योगा और मेडिटेशन है शूटर अपूर्वी चंदेला की क़ामयाबी का राज़ 

विश्व कप विजेता टीम की सदस्य अपूर्वी चंदेला का कहना है कि फ़ोकस खेल में जीत और हार में अंतर पैदा करता है।

भारतीय शूटर अपूर्वी चंदेला (Apurvi Chandela) के लिए कड़ी मेहनत करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है, लेकिन ज़रूरी है कि मेहनत सही दिशा में हो।

अपूर्वी चंदेला ने 15 साल की उम्र में बीजिंग 2008 ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) के ऐतिहासिक स्वर्ण पदक को जीतते हुए देखा था, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने शूटिंग शुरू की। आज वह भारत में सबसे प्रतिभाशाली शूटर में से एक हैं।

दो बार की व्यक्तिगत ISSF विश्व कप की स्वर्ण पदक विजेता का मानना है कि ट्रेनिंग रेंज में और कड़ी मेहनत का नतीजा है कि उन्होंने इतनी कम उम्र में इतना सब कुछ हासिल कर लिया है।

अपूर्वी चंदेला ने भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी मुदित दानी (Mudit Dani) के साथ एक इंस्टाग्राम लाइव चैट के दौरान कहा कि, "मुझे लगता है कि सफलता के लिए कड़ी मेहनत करने के अलावा दुनिया में इसका कोई दूसरा बिकल्प नहीं है। इसलिए, कड़ी मेहनत करना बहुत जरूरी है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने प्रतिभाशाली हैं या आप कितने भाग्यशाली हैं। आपको कुछ भी पाने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।”

27 वर्षीय ने शूटर ने आगे कहा कि, “आप एक लक्ष्य को ध्यान में रखिए और बड़ा सोचिए। आपके पास छोटे लक्ष्य, बड़े लक्ष्य हो सकते हैं, भले ही आप उन लक्ष्यों को अपनी ट्रेनिंग पूरा कर लें। बस आपका गोल वो होना चाहिए जो आपको लगातार संघर्ष करने के लिए प्रोत्साहित करे।”

रियो 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली ओलंपियन ने कहा कि दृष्टिकोण को मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से थकावट से उबरने के लिए उचित आराम के साथ संतुलित रहने की जरूरत है।

"मुझे लगता है कि तनाव-मुक्त रहना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कठिन मेहनत करना। यहां तक ​​कि जब मैं एक प्रतियोगिता से दूसरे में जाती हूं और मेरे पास कुछ समय होता है, तो मैं आमतौर पर कुछ दिनों के लिए ब्रेक लेती हूं। ताकि मैं सब कुछ फिर से शुरू कर सकूं।

अपूर्वी की ज़िंदगी में योग का महत्व

चंदेला अपनी स्पर्धा में खुद को बेहतर बनाने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप को समान महत्व देती हैं। अपनी शारीरिक कंडीशनिंग को ठीक करने के लिए जयपुर में जन्मे शूटर योगा का सहारा लेती हैं।

"निशानेबाजों को बहुत स्थिरता की आवश्यकता होती है और इसके लिए, मुझे लगता है कि कोर ताकत बेहद महत्वपूर्ण है। योग में इतनी विविधताएँ हैं जो आप कर सकते हैं। ऐसे कई अभ्यास हैं जो संतुलन पर फोकस करते हैं जो स्थिरता बनाने में मदद करते हैं”।

उन्होंने टूर्नामेंट की तैयारियों के लिए मानसिक प्रशिक्षण को एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू बताया।

“दबाव में वहां जाने और प्रदर्शन करने के लिए दिमाग को सही फ्रेम में होना चाहिए। आपको शांत रहने की जरूरत होती है।”

“मैं आमतौर पर मेडिटेशन करती हूं। मेरे पास एक मानसिक प्रशिक्षक भी है जो मेरी मदद करते हैं। मुझे लगता है कि मैंने अपने अनुभवों और समय के साथ बहुत कुछ सीखा है।”

“मुझे लगता है कि अनुभव आपको बहुत कुछ सिखाता है। चाहे आप उच्च या निम्न लेवल पर हों, आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है।”

उन्होंने कहा कि, "अब मेरे दिमाग को एक खास तरीके से आकार दिया गया है" और ये हमेशा विकसित होता है।”

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