समय के साथ भारतीय खेलों में बढ़ेगा निशानेबाजी का भी वर्चस्व- जॉयदीप करमाकर 

भारत में राइफल शूटिंग के सबसे बड़े ऐम्बैसडरों में से एक रहे हैं जॉयदीप करमाकर 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

जॉयदीप करमाकर भारत में राइफल शूटिंग के सबसे बड़े ऐम्बैसडरों में से एक रहे हैं। पश्चिम बंगाल में जन्मे करमाकर ने शूटिंग में शानदार करियर बनाने के बाद अब कोलकाता में एक शूटिंग अकादमी शुरू की हैैं। यहां वो अगली पीढ़ी के निशानेबाजों को तैयार कर रहे हैं।

देश में यह खेल तेजी से बढ़ रहा है इसके बाद करमाकर को जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करने की जरूरत महसूस हुई। ऐसे में अब सहयोगी सरकार और प्रशासन के कारण भारत में शूटिंग का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।

करमाकर अपने शानदार करियर में कई ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने 28 विश्व कप, दो राष्ट्रमंडल खेल, एक ऐशियन गेम्स, तीन विश्व चैंपियनशिप और 2012 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

2012 लंदन ओलंपिक उनकी प्रमुख उपलब्धियों में से एक रहा है। इसमे उन्होंने कांस्य पदक विजेता स्लोवेनिया के राजमंड डेब्वेक को पुरुषों की 50 मीटर राइफल प्रोन स्पर्धा में हराकर चैथा स्थान हासिल किया। कोलकाता में जन्मे इस निशानेबाज ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ विश्व रैंकिंग चार हासिल की और 2010 से 2012 के बीच एशिया में पहले नंबर पर रहे। वह अभी भी भारत की ओर से प्रोन स्पर्धा में विश्व कप में एकमात्र रजत पदक विजेता हैं। उन्होंने 2010 में सिडनी में कुछ उपलब्धि हासिल की थी।

निशानेबाजी की तैयारी करते हुए जॉयदीप करमाकर

करमाकर का मानना ​​है कि भारत में राइफल शूटिंग में बदलाव आया है, क्योंकि बुनियादी जागरूकता, प्रशिक्षण की गुणवत्ता के साथ खेल में विशेषज्ञता भी बढ़ी है। 41 वर्षीय इस निशानेबाज ने कहा कि यह बड़ा बदलाव बेहतर प्रशिक्षण के कारण आया है। क्योंकि पूर्व निशानेबाज खुद इस खेल के विकास की मांग करते आ रहे हैं।

करमाकर ने ओलंपिक चैनल को बताया कि "निश्चित रूप से यह एक बडा परिवर्तन है! सुविधाओं के लिए बुनियादी जागरूकता, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण से लेकर खेल में विशेषज्ञता तक सब कुछ आगे बढने के लिए अहम मोड है। शूटिंग गेम अपने आप आम लोगों के बीच फैलता जा रहा है। हालांकि अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाजों के शानदार प्रदर्शन और इसकी मीडिया में चर्चा से इस खेल के प्रति जागरूकता बढने के लिहाज से बहुत अच्छा रहा है। हालही के सालों में प्रशिक्षण को लेकर गुणवत्ता में जो सुधार हुआ है वो भी उल्लेखनीय है।"

उनके अलावा दूसरे दिग्गज जैसे अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग ने भी अपनी अकादमियां शुरू की हैं, जिनका लक्ष्य प्रतिभाओं को निखारना है। उन्होंने कहा कि "पहले के सफल निशानेबाज अब इस खेल को और अधिक आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं और अब इसके परिणाम नजर आ रहे हैं। मैं भारत में पनप रहे उन छोटी अकादमियों और क्लबों (साथ ही अंशकालिक प्रशिक्षकों) का भी उल्लेख करूंगा। यह शायद एक बड़ा कारण यह है कि भारतीय शूटिंग टीम के सर्वश्रेष्ठ क्लब की श्रृंखला कभी टूटी नहीं। फेडरेशन (नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया) भी एक स्तर पर पहुंचने के बाद निशानेबाजों की देखभाल करने में अपना पूरा समय दे रहा है।"

करमाकर इसे निशानेबाजी के उज्ज्वल भविष्य के रूप में देखते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों में सैकड़ों नई अकादमियों का गठन हुआ है, जो निशानेबाजों को अपना लक्ष्य हासिल में सहयोग कर रही हैं। करमाकर का मानना ​​है कि जमीनी स्तर पर किए जा रहे बेहतरीन काम से शूटिंग गेम भारत में बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि "यह बडी बात है कि छोटे-बडे शहरों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी सैकड़ों की संख्या में नई अकादमी और क्लब खुल गए हैं। मैं उन्हें भारतीय शूटिंग की रीढ की हड्डी मानता हूं क्योंकि इनके बिना खेल की आगे बढने की श्रृंखला टूट जाएगी। मुझे लगता है कि बुनियादी शुरूआत स्थानीय क्लब और अकादमियों से ही होती है। यहां युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के सपनों को पूरे करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल जाती है।"

उन्होंने भारत के भावी सितारे मनु भाकर और सौरभ चैधरी के बारे में भी बताया। 18 वर्षीय सौरभ 2018 के ऐशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के निशानेबाज बने। वहीं मनु आईएसएसएफ विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय कहलाए।

उन्होंने कहा कि मनु (भाकर) और सौरभ (चैधरी) जैसी प्रतिभाओं ने कम सुविधाओं के साथ खेल की शुरूआत की। कम जानकार प्रशिक्षकों के साथ प्रशिक्षण लिया लेकिन इससे उन्हें कामयाब होने में और मदद मिली। वर्तमान में हमारे पास कुछ विश्व विजेता हैं, जबकि पहले छिपी प्रतिभाएं आगे ही नहीं आ पाईं, क्योंकि हो सकता है कि उनके पास शूटिंग की सुविधा नहीं थी या उनके माता-पिता ने अपने आसपास किसी अकादमी के बारे में ही नहीं सुना, या कभी शूटिंग गेम के बारे में नहीं सुना।

भारत में मौजूदा स्थिति और एनआरएआई की ओर से किए जा रहे कार्यों की बदौलत लगने लगा है कि भारतीय निशानेबाजों का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। करमाकर कहते हैं कि भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट का बोलबाला है। वहां खेल परिदृश्य में शूटिंग जल्द ही एक बड़ा हिस्सा होगा।

उन्होंने कहा कि "इस शानदार स्थिति के साथ पूरे भारत में मिश्रित संगठित और असंगठित प्रशिक्षण प्रणाली के साथ फेडरेशन देश में सर्वश्रेष्ठ संस्था में से एक है। यहां के एथलीट और कोच प्रतिभाशाली हैं। मुझे लगता है कि अब यह समय पर निर्भर है जब शूटिंग भारतीय खेलों में सबसे लोकप्रिय होगा।"

उन्होंने कहा कि जल्द ही एक एकल राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रिकॉर्ड 7000़ प्रतिभागियों के साथ एक बहुत लोकप्रिय लीग देखने को मिलेगी जिसमें यह खेल जुनूनी रूप से लोगों को रोमांचित करेगा।