जर्मनी, फ्रांस और ग्रेट ब्रिटेन जैसे मजबूत यूरोपीय देश शामिल हैं। दुनिया में अभी कोई बहुत दमदार प्रतिस्पर्धा नहीं है।"

नीवा ने कहा कि “यह सब अनुभव हमें जनवरी और फरवरी में मदद करेंगे। अच्छी ट्रेनिंग, स्पार्रिंग और कॉम्पिटिशन होना बहुत जरूरी था। इसलिए यह विकल्प हमारे लिए बहुत अच्छा होगा।"

महिला मुक्केबाजों के लिए यह आयोजन अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि मार्च 2020 में एशियाई मुक्केबाजी क्वालीफायर के बाद से यह उनके लिए पहला प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट होगा। जबकि पुरुषों की टीम को भी पिछले अक्टूबर में फ्रांस में हुए एलेक्सिस वास्टीन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में कुछ समय ही रिंग में बिताने के लिए मिला था।

नौ भारतीय मुक्केबाज पहले ही टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। लेकिन नीवा 2021 में क्वालीफायर आयोजन पूरे होने तक इस सूची में और नाम जुडने की उम्मीद कर रहे हैं।