अभिनव बिंद्रा चाहते हैं कि दूसरे शूटर्स को किसी तरह की चिंता न सताए

ओलंपिक चैंपियन्स अभिनव बिंद्रा और निकोलो कैंप्रियानी एक साथ मिलकर तीन रिफ़्यूजी शूटर्स को टोक्यो 2020 के लिए तैयार कर रहे हैं।

लेखक सैयद हुसैन ·

अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) जिन ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं, किसी अन्य भारतीय के लिए वह आज भी किसी सपने से कम नहीं है। लेकिन बीजिंग 2008 के स्वर्ण पदक विजेता के लिए पोडियम का सबसे शीर्ष स्थान इतने आसानी से नहीं मिला था।

बिंद्रा ने टेकिंग रिफ़्यूज: टारगेट टोक्यो 2020, जो एक ओलंपिक चैनल की ओरिजिनल सीरीज़ है उसके प्रीमियर के दौरान खुल कर बात की। ये सीरीज़ तीन रेफ़ुजी शूटर्स के ऊपर केंद्रित है जो टोक्यो 2020 में अपना स्थान पक्का करने के इरादे से तैयारी कर रहे हैं।

अभिनव बिंद्रा ने कहा, “मैंने अपने करियर में लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा की और मैं हमेशा चिंता से घिरा रहा। मेरे पास कभी कोई प्रतियोगिता नहीं थी जो आसान थी।"

अब हालांकि बिंद्रा इन तीनों रेफ़ुजी की मदद कर रहे हैं, लेकिन वह उस बात को कभी नहीं भूलते जिससे कभी वह ख़ुद परेशान रहे थे।

Taking Refuge: Target Tokyo 2020 (Trailer)

एक नई ओरिजिनल सीरीज़ का ट्रेलर देखें जिसमें 3 रिफ्यूजियों के टोक्यो 2020 के ...

उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, “इस खेल में सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी यह है कि एथलीट आम इंसान से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली हैं। लेकिन इस मामले की वास्तविकता यह है कि वे पहले इंसान हैं और बाद में एथलीट हैं। और हम दूसरों की ही तरह कमज़ोर हैं, इतना ही नहीं शायद अन्य सामान्य लोगों की तुलना में हम मानसिक तौर पर ज़्यादा कमज़ोर हैं।”

निर्भर करता है आपनी दीवानगी पर

हालांकि अभिनव बिंद्रा ने चिंताओं और मानसिक मुद्दों पर अपनी आत्मकथा, 'ए शॉट एट हिस्ट्री' में अच्छी तरह से समझाया है। पूर्व भारतीय निशानेबाज़ का मानना ​​था कि इस मुद्दे को संबोधित करने का एकमात्र तरीक़ा उचित तरीक़े से निपटना था और एक 'सक्रिय भूमिका निभाना' था न कि इसकी अनदेखी करना।

भारतीय दिग्गज शूटर ने कहा, "यह एक वास्तविकता है जिसे सभी को स्वीकार करना चाहिए, और इससे निपटने के लिए काम करना चाहिए। यह कभी आसान नहीं होने वाला है, अगर ओलंपिक फ़ाइनल में प्रतिस्पर्धा करना एक आसान सवारी या पार्क में चलना होता, तो कई और लोग महानता प्राप्त करने में सक्षम होते। लेकिन, वास्तविकता यह है कि हम इंसान हैं और हम किसी और की तरह ही कमज़ो हैं।‘’

यह स्वीकार करते हुए कि खेल की प्रशंसा मुश्किल से एक एथलीट के जीवन को परिभाषित करती है, तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निकोलो कैंप्रियानी (Niccolo Campriani) ने आशा व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ी को ऐसी चीजें मिलेंगी जिनके बारे में वे भावुक हैं और जो किसी के जीवन में असर पैदा करती है।

उन्होंने कहा "मैं सिर्फ़ इस समीकरण से सहमत नहीं हूं कि एक स्वर्ण पदक ही सबकुछ है।"

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “आप हमारे अपने खेल में सबसे सफल में से दो से बात कर रहे हैं लेकिन हमारे पास दुखी होने का अधिकार है। हमने स्वर्ण पदक जीता और हम दुनिया के सबसे ख़ुश लोग हैं। यह जो आप करते हैं उसके बारे में भावुक होने के बारे में है।"

एक एथलीट की पहचान

इटली के पूर्व शूटर को रियो 2016 में अपने तीसरे ओलंपिक स्वर्ण को हासिल करने के बाद कुछ ऐसा महसूस हुआ जिसने उन्हें प्रोजेक्ट 'मेक ए मार्क' को शुरू करने के लिए प्रेरित किया। जिसके माध्यम से वह तीन शरणार्थियों – खौला (Khaoula), महदी (Mahdi) और लूना (Luna) को टोक्यो 2020 में स्थान दिलाने के लिए मदद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "गोल्ड मेडल जीतने के बाद मैं कभी भी शून्य की भावना को नहीं भूलूंगा। हर एथलीट को यह संदेश देना इतना महत्वपूर्ण है कि इसका जवाब खोजने के लिए कोई पोडियम नहीं बनाया जाएगा। यह वास्तव में आप हैं जो परिभाषित करते हैं कि आप क्या करते हैं और पदक की संख्या आपको पहचान दिलाती है।‘’

पांच भाग वाली ये सीरीज़ टेकिंग रिफ़्यूज: टार्गेट टोक्यो 2020 अब ओलंपिक चैनल की वेबसाइट पर उपलब्ध है।