MMA स्टार अर्जन सिंह भुल्लर अपने गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने की जुगत में लगे हैं

अर्जन सिंह भुल्लर ने 2012 ओलंपिक में कनाडा का प्रतिनिधित्व किया था और वह UFC के साथ क़रार करने वाले भारतीय मूल के पहले MMA एथलीट हैं

भारतीय मूल के कनाडियाई रेसलर और MMA एथलीट अर्जन सिंह भुल्लर (Arjan Singh Bhullar) पंजाब के अपने पैतृक गांव में महिलाओं को सशक्त बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के दौरान इन दिनों अर्जन लोगों के बीच में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

2012 लंदन ओलंपिक में शिरकत कर चुके अर्जन कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में स्वर्ण पदक भी जीत चुके हैं। अर्जन पंजाब के जालंधर ज़िले में स्थित बिल्ली भुल्लर गांव के रहने वाले हैं।

प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (PTI) के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘’मैं बचपन से ही लगातार भारत आता रहता हूं। हमने गांव में एक स्पेशल जगह बनाई है जहां महिलाएं इकट्ठा होती हैं, क्योंकि उनके पास पुरुषों की तरह कहीं भी आने-जाने का समय नहीं रहता।‘’

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Here are the amazing women of Pind Billi Bhullar making #coronavirus masks for the village. The idea of creating a place for women to socialize and learn to sew was brought forward by my Thia last year. Who would have thought the machines would be used to literally save lives soon after. This place is named in honor of my grandma Bibi Gurmit Kaur Bhullar. Bibi always pushed the family to keep connected and support our village. She always had a group of women by her side when back in the homeland. She would be a very proud woman today❤🙏🏽✊🏽 . . #womanpower #womanhood #covid19 #seva #giveback #village #villagelife #desi #nakodar #jalandhar #amritsar #lahore #panjab #punjab #delhi #bombay #india #indian #jantacurfew #TeamBhullar #OneBillionStrong

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महिलाओं के लिए जो कम्यूनिटी सेंटर बना है, उसका नाम अर्जन सिंह की दादी बीबी गुरमीत कौर भुल्लर के ऊपर रखा गया है। जहां इस समय महिलाएं सभी को मास्क भी वितरित कर रही हैं ताकि इस घड़ी में वे ख़ुद को और दूसरों को सुरक्षित रख सकें।

कठिन समय में बढ़ाया मदद का हाथ

MMA के इस सुपर स्टार ने कहा, ‘’इस महामारी के समय में महिलाएं मास्क बना रहीं हैं, सिलाई मशीन मैंने ही उन्हें दी थी और वे इसका इस्तेमाल इस समय कुछ इस तरह कर रही हैं। आज ये महिलाओं सिर्फ़ आत्मनिर्भर ही नहीं हैं बल्कि दूसरों की भी मदद कर रही हैं। ये महिलाएं आस पास के गावों में भी मदद कर रहीं हैं।‘’

34 वर्षीय इस एथलीट के लिए अपने पिंड (राज्य) की मदद करना कोई नई बात नहीं है।

इससे पहले भी अर्जन सिंह ने अपने गांव में एक जिम बनवाया था ताकि बिल्ली भुल्लर के बच्चे और आस पास के गांव के बच्चे वहां आकर अपनी प्रतिभा को निखार सकें।

2007 में पैन अमेरिका में कांस्य पदक जीत चुके अर्जन ने आगे कहा, ‘’हमने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ ही दिनों बाद जिम बनवाया था। जिससे स्थानीय स्कूल के बच्चों के साथ साथ पड़ोस के गांव के बच्चों के लिए भी प्रैक्टिस करने में आसानी हो। इन बच्चों में से ही कई आगे जाकर भारत के लिए पेशेवर खिलाड़ी बन सकते हैं, लिहाज़ा मैं चाहता हूं कि मेरा गांव आधुनिक और सहुलियतों से भरा हो। साथ ही साथ एक संदेश भी देना चाहता हूं कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी संभव है।‘’

अर्जन सिंह का भारत से रिश्ता

ब्रिटिश कोलंबिया के रिचमॉन्ड में जन्मे अर्जन सिंह भुल्लर भारतीय मूल के कनाडियाई की चौथी पुष्त हैं। अर्जन के दादा जी 1904 में भारत से कनाडा चले गए थे।

लेकिन इसके बावजूद भुल्लर परिवार ने अपनी जड़ों और भारतीय संस्कृति को सहेज कर रखा है। इसमें भारतीय स्टाइल की कुश्ति आज भी करना एक बड़ा उदाहरण है।

अर्जन के पिता अवतार सिंह भुल्लर (Avtar Singh Bhullar) ख़ुद भी एक पेशेवर पहलवान थे और 1998 कॉमनवेल्थ गेम्स में वह कनाडा की ओर से कुश्ति दल का हिस्सा होने के बेहद क़रीब थे।

अपने पिता जी से ही प्रेरित होकर अर्जन ने कम उम्र में ही रेसलिंग को चुना और उसमें अपने परिवार का नाम रोशन किया।

2010 में जीता गया कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल उनके रेसलिंग करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है, और इत्तेफ़ाक से वह जीत उन्हें अपने पैतृक देश भारत में ही मिली थी।

वह कनाडा की ओर से ओलंपिक में शिरकत करने वाले पहले भारतीय मूल के एथलीट हैं।

लंदन 2012 में शिरकत करने के बाद अर्जन सिंह ने MMA की ओर रुख़ किया और 2007 में अल्टिमेट फ़ाइटिंग चैंपियनशिप (UFC) में शिरकत करते हुए पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बन गए।

इसके दो साल बाद अर्जन ONE चैंपियनशिप के साथ भी जुड़ गए।

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