फ्रेंच बॉक्सिंग टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे अमित पंघल, कविंदर और संजीत

आठ महीने के ब्रेक के बाद रिंग में वापसी करते हुए भारतीय मुक्केबाजों ने नान्टेस में चल रहे एलेक्सिस वैस्टाइन इंटरनेशनल टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया।

लेखक रितेश जायसवाल ·

कोरोना वायरस (COVID-19) के चलते लगे विराम के बाद भारतीय मुक्केबाजों ने रिंग में अच्छी वापसी की है। आपको बता दें, अमित पंघल (Amit Panghal), कविंदर सिंह बिष्ट (Kavinder Singh Bisht) और संजीत (Sanjeet) ने फ्रांस के नान्टेस में चल रहे एलेक्सिस वैस्टाइन इंटरनेशनल टूर्नामेंट में अपने-अपने भार वर्ग के फाइनल में जगह बना ली है।

यह टूर्नामेंट टोक्यो ओलंपिक की तैयारी के लिए भारतीय मुक्केबाज़ी दल के यूरोपीय दौरे का हिस्सा है। मार्च में जॉर्डन में हुए ओलंपिक क्वालिफ़ायर के बाद यह पहली बार था जब मुक्केबाजों ने किसी प्रतिस्पर्धात्मक मुकाबले में हिस्सा लिया था।

चार मुक्केबाज़ों के ड्रॉ में अमित पंघल (52 किग्रा) ने अमेरिकी मुक्केबाज क्रिस्टोफर हेरेरा को 2-1 से हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। ख़िताब के लिए भारतीय मुक्केबाज़ का अगला मुक़ाबला यूएसए के अब्राहम रेने पेरेज (Abraham Rene Perez) से होगा।

2019 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता अपने भार वर्ग में AIBA वर्ल्ड नंबर-1 मुक्केबाज़ हैं और वह पहले ही टोक्यो के लिए एक कोटा स्थान हासिल कर चुके हैं।

हालांकि, पंघल ने स्वीकार किया कि आठ महीने के लंबे अंतराल के बाद रिंग में वापसी करना काफी चुनौतीपूर्ण था।

पंघल ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, “एक प्रतिद्वंदी का सामना करने में काफी अलग महसूस हुआ। मैं सतर्क था, चोट लगने का डर था। हम नहीं जानते कि शरीर और मांसपेशियां कैसे अपनी प्रतिक्रिया देंगी और अब आप कभी भी नहीं चाहेंगे कि आपको चोट लगे।"

Amit Panghal: India boxing's big new hope

Already picking up a silver medal at the World Championships and gold at th...

भारतीय मुक्केबाजों ने ट्रेन से इटली के असिसी पहुंचने के कुछ हफ़्ते बाद ही अपनी तैयारी की। पटियाला के राष्ट्रीय शिविर में उन्हें COVID सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते अभ्यास मुकाबलों की अनुमति नहीं मिली।

25 वर्षीय पंघल रिंग में अपनी वापसी से खुश नज़र आए और कुछ अन्य मुकाबलों ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी मदद की।

पूर्व एशियाई चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता कविंदर ने एक अन्य स्थानीय मुक्केबाज बेनिक जॉर्ज (Benik George) पर 3-0 की शानदार जीत दर्ज की और अब उनका मुक़ाबला फ्रेंचमैन सैमुअल किस्तोहुर्री (Samuel Kistohurry) से होगा। कविंदर ने 57 किग्रा भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा की।

संजीत (91 किग्रा) ने यूएसए के शेरोद फुलघ्म (Sherrod Fulghm) को 2-1 से हराया और अब फाइनल में वो वहां के स्थानीय मुक्केबाज़ सोहेब बूफिया (Soheb Bouafia) से भिड़ेंगे।

इस बीच शिवा थापा (Shiva Thapa) (63 किग्रा) को सेमीफाइनल में फ्रांस के लाउंसे हमराओई (Lounes Hamraoui) से 2-1 से हार के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। 2015 वर्ल्ड चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता थापा ने इससे पहले प्रतियोगिता के अपने पहले बाउट में डच मुक्केबाज़ एनरिको लाक्रूज (Enrico Lacruze) को हराया था।

सतीश कुमार (Satish Kumar) (+91 किग्रा) ने अपनी शुरुआती बाउट में फ्रांस के अलाइव मोउरड (Aliev Mourad) को शिकस्त दी, जबकि सुमित सांगवान (81 किग्रा) ने अमेरिकी मुक्केबाज रॉबी गोंजालेस को 2-1 से हराया।

वहीं, आशीष कुमार (Ashish Kumar) (75 किग्रा) फ्रेंच टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सातवें भारतीय मुक्केबाज हैं।