अभिनव बिंद्रा का मानना है कि ओलंपिक गेम्स लोगों की ज़िंदगी को एक नया आकार देता है

भारतीय शूटिंग के दिग्गज अभिनव बिंद्रा को लगता है कि ओलंपिक गेम्स गोल्ड, सिल्वर या ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने से कहीं बड़ा है।

लौसाने में इंटरनेशनल ओलंपिक कमीटी (International Olympic Committee’s IOC) के हेडक्वार्टर के सफ़र के दौरान भारतीय शूटर अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) को ‘मेक अ मार्क’ (Make A Mark) प्रोजेक्ट के बारे में पता चला और वहां से उन्हें एक अलग ही प्रेरणा मिली।

अपने दोस्त और 3 बार के ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता निकोलो कैंप्रियानी (Niccolo Campriani) के साथ मिलकर उन्होंने तीन रेफ्यूजी को नई ज़िन्दगी दी और साथ ही उन्हें ओलंपिक के सपने को देखने की हिम्मत दी।

इटली के इस दिग्गज को इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए साथ की ज़रूरत थी तो ऐसे में भारतीय शूटर अभिनव बिंद्रा ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और इस मुहिम में निस्वार्थ अपना योगदान दिया।

विंटर ओलंपियन शिव केशवन के साथ इन्स्टाग्राम लाइव चैट के दौरान बिंद्रा ने कहा “हमेशा से खेल के ज़रिए लोगों की ज़िंदगी को सकारात्मक रूप देने की कोशिश रही है। यूरोप में रेफ्यूजी मूवमेंट बहुत लंबी चली थी और निक्को (निकोलो कैंप्रियानी) जो कि इस प्रोजेक्ट के पीछे का दिमाग हैं, उनकी इस प्रोजेक्ट को लेकर मेरे दिल में ख़ास जगह है।”

मेरे लिए शुरू से खेल उन लोगों को सहारा देने का ज़रिया है जिन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ सहा है और वह एक नई ज़िंदगी शुरू करना चाहते हैं और खेल द्वारा उस अंतर को कम होते हुए देखना अच्छा लगता हैं और साथ ही यह देखकर भी अच्छा लगता है कि कैसे खेल ने लोगों को एक नई पहचान दी है।”

खेल है एक उम्मीद

बिंद्रा रेफ्यूजी खाउला (Khaoula), मेहदी (Mahdi) और लूना (Luna) से लौसाने के आर्चरी एक्सेलेंस सेंटर में मिले थे और उन्होंने उन तीनों को भारत में आमंत्रित किया ताकि वह उन्हें शूटिंग के कुछ गुणों से अवगत करा सकें।

उन तीनों ही रेफ्युजियों ने भारत आकर अभिनव से शूटिंग के गुण सीखने के साथ-साथ और भी बहुत कुछ सीखा। बिंद्रा का मानना है कि उन्होंने उन खिलाड़ियों की शूटिंग को बेहतर होते देखी थी और साथ ही उनके व्यक्तित्व को भी बढ़ते हुए देखा था।

बिंद्रा ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा “यह प्रोजेक्ट अब काफी सालों से चल रहा है और जब मैंने उन खिलाड़ियों को देखा था तो उनमें आत्मविश्वास की कमी थी और वह सही में जूझ रहे थे। मुझे लगता है कि स्पोर्ट्स में यह मेरे लिए सबसे ज़्यादा अर्थपूर्ण गतिविधि रही है।”

अभिनव बिंद्रा एक ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने ताउम्र ओलंपिक गेम्स की वैल्यू का पालन किया है और वह उम्मीद करते हैं कि यह मुहिम टोक्यो 2020 (Tokyo 2020) के बाद भी आगे बढ़े और खेल ऐसे ही लोगों की ज़िन्दगी बनाता रहे।

शरणार्थी निशानेबाज़ ने टोक्यो के लिए लिया बिंद्रा का सुझाव

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भारतीय गोल्ड मेडल विजेता ने आगे कहा “ओलंपिक गेम्स का मतलब गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज़ जीतने से कही ज़्यादा है और वह लोगों की ज़िंदगी में परिवर्तन लाना है। इसका मतलब उनकी ज़िंदगी को बेहतर करना है और यही ओलंपिक मूवमेंट का असल मतलब है। एक एथलीट होने के नाते इसी चीज़ ने मुझे इस मुहिम के साथ जुड़ने की प्रेरणा दी और मैं इसे बहुत सा समय और उर्जा देने का इच्छुक हूं।”

ओलंपिक चैनल की ओरिजिनल सीरीज़ टेकिंग रेफ्यूजी: टारगेट टोक्यो 2020 (Taking Refuge: Target Tokyo 2020) में ‘मेक अ मार्क’ के सफर को बखूबी दिखाया गया है।

यह सीरीज़ ओलंपिक चैनल पर उपलध है।

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