अभिनव बिंद्रा को टोक्यो ओलंपिक में भारत के 5-6 पदक जीतने की है उम्मीद  

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा को भारतीय निशानेबाजी दल पर टोक्यो में प्रभावशाली प्रदर्शन करने का है पूरा भरोसा

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारत के एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) का मानना ​​है कि देश के लिए पदक जीतने के मामले में टोक्यो ओलंपिक सबसे अच्छा मौका हो सकता है। उन्हें लगता है कि भारत के पास प्रतिभाओं का खजाना है और कई एथलीटों को वास्तविक पदक जीतने वाली संभावनाओं के रूप में गिना जा सकता है। 

बिंद्रा ने सोमवार को मर्चेंट ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से आयोजित एक वेबिनार के दौरान कहा, "भले ही COVID-19 महामारी के कारण यह समय चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन टोक्यो ओलंपिक हमारे लिये सर्वश्रेष्ठ पदक हासिल करने के साथ खत्म हो सकता है।"

"खेल कोई पटकथा नहीं है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि हम सर्वश्रेष्ठ पदक के साथ लौटेंगे। इसका मतलब है कि हम लंदन से ज्यादा 5-6 पदक के साथ स्वदेश लौटेंगे। अगर मैं गलत नहीं हूं, तो हमारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहेगा।"

बिंद्रा को भारतीय निशानेबाजों से बहुत आशाऐं हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि एथलीटों ने हाल के दिनों में सबसे बड़े स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है। अगर वे उस मौके पर भी अपने प्रदर्शन को दोहराते हैं तो वे उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं। 

उन्होंने कहा, "उनमें से प्रत्येक के पास अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता है। उन्होंने पिछले दो-तीन सालों में खुद को साबित भी किया है। न केवल शूटिंग में बल्कि अन्य खेलों में भी निश्चित रूप से पदक मिलने की पूरी उम्मीद है। कई ऐसे एथलीट हैं जिनसे सही मायने में टोक्यो में पदक जीतन की अपेक्षा रखी जा सकती है। हालांकि, बहुत कुछ उनके प्रदर्शन वाले विशेष दिन पर भी निर्भर करता है।”

अभिनव बिंद्रा को भरोसा है कि खिलाड़ी कोरोना महामारी की वजह से लगे ब्रेक के बाद अच्छे अंदाज में वापसी करेंगे  

बिंद्रा ने अपना मनपसंद प्रोजेक्ट अभिनव बिंद्रा टार्गेटिंग परफॉर्मेंस सेंटर (ABTP) लॉन्च किया है, जहां वो भावी पीढ़ी के शूटरों को तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि दो दशक पहले जब उन्होंने शूटिंग शुरू की थी तब से लेकर वर्तमान में देश के अंदर शूटिंग परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है।

"शूटिंग गेम युवाओं पर छा गया है। जब मैं इस खेल में आगे बढ़ रहा था तो मैंने पुराने और अनुभवी शूटरों के साथ प्रतिस्पर्धा की जो मुझसे उम्र दोगुने या तिगुने बडे थे। फिर भी मुझे नहीं लगता कि यह मेरी लिए कोई चुनौती थी, बल्कि इससे मुझे स्फुर्ती मिलती थी। जब भी मैं किसी परेशानी में होता हूं या मुझे कोई चुनौती मिलती है, तो मैं अपने खेल करियर को देखता हूं और खुद से ही सवाल करता हूं, कि मुझे इसका सामना कैसे करना है।

“एक एथलीट के रूप में आपको बदलती परिस्थितियों के लिए अनुकूल बनना पडेगा। ये व्यवसाय में भी बहुत उपयोगी हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात इसे स्वीकार करना है। कभी-कभी हमें यह सीखना होता है कि इसे कैसे स्वीकार करें और जल्द से जल्द आगे बढ़ें। अगर आप ऐसा कर लेते हैं तो आपका दिमाग खुल जाता है और शिकायत की बजाय समाधान खोजने लगते हैं। आपके दिमाग में सकारात्मक विचार आने लगते हैं, लेकिन यह कहना जितना आसान है करना उतना ही मुश्किल है।

दिलचस्प बात यह है कि 2008 बीजिंग में स्वर्ण पदक जीतने के तुरंत बाद वो इस खेल को अलविदा कहना चाहते थे। उन्होंने बताया कि कैसे मेडीटेशन ने उन्हें शांति और प्रेरणा वापस पाने में मदद की।

पूर्व शूटर ने कहा, “बीजिंग ओलंपिक के बाद मैं इस खेल से रिटायर होना चाहता था। इस परिस्थिति से निकलने के लिए मैं मेडिटेशन लेने के लिए 10 दिनों के लिए विपासना चला गया। जहां मैंने रोजाना 10 घंटे ध्यान क्रिया की। भले ही यह उबाऊ लगता हो लेकिन इसने खेल में मेरी वापसी कराई। इस कारण मैं अभी भी इससे लगाव रखता हूं।”