जब वर्ल्ड चैंपियन माइक पॉवेल ने अंजू बॉबी जॉर्ज के करियर को बनाया सफल

2003 वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले भारतीय लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज ने माइक पॉवेल के साथ एक महीना ट्रेनिंग की थी और उन्होंने प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया था।

वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली इकलौती भारतीय एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज (Anju Bobby George) का मानना है कि दिग्गज माइक पॉवेल (Mike Powell) के साथ एक महीने कड़ी ट्रेनिंग ने उन्हें 2003 वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए तैयार कर दिया था।

1991 में पॉवेल का लॉन्ग जंप में रिकॉर्ड 8.95 मीटर था और आज भी वह सर्वश्रेष्ठ है। तो वह कौन सी बड़ी वजह थी कि इस अमेरिकी एथलीट ने अंजू को वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल दिलाने में मदद की। 2000 दशक की शुरुआत में भारतीय एथलेटिक्स का इतना ज़्यादा अनावरण नहीं हुआ था और इसी वजह से अंजू के कोच को लगता था कि उन्हें देश के बाहर जा कर ट्रेनिंग करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी चाहिए।

ओलंपिक चैनेल को दिए एक इंटरव्यू में अंजू ने कहा “वह (माइक पॉवेल) एक रिकॉर्ड धारक हैं और उनके पास एक औरा भी है। आप खुद को उभरा हुआ महसूस करते हैं जब आप इतने बड़े इंसान के साथ ट्रेनिंग करते हैं।“विश्व रिकॉर्ड धारक के साथ ट्रेनिंग करने से हौसला बढ़ जाता है। उस समय भारतीय एथलीटों के पास विश्व के महानतम लोगों के साथ ट्रेनिंग करने के मौके कम थे और में ख़ुशक़िस्मत थी।”

अंजू बॉबी जॉर्ज मेडल के साथ 
अंजू बॉबी जॉर्ज मेडल के साथ अंजू बॉबी जॉर्ज मेडल के साथ 

अंजू बॉबी जॉर्ज ने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “अगर आप उस समय की बात करें जब मैं स्पर्धा करती थी तब हमारे देश में तकनीकी ज्ञान की कमी थी। हम खिलाड़ी सीखने के लिए बाहर बहुत कम जाया करते थे, लेकिन अब यह बेहतरीन तरीके से बदल चुका है“हमे पता ही नहीं होता था कि हमारे देश के बाहर क्या चल रहा है। एथलेटिक्स जैसा खेल जो बहुत तेज़ी से बदलता है और बढ़ता है और ऐसे में हम इसमें पीछे रह जाते हैं।''

अंजू बॉबी जॉर्ज की सफलता का राज़

43 वर्षीय अंजू ने माना कि माइक पॉवेल के साथ समय बिताने की वजह से उन्हें बारीकियों पर काम किया जिस वजह से वह बेहतर भी हो गई थी।

2003 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाली भारतीय एथलीट ने आगे कहा “तकनीक के लिहाज़ से देखा जाए तो कोच बॉबी के साथ और माइक के साथ ट्रेनिंग करने में ज़्यादा अंतर नहीं था। वह मेरी ही तकनीक थी जिसने मुझे बेहतर बनाया था। ऐसी कुछ तकनीकें भी थी जिनकी वजह से हम परफेक्ट जंप मार सकते थे और उनसे हमे माइक ने ही अवगत कराया।”

जंप के साथ-साथ अंजू बॉबी जॉर्ज ने अपनी रनिंग पर भी काम किया ताकि वह बेहतर से भी भी बेहतर होती जाएं।

आम तौर पर जंप के लिए अंजू 38 मीटर दौड़ा करतीं थीं लेकिन इस अमेरिकी ने उन्हें इसे भी बढाने को कहा ताकि वह बेहतर कूद सकें।

माइक पॉवेल ने अंजू बॉबी जॉर्ज की तकनीक को किया बेहतर 
माइक पॉवेल ने अंजू बॉबी जॉर्ज की तकनीक को किया बेहतर माइक पॉवेल ने अंजू बॉबी जॉर्ज की तकनीक को किया बेहतर 

अंजू बॉबी जॉर्ज ने इंटरव्यू के दौरान आगे कहा “सही तकनीक क्या है? अपने अप्रोच के लिए क्या रिदम (लय) होनी ज़रूरी है? यह कुछ बातें थी जिन्हें हमने यूएस में सीखा।”

“ऐसा नहीं है कि आपको यह चीज़ें सीखने को नहीं मिलती, बहुत सी वीडियो हैं जिनसे आप यह सब सीख सकते हैं लेकिन प्रैक्टिकल दुनिया में आपकी बारीकियां, हाव-भाव बहुत मायने रखते हैं और इन चीज़ों को आपको वही इंसान बता सकता है जिसने इन सब में महारत हासिल की हो। माइक पॉवेल उनमें से ही एक थे।''

सालों साल तक अंजू बॉबी जॉर्ज और माइक पॉवेल की दोस्ती बनी रही है और यहां तक कि अंजू की अकादमी का उद्घाटन करने वह 2016 में भारत भी आए थे।

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