भारतीय शूटिंग के "गोल्डन बॉय" दिव्यांश सिंह पंवार के बारे में जानिए सबकुछ  

16 साल की उम्र में दिव्यांश ने हासिल कर लिया टोक्यो ओलंपिक में अपना कोटा 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

महज 18 साल की उम्र में दिव्यांश सिंह पंवार 10 मीटर एयर राइफल की वर्ल्ड रैंकिंग में पहले पायदान पर हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अब तक छह स्वर्ण पदक अपने नाम किये हैं।

पंवार ने सिर्फ 16 साल की उम्र में 2019 में बीजिंग में हुए ISSF वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर ओलंपिक में कोटा हासिल कर लिया था। अगर कोरोनो वायरस महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक स्थगित नहीं हुआ होता तो वो 18 साल के होने से पहले ही एक ओलंपियन होते।

पंवार का जन्म राजस्थान में हुआ, जहां की मिट्टी ने राज्यवर्धन सिंह राठौड, करणी सिंह, ओम प्रकाश मिठारवाल और अपूर्वी चंदेला जैसे ख्याति प्राप्त निशानेबाजों को जन्म दिया। ओलंपिक चैनल के माध्यम से जानें पंवार के बारे में विस्तार से-

शूटिंग में पंवार की शुरूआत कैसे हुई?

12 साल की उम्र में उन्होंने शूटिंग की शुरूआत की और अपनी बड़ी बहनअंजलि के शूटिंग उपकरणों के साथ जयपुर के जंगपुरा शूटिंग रेंज में अभ्यास शुरू कर दिया। पंवार ने 2017 में दिल्ली जाने से पहले तक कुलदीप शर्मा के अधीन प्रशिक्षण प्राप्त किया।

यह माना जाता है कि पबजी गेम की लत के कारण उनके पिता अशोक पंवार ने उन्हें दीपक कुमार दुबे के नेतृत्व में करणी सिंह शूटिंग रेंज में अभ्यास के लिए भेज दिया था। इस दौरान उन्हें प्रशिक्षण के लिए एक नई राइफल और एक जोड़ी जूते भी मिले। उन्हें बचपन से ही शूटिंग में दिलचस्पी थी। क्योंकि उनके पिता दीवार पर एक निशाना बनाते थे जिस पर वो प्लास्टिक की बंदूक से निशाना लगाते थे।

जूनियर से सीनियर में परिवर्तन

2017 में जूनियर और युवा दोनों नेशनल्स की सभी 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धाओं में जीत हासिल करके पंवार सुर्खियों में आ गये। इसमें युवा पुरुष और जूनियर पुरुष वर्ग के राष्ट्रीय चयन ट्रायल 1 और 2 भी शामिल हैं।

फरवरी 2019 में दिल्ली में ISSF विश्व कप में उनकी सीनियर वर्ग में पहली उपस्थिति हुई। इसने उन्हें हकीकत जानने का मौका दिया। उन्होंने 627.2 के स्कोर के साथ क्वालिफिकेशन में 12वां स्थान हासिल किया। उन्हें यह समझ आ गया कि सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने के लिए उन्हें मानसिक रूप से अधिक मजबूत और अधिक केंद्रित होने की जरूरत है।

दिल्ली में अपने मैच के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनना है। मुझे तकनीक पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। क्योंकि जिस वक्त मैं अपनी तकनीक भूल जाता हूं। मैं 10 सेकंड के लिए शूटिंग बंद कर देता हूं। मुझे मानसिक रूप से बहुत सुधार करना होगा। क्योंकि अभी तक मैंने इस पहलू पर काम नहीं किया है।"

पंवार की प्रतिदिन की दिनचर्या

पंवार के दिन की शुरुआत सुबह 5:30 बजे से होती है। इसके बाद कोच के साथ 6:30 बजे तक कठोर शारीरिक प्रशिक्षण सत्र चलता है। नाश्ता करने के बाद वो 9 बजे शूटिंग रेंज पहुंच जाते हैं और 1 बजे तक अभ्यास करते हैं। शाम को भी शारीरिक प्रशिक्षण का एक और सत्र चलता है।

रात का खाना खाने के बाद वो आमतौर पर रात 10 बजे सोने चले जाते हैं। हालांकि, कभी-कभी देर रात तक रूममेट विवेक के साथ चैट करना उन्हें अच्छा लगता है। वह ध्यान लगाने का भी अभ्यास करते हैं और इस दौरान भगवद् गीता अपने पास रखते हैं।

दिव्याशं सिंह पंवार और एलावेनिल वलारिवन

गोल्डन बॉय

अपने संक्षिप्त करियर में पंवार ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में छह स्वर्ण पदक, दो सिल्वर और एक कांस्य पदक अपने नाम किये हैं। 2018 में जर्मनी के सुहेल में ISSF जूनियर विश्व कप में पंवार, हृदय हजारिका और शाहू माने की तिकड़ी ने जूनियर पुरुष टीम की 10 मीटर की राइफल स्पर्धा में 1875.3 का स्कोर करते हुए स्वर्ण पदक जीता, जो जूनियर मिश्रित टीम स्पर्धा में एक विश्व रिकॉर्ड है। उन्होंने औरइलावेनिल वालारिवान ने 498.6 स्कोर के साथ विश्व जूनियर रिकॉर्ड कायम करते हुए एक और स्वर्ण पदक हासिल किया।

2018 में ISSF वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने पार्टनर श्रेया अग्रवाल के साथ 10 मीटर एयर राइफल जूनियर मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य पदक जीता।

2019 में बीजिंग में ISSF विश्व कप में उन्होंने अंजुम मौदगिल के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और इतना ही नहीं भारत की ड्रीम टीम ने उस साल म्यूनिख विश्व कप में एक और स्वर्ण पदक पर दाव लगाया। पुतिन में 2019 ISSF विश्व कप में पंवार ने क्रोएशिया के साथी स्न्जाना पजेसिक के साथ एक और स्वर्ण पदक हासिल किया।

इन सभी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों की बदौलत 2019 में उन्हें प्रतिष्ठित गोल्डन टारगेट अवार्ड से सम्मानित किया, जो सीजन के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों को दिया जाता है।

कोरोना महामारी के दौरान प्रशिक्षण और ओलंपिक की तैयारी

कोरोना वायरस महामारी ने टोक्यो गेम्स के लिए उनकी तैयारियों को कमजोर कर दिया, लेकिन उन्होंने अपना साहस बढाये रखा और प्रशिक्षण के लिए अपने कोच दुबे के घर को एक अस्थायी शूटिंग रेंज में बदल दिया।

फरीदाबाद में छठी मंजिल के उनके घर में एक-दूसरे से सटे तीन बेडरूम हैं। उन्होंने लॉबी को 10 मीटर दूरी का शूटिंग लक्ष्य के रूप में बखूबी इस्तेमाल किया।

दुबे ने AFP को बताया, "मुझे एहसास हुआ कि अगर हम अपने दो कमरों से सामान खाली कर दें और इनके बीच की लॉबी को 10 मीटर दूरी के निशाने की शूटिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यह जगह रोशनी के लिहाज से भी अच्छी थी, क्योंकि मैंने लक्स मीटर से इसकी जांच कर ली थी। इसलिए प्रशिक्षण के लिए कोई समस्या नहीं थी।"

पंवार ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय अभिनव बिंद्रा को अपना आदर्श मानते हैं। अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उन्हें विकासात्मक समूह से ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के कोर ग्रुप में पदोन्नत कर दिया गया।