2027 AFC एशियन कप की मेज़बानी के दावेदारों में शामिल हुआ भारत

ऑल इंडिया फुटबॉल फ़ेडरेशन के महासचिव कुशाल दास का कहना है कि भारत में 2027 AFC एशियन कप की मेज़बानी हासिल करने की पूरी क्षमता है, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा फ़ुटबॉल संस्कृति वाले देशों के ख़िलाफ़ होगा।

ऑल इंडिया फुटबॉल एसोसिएशन (AIFF) के महासचिव कुशाल दास (Kushal Das) उम्मीद करते हैं कि एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) पूरे महाद्वीप में इस खेल का प्रसार करने के अपने निरंतर प्रयासों के चलते 2027 AFC एशियन कप की मेज़बानी का अधिकार भारत को दे सकता है।

एएफसी ने बुधवार को भारत को उन पांच दावेदारों में से एक बताया जो 2027 में हर चार साल बाद होने वाले इस इवेंट की मेज़बानी कर सकते हैं। हालांकि ईरान, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और चैंपियन क़तर जैसे देशों के इस दौड़ में शामिल होने की वजह से कुशाल दास को लगता है कि मेज़बानी का अधिकार हासिल करने की राह बहुत आसान नहीं होगी।

AIFF के अधिकारी ने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा, “क़तर, सऊदी अरब और ईरान जैसे देश फुटबॉल में बहुत बेहतर हैं और वे इसकी मेज़बानी करने के लिए भी उत्सुक होंगे। क़तर के पास विश्व कप (2022 फीफा) के बाद से बेहद शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।”

“मुझे यकीन है कि इसके लिए बहुत अधिक प्रतिस्पर्धा होगी। लेकिन भारत पर जिस कारण से विचार किया जा सकता है वह आप जानते हैं, AFC पूरे महाद्वीप में इस खेल को बढ़ावा देना चाहता है और इस पूरी योजना में भारत एक बहुत महत्वपूर्ण देश है। यही वजह है कि हमने भी अपनी रुचि व्यक्त की है।”

बीते कुछ वर्षों में भारत को 2017 के U-17 फीफा विश्व कप सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण इवेंट्स की मेज़बानी करते हुए देखा गया है।

भारत का अनुभव रखेगा मायने

अगले साल भारत वुमेंस अंडर-17 विश्व कप और 2022 एएफसी वुमेंस एशियन कप की मेज़बानी करेगा। ऐसे में कुशाल दास को उम्मीद है कि भारत को एक और शानदार इवेंट का स्वागत करने का मौका मिल सकता है।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम एक अच्छी स्थिति (यदि 2027 एएफसी एशियाई कप की मेज़बानी करने का अवसर दिया गया) में हैं।”

“जब तक 2027 एशियन कप करीब आएगा, तब तक हमारे पास कुछ बड़े इवेंट की मेज़बानी करने का अनुभव हो चुका होगा। मुझे लगता है कि हमारे पास इस इवेंट की मेज़बान करने का पूरा आत्मविश्वास होगा।

“हमारे पास एक बहुत अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है। मुझे लगता है कि हमारे पास पांच-छह स्टेडियम हैं जो एएफसी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि हम ऐसा करने के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं, यदि हमें मेज़बानी के अधिकार मिलते हैं।”

हालांकि AIFF के अधिकारी ने स्वीकार किया कि बोली की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह राह आसान नहीं थी। हालांकि, कुशाल दास भारत को यह अवसर मिलने को लेकर आशावादी रहे।

उन्होंने समझाते हुए कहा, “वे एक मजबूत राष्ट्र हैं। खासकर क़तर, सऊदी अरब और ईरान। वे फुटबॉल में बेहद अच्छा प्रदर्शन करने वाले देश हैं और उनके पास अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर भी है।”

“लेकिन मुझे लगता है कि हर कोई भारत को एक उभरते हुए फुटबॉल राष्ट्र के रूप में देखता है। और वे भारत को इस महत्वपूर्ण इवेंट के होस्टिंग का अधिकार देने के महत्व को भी समझते हैं। यही वजह है कि फीफा ने हमें दो विश्व कप, आयु-वर्ग के कोर्स और फिर एएफसी ने 2022 में वुमेंस एशियन कप की मेज़बानी का अधिकार दिया है।"

जबकि कतर ने 1988 और 2011 में एशियन कप की मेज़बानी की है और ईरान ने दो बार 1968 और 1976 में अपनी घरेलू धरती पर प्रमुख महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं को जीता है।

अगले वर्ष घोषित होने वाले मेज़बान राष्ट्र के साथ आगे की प्रक्रिया पर अब उम्मीद है कि एएफसी बोली लगाने वाले देशों के साथ काम करेगा।

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