"हम दिल की धड़कनों के बीच शूटिंग करते हैं"- अभिनव बिंद्रा

एकाग्रता का प्रतीक माने जाते हैं भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा

लेखक Bharat Sharma ·

निशानेबाजी एक ऐसा खेल है जिसमें दृढ एकाग्रता की जरूरत होती है। एक मिली सेकंड का सबसे छोटा अंश एक पोडियम स्थान और एक औसत दर्जे के बीच अंतर पैदा कर सकता है।

भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा को एकाग्रता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। ओलंपिक में उनकी सफलता इसी का प्रमाण है। बिंद्रा ने 15 साल की उम्र में ओलंपिक परिदृश्य में प्रवेश किया। साल 2000 में वो सिडनी में सबसे कम उम्र के भारतीय प्रतिभागी बन गए। यह उनके लिए योग्यता साबित करने का साल था। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा को 590 के स्कोर के साथ खत्म किया और क्वालिफिकेशन राउंड में 11वां स्थान हासिल किया और फाइनल में पहुंचने से एक स्थान से चूक गए।

2004 के एथेंस ओलंपिक में बिंद्रा ने मजबूती के साथ वापसी की। उन्होंने 694.6 का स्कोर अर्जित कर सातवां स्थान प्राप्त किया। वर्षों की लगन और समर्पण के बाद, बिंद्रा को आखिरकार इसका इनाम मिला। जब उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में त्रुटिरहित 700.5 पर शूटिंग कर स्वर्ण पदक हासिल किया।

रियो 2016 के 10 मीटर एयर रायफल के दौरान शूट-ऑफ के बाद बाहर हुए अभिनव बिंद्रा। 

बिंद्रा पहले ऐसे भारतीय बने जिनके स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय ध्वज फहराया गया और राष्ट्रगान गाया गया। 1980 में पुरुष हॉकी टीम द्वारा स्पेन को हराकर शीर्ष स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारत के लिए यह पहला स्वर्ण पदक भी था।यह बिंद्रा के लिए इतना आसान भी नहीं था। वो उस समय इस खेल की तरफ आकर्षित हुए थे जब वो फिटनेस की परेशानी से गुजर रहे थे और शारीरिक शिक्षा की कक्षाओं में शामिल होना पसंद नहीं करते थे। शूटिंग गेम उन्हें इसलिए भी जमा क्योंकि इसमें ज्यादा शारीरिक मेहनत की जरूरत नहीं पडती। लेकिन यह भी उसके लिए एक बडी चुनौती थी।

बिंद्रा कहते हैं कि "मानव शरीर को परिवर्तन करने के लिए बनाया गया है, लेकिन उसी स्थिति में बने रहने की कोशिश एक बाधा थी। उन्होंने बताया कि खेल के लिए पूरा वक्त दिया क्योंकि निशानेबाजों के लिए मानसिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है।"

IIT बाॅम्बे में टेकफेस्ट के दौरान हुए साक्षात्कार में बिंद्रा ने कहा कि "मानव शरीर को परिवर्तन के लिए बनाया गया है और जब आप परिवर्तन करने की कोशिश करते हैं, तो यह करना बहुत चुनौतीपूर्ण काम है। तो ऐसे में आप आंखे बंद कर एक पैर पर खडे होकर यह सोचें कि यह कितना कठिन है। जब यह हो जाता है तो आप शूटिंग के क्षेत्र में आ जाते हैं। जब आप ओलंपिक फाइनल में प्रवेश करते हैं तो एक शाॅट तय कर देता है कि आप ओलंपिक में पदक जीत रहे हैं या नहीं।

उन्होंने मानसिक फिटनेस के पहलू के बारे में बताया कि "जब आप अपनी हार्ट बीट के बीच शूटिंग करना चाहते हैं तो स्थिरता और संतुलन कितना महत्वपूर्ण होता है।"

उन्होंने कहा कि "दिल बहुत तेजी से धड़कना शुरू कर देता है और अगर आप फिट नहीं हैं तो आपका दिल बेकाबू हो जाएगा। जैसे कि हम खेल में शूटिंग करते समय हार्ट बीच के बीच शूटिंग करते हैं। इसलिए यदि आपका दिल प्रति मिनट 200 बार धड़क रहा है तो यह बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए स्थिरता और संतुलन काफी महत्वपूर्ण होता है।"