एक खिलाड़ी के तौर पर हर दिन बेहतर होते जाना अहम है: अश्विनी पोनप्पा 

30 वर्षीय भारतीय शटलर अशिवनी पोनप्पा की जीत की भूख अभी शांत नहीं हुई है।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारतीय बैडमिंटन स्टार अश्विनी पोनप्पा (Ashwini Ponnappa) इस समय खुद को बेहतर करने में जुटी हैं। साल 2019 में जहां इस खिलाड़ी ने चोट और ढीली फॉर्म से जूझती नज़र आईं थी लेकिन अब वह आने वाले समय में अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश में हैं। पिछली 20 प्रतियोगिताओं में से 13 में ही उन्हें पहले राउंड में बाहर होना पड़ा था। इस वजह से टोक्यो 2020 में भी क्वालिफाई करने के मौके उनके कम हो गए हैं।

असल खिलाड़ी वही है जो गिरने के बाद वापसी करे और इस समय भारतीय शटलर उसी की रणनीति बना रही हैं। इन्स्टाग्राम लाइव चाट के दौरान दूसरी भारतीय खिलाड़ी संजना संतोष से बातचीत के दौरान पोनप्पा ने कहा “बेहतर खिलाड़ी बनने की प्रक्रिया ही मुझे आगे जाने में प्रेरणा देती है। मैं अभी भी बेहतर होना चाहती हूं।”

जहां कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से हर कोई अपने घर में कैद है, ऐसे में खिलाड़ियों की ज़िन्दगी में उथल पुथल का माहौल है। इस कठिन समय में सभी खिलाड़ी कम साधनों से ही सही लेकिन खुद को फिट और तैयार रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा “यह मेरे लिए एक शुरुआत है, सही मायनों में यह ताज़ा शुरुआत है। यह नहीं पता कि अगली प्रतियोगिता कब है और ऐसे में रोज़ उसी शिद्दत के साथ उठना और मेहनत कर सीखना और बढ़ना कठिन है लेकिन यही मेरा मंत्र है। यहां बहुत कुछ सीखने के लिए है, यह अच्छा है। सबसे अहम तो यह है कि मैं खुद को पूरी तरह से तैयार रखूं और सही मौका आने पर कोर्ट पर जाऊं।”

हर खिलाड़ी की तरह अश्विनी पोनप्पा भी जानती हैं कि इस मुश्किल समय में मानसिक तौर पर फिट रहना कितना महत्वपूर्ण है। इसी विषय में उन्होंने कहा “यह सही समय है कि हम सोचे कि हमने क्यों ट्रेनिंग की है, हमने क्यों खेलना शुरू किया था। सबसे अहम यह है कि हम इस खेल से प्यार करते हैं और हमे कौन सी चीज़ बेहतर होने से रोक सकती उसी खेल में जिससे हम प्यार करते हैं।

उम्र की कोई सीमा नहीं

पोनप्पा के करियर पर नज़र डाली जाए तो उनका नाम भारत में टॉप बैडमिंटन खिलाड़ियों की सूची में शुमार है और ऐसा उन्होंने अनुभव और मेहनत से किया है। 30 वर्षीय बेंगलुरु की इस शटलर ने एक लंबा सफ़र तय किया है। इस भारतीय शटलर ने आगे कहा “मैं 30 साल की हूं लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह अंत है। खेल को मद्देनज़र रखे कर देखें तो मुझे लगता है मुझमे अभी काफी कुछ है। अभी भी मैं बहुत कुछ सीख सकती हूं।”

भारतीय शटलर की मेडल लिस्ट को देखें तो उनके पास 5 कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) के मेडल हैं और साथ ही एशियन गेम्स (Asian Games) में एक ब्रॉन्ज़ और वर्ल्ड चैंपियनशिप (World Championships) में जीता हुआ एक और ब्रॉन्ज़ मेडल उनके खेल और कला को दर्शाता है।”

ओलंपिक का तजुर्बा

पोनप्पा ने इज्ज़त और मेडल तो बहुत हासिल किए हैं लेकिन ओलंपिक मेडल से अभी तक वह वंचित रही हैं। लेकिन उनका मानना है कि ओलंपिक में जाकर पोडियम पर खड़े होकर अपने देश को सम्मानित करना बहुत ख़ास है।

अश्विनी पोनप्पा ने आगे बताया “वहां पर होने का अनुभव बयान नहीं किया जा सकता। आप जब वहां होते हैं तो आत्मविश्वास बढ़ जाता है क्योंकि आपको मालूम है कि आप अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आपको आपका मकसद पता होता है और आप अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते हैं क्योंकि आप अपने देश के लिए खेल रहे होते हैं। वहां होने में एक उर्जा आती है। सभी वहां अपने अपने देश के लिए अच्छा करना चाहते हैं। वहां सकारात्मकता, जोश, हौसला और गर्व जैसी चीज़ें होती हैं।”