अभिनव बिंद्रा को टोक्यों ओलंपिक से है बड़ी उम्मीद, कहा- "मैं भारत का अकेला ओलंपिक पदक वितेजा नहीं रहना चाहता"  

बीजिंग गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा को निशानेबाजी और बैडमिंटन में पदक की उम्मीद 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

2008 में बीजिंग में हुई 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा भारत में अकेले खिलाड़ी हैं, लेकिन पूर्व निशानेबाज को उम्मीद है कि टोक्यो ओलंपिक में उनका पूरा दल शिखर पर होगा।

ग्लोबल स्पोर्ट्स वीक के दौरान उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं और साथ ही लगता भी है कि टोक्यो और इसके बाद आयोजित होने वाली खेल प्रतियोगिताओं में निश्चित रूप से मैं एकमात्र व्यक्तिगत ओलंपिक चैंपियन नहीं रहूंगा और भी कई सामने आएंगे।"

हालांकि, उनका मानना ​​है कि अधिक ओलंपिक पदक जीतने के लिए भारत की खेल संस्कृति को बड़े बदलाव से गुजरना होगा। 

उन्होंने कहा, "हमारी आबादी 1.3 बिलियन है, लेकिन हमें खुद से यह सवाल करना चाहिए कि 1.3 बिलियन में से कितने लोग वास्तव में खेलों में भागीदार हैं? और जब इस पर गौर किया जाएगा तो इनकी संख्या बहुत कम होगी। मुझे लगता है कि खेलों को हमारे देश में ऐतिहासिक रूप से आत्मसात नहीं किया गया है।"

उन्होंने बताया, "जब मैं युवा था उस दौरान मेरी पीढ़ी और पहले की पीढ़ियों के युवाओं ने अकादमिक गतिविधियों में मिसाल कायम की थी, जब खेल का स्तर काफी नीचे था और प्रोत्साहन भी नहीं मिल रहा था। मुझे लगता है कि ओलंपिक स्तर पर वैश्विक सफलता नहीं मिलने का हम पर बड़ा प्रभाव पड़ा है।"

रियो 2016 के 10 मीटर एयर रायफल के दौरान शूट-ऑफ के बाद बाहर हुए अभिनव बिंद्रा। 

उन्होंने कहा, "अब बहुत कुछ बदल रहा है। हमारी ज्यादातर आबादी युवा है- जिसमें 50 फीसदी आबादी 20 वर्ष से कम आयु के लोगों की है। खेल युवाओं की कल्पना पर कब्जा कर रहा है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार को सहयोग करने में और अधिक गंभीरता अपनानी होगी। क्योंकि इसमें शामिल हमारी आबादी ज्यादा है। मुझे लगता है कि हमारे इतिहास में खेल संस्कृति की कमी ने खेलों में प्रदर्शन पर बहुत प्रभाव डाला है।"

रियो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने के बाद बिंद्रा ने संन्यास लेने का फैसला किया था। वह इस बात को मानते हैं कि बीजिंग में स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए सबसे यादगार पल रहेगा।

उन्होंने कहा, "बीजिंग 2008 मेरे जीवन का मुख्य आकर्षण था, जो सबसे बेहतरीन पलों में से एक था, जिसे मैं हमेशा संजोता रहूंगा। मैं इस उपलब्धि के साथ खुश और सुकून में हूं।"

उन्हें लगता है कि शूटिंग के अलावा बैडमिंटन में भी भारत ओलंपिक और भविष्य में होने वाले दूसरे आयोजनों में उत्कृष्टता हासिल कर सकता है। 

उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से शूटिंग एक खेल है जहां मैं अपना पैसा लगाना चाहता हूं। हाल के दिनों में बहुत सारे युवाओं ने शूटिंग में भागीदारी करते हुए वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की है। बैडमिंटन में भी बहुत सारे लोगों की दिलचस्पी बढ रही है।"