अदिति अशोक ने T-30 पर रहते हुए अंडालूसिया ओपन गोल्फ़ किया ख़त्म

भारतीय गोल्फ़र अदिति अशोक ने पहले दो राउंड की तुलना में आख़िरी दो राउंड में अच्छा प्रदर्शन किया और लेडीज़ यूरोपियन टूर के सीज़न का अंत किया।

लेखक सैयद हुसैन ·

भारत की अदिति अशोक (Aditi Ashok) अंडालूसिया कोस्टा डेल सोल ओपन (Andalucia Costa del Sol Open) गोल्फ़ इवेंट के आख़िरी दो राउंड में अच्छा प्रदर्शन करते हुए संयुक्त 30वें स्थान पर रहीं। ये लेडीज़ यूरोपियन टूर सीज़न (Ladies European Tour – LET) की आख़िरी प्रतियोगिता थी।

इससे पहले अदिति अशोक ने बेहद क़रीबी अंतर से वीकेंड के लिए कट हासिल किया था, जहां उन्होंने 8-ओवर का स्कोर बनाया था। जबकि उनकी हमवतन दिक्षा डागर (Diksha Dagar) कट हासिल करने से चूक गईं थी।

स्पेन के मलागा में स्थित रियल क्लब डी गोल्फ़ गुआडअलमिना में आयोजित इस इवेंट के तीसरे राउंड में अदिति T-54 पर थीं। इस राउंड में अदिति ने 6 बर्डीज़ और तीन बोगी के साथ 3-अंडर 69 का स्कोर हासिल किया था। ये इस इवेंट में उनका पहला अंडर-पार स्कोर था।

इस राउंड के बाद अदिति ने 13 पायदान की छलांग लगाई और लीडरबोर्ड पर T-41 पर रहीं।

आख़िरी राउंड में अदिति ने वन-अंडर 71 का स्कोर बनाया जिसमें तीन बर्डीज़ और दो बोगी शामिल थी। फ़ाइनल राउंड के बाद उनका कुल स्कोर 4-ओवर 292 रहा और उन्होंने लीडरबोर्ड T-30 के साथ ख़त्म किया।

अंडालूसिया कोस्टा डेल सोल ओपन गोल्फ़ का फ़ाइनल लीडरबोर्ड

डेनमार्क की एमिलि क्रिस्टिन पेडर्सन (Emily Kristine Pedersen) ने अपना लगातार तीसरा LET ख़िताब जीता, जहां उन्हें स्पेन की नूरिया इतुरिओज़ (Nuria Iturrioz) के ख़िलाफ़ कठिन चुनौती मिली थी।

क्रिस्टिन का कुल स्कोर 15-अंडर 273 रहा और वह नूरिया से 4 शॉट आगे रहते हुए ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा जमाया।

इस जीत के साथ ही क्रिस्टिन ने अपने इस LET सीज़न का शानदार अंत किया, उन्होंने इस साल कुल चार LET ख़िताब अपने नाम किया। 24 वर्षीय डेनमार्क की इस गोल्फ़र ने इस सीज़न से पहले बस एक ही LET ख़िताब जीता था, जो 2015 का इंडियन ओपन था।

क्रिस्टिन के लिए इस सीज़न की पहली LET जीत अगस्त में टिपस्पोर्ट चेक लेडीज़ (Tipsport Czech Ladies Open) ओपन में आई थी। इसके बाद उन्होंने साउदी अरब में ख़िताबी जीत हासिल की और फिर स्पेन के अंडालूसिया ओपन को जीतते हुए क्रिस्टिन ने ख़िताबी हैट्रिक पूरी की।

क्रिस्टिन ने इस लगातार तीन जीत के साथ मेरी-लॉरी डी लॉरेन्ज़ी (Marie-Laure de Lorenzi) की बराबरी कर ली है, जिन्होंने ये कारनामा 1989 में अंजाम दिया था।