शरणार्थी शूटरों का ओलंपिक सपना साकार करना चाहते हैं अभिनव बिंद्रा

बेंगलुरु में स्थित पादुकण-द्रविड़ सेंटर में शरणार्थी शूटरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा

लेखक ओलंपिक चैनल ·

भारत के लिए एकमात्र एकल ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाले दिग्गज शूटर अभिनव बिंद्रा भारत में रह रहे शरणार्थियों को 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयार करने के लिए ट्रेनिंग दे रहे हैं, ताकि उन सभी का भी ओलंपिक सपना साकार हो सके।

बिंद्रा का ट्रेनिंग कैंप बेंगलुरु शहर से थोड़ा बाहर स्थित पादुकोण-द्रविड़ सेंटर में चल रहा है, उन्होंने ऐसा करने के पीछे का मक़सद और अनुभव भी साझा किया।

अभिनव बिंद्रा ने कहा, ‘’इसमें शामिल सभी शरणार्थियों ने इससे पहले कभी राइफ़ल उठाई भी नहीं थी।‘’

‘’हो सकता है कि ये सभी अलग अलग जगह से आए हों, सभी की अलग कहानी हो, लेकिन शूटिंग ने उन सभी को एक सूत्र में बांधा है। मुझे उन्हें इस परिवार में स्वागत करते हुए ख़ुशी हो रही है, जैसा कि हम सभी अपने सपने को साकार करने का प्रयास करते हैं।‘’:अभिनव बिंद्रा

शरणार्थियों को ट्रेनिंग क्यों ?

दरअसल, ये परियोजना शूटिंग में तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडल पर निशाना साधने वाले निकोलो कैंपरियानी की दिमाग़ की उपज थी। जिन्होंने तीन शरणार्थियों के सफ़र को आगे बढ़ाया, सिखाया और ओलंपिक तक क्वालीफ़ाई कराने की कोशिश में जुटे हैं।

उनकी कहानी ओलंपिक चैनल की सीरीज़ टेकिंग रेफ़ुजी: टारगेट टोक्यो 2020 में दिखाई जाएगी जो अगले साल में रिलीज़ होगी।

इनमें से दो शरणार्थी शूटर बिंद्रा और कैंपरियानी के बेंगलुरु स्थित पादुकोण-द्रविड़ सेंटर में चल रहे कैंप में शामिल हो गए हैं, अपनी टोक्यो 2020 महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने के लिए वे भारत के बेहतरीन शूटर के साथ ट्रेनिंग ले रहे हैं जिसमें दुनिया की नंबर-1 10 मीटर राइफ़ल शूटर अपूर्वी चंदेला भी शामिल हैं।

भारतीय शूटरों के लिए पिछले कुछ समय यादगार रहे हैं, भारत के कम से कम 15 शूटरों ने अपना स्थान 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए पक्का कर लिया है।

भारतीय शूटरों से ट्रेनिंग

अभिन बिंद्रा फ़ाउंडेशन के समर्थन के साथ, शरणार्थी शूटर अकादमी में एक हफ़्ते की ट्रेनिंग लेंगे, साथ ही साथ वे आराम और मेडिटेशन लगाने की तकनीक का भी अनुभव हासिल करेंगे।

इन सबके अलावा उन्हें दूसरी गतिविधियों के लिए भी समय निकालना होगा, वे घुड़सवारी सेंटर भी जाएंगे और बेंगलुरु शहर की सैर भी करेंगे।

बिंद्रा मानते हैं कि अनुभव से न केवल उनकी खेल क्षमता में लाभ होगा, बल्कि व्यापक अर्थों में भी ये उनके लिए फ़ायदेमंद रहेगा।

‘’एक एथलीट के तौर पर हम ट्रेनिंग के लिए बिल्कुल प्रतिबद्ध होते हैं, और नतीजे हमें आगे बढ़ाते हैं, और मक़सद प्रदान करते हैं। लेकिन हममें से कई ये नहीं देख पाते कि खेल हमें एकता के सूत्र में भी बांधता है, दूसरों को प्रेरित करता है, हमें इसे भी समझना चाहिए।“:अभिनव बिंद्रा

बिंद्रा ये भी मानते हैं कि जो रास्ते इन शरणार्थियों ने लिए हैं, शूटिंग की शुरुआत से लेकर ओलंपिक क्वालिफ़िकेशन तक, ये दूसरों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करने में मदद कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने बीजिंग 2008 में किया था।

"एक परियोजना के रूप में शरणार्थी यहां लानाइस धारणा से आकर्षित होता है, और इससे जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदलने के लिए ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के लिए और उनकी उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।"

देखिए: टेकिंग रेफ़ुजी का ट्रेलर

टेकिंग रेफ़ुजी सीरीज़ की एक झलक, पूरा वीडियो अगले साल ओलंपिक चैनल पर होगा रिलीज़।

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