एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप: बोम्बायला और दीपिका की ओलंपिक कोटा पर होगी नज़र

2019 एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप भारतीय तीरंदाज़ों के लिए 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए कोटा स्थान हासिल करने का शानदार मौका होगा।

लेखक रितेश जायसवाल ·

थाईलैंड के बैंकॉक में गुरुवार (21 नवंबर) से एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप शुरू होने जा रही है। इस इवेंट में हिस्सा लेने वाले भारत के प्रमुख तीरंदाज़ इसी सप्ताह वहां के लिए रवाना हो जाएंगे। एशिया के तीरंदाज़ों के लिए अगले साल होने वाले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के लिए कोटा स्थान हासिल करने का यह एक महत्वपूर्ण मौका होगा। इसके बाद तीरंदाज़ों को सिर्फ एक आख़िरी मौका और मिलेगा।

टोक्यो 2020 पर नज़र रखने के साथ ही भारत ने एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप के लिए एक मज़बूत टीम चुनी है, जिसमें पूर्व शीर्ष रैंक तीरंदाज़ दीपिका कुमारी और अनुभवी बोम्बायला देवी लैशराम भारतीय दल का नेतृत्व करती हुई नज़र आएंगी। हालांकि, ऐसे बेहतरीन खिलाड़ियों के बावजूद, भारत, चीनी और कोरियाई तीरंदाज़ों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

कुमारी कर सकती हैं कमाल

दो बार की कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडल विजेता दीपिका कुमारी के इस साल का सफर कुछ ख़ास नहीं रहा है। 2019 के बर्लिन तीरंदाज़ी वर्ल्ड कप के साथ ही वह 2019 के अंताल्या विश्व कप में नौवें स्थान पर रहीं। उन्होंने अपना आख़िरी गोल्ड मेडल एक प्रमुख प्रतियोगिता 2018 साल्ट लेक सिटी तीरंदाज़ी वर्ल्ड कप में जीता था, जहां वह फाइनल में जर्मनी की मिशेल क्रॉपेन को 7-3 से हराने में कामयाब रहीं थीं।

अपने खराब फॉर्म के बावजूद, कुमारी के पास अब एक बार फिर सुनहरा मौक़ा है कि अपने हुनर को दिखाते हुए वह छठा वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल अपने नाम करें। उन्होंने कुछ महीने पहले तीरंदाज़ी इवेंट रेडी स्टेडी टोक्यो में सिल्वर मेडल हासिल किया था। दुनिया में नौवें स्थान पर काबिज़ कुमारी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड सराहनीय है। ऐसे में एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप में उनसे काफी उम्मीदे होंगी।

भारत की शीर्ष रैंक की तीरंदाज़ हैं दीपिका कुमारी

ओलंपिक में चौथी बार शामिल होना चाहेंगी लेशराम

कुमारी के अलावा, भारत की महिला दल की मुख्य संभावना 34 वर्षीय बोम्बायला देवी लेशराम होंगी। उन्होंने 2008 बीजिंग, 2012 लंदन के साथ-साथ 2016 रियो ओलंपिक खेलों में भी हिस्सा लिया है। अब वह टोक्यो 2020 के लिए कोटा हासिल करना चाहेंगी। लेशराम का ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन तीन साल पहले आया था, जब वह रियो खेलों में नौवें स्थान पर रहीं।

लेशराम भी अच्छे फॉर्म के लिए संघर्ष कर रही हैं। 2016 के बाद से वह किसी भी वर्ल्ड कप में पोडियम स्थान हासिल करने में असफल रही हैं। वह वर्तमान में दुनिया में 34वें स्थान पर हैं, लेकिन उनका अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें एक प्रमुख प्रतियोगी के रूप में एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप में फायदा दे सकता है।

पुरुषों के दल की बात करें तो रिकर्व श्रेणी के लिए भारत के प्रतिभागी तरुणदीप राय, अतानू दास, जयंत तालुकदार और अतुल वर्मा होंगे। जिनमें राय और दास पहले ही ओलंपिक कोटा हासिल कर चुके हैं। बैंकॉक में होने जा रही प्रतियोगिता बाकी भारतीय तीरंदाज़ों के लिए 2020 में होने वाले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए अपना कोटा स्थान प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर होगा। विश्व रैंकिंग में शीर्ष 30 में भारत का कोई भी पुरुष तीरंदाज़ नहीं है। ऐसे में कौन तीरंदाज़ बेहतर प्रदर्शन कर सकता है यह बता पाना थोड़ा मुश्किल होगा।

मुख्य चुनौती होगी रिकर्व श्रेणी

महिलाओं की रिकर्व श्रेणी में दुनिया के शीर्ष पांच रैंकिंग वाले तीन तीरंदाज़ एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप में भाग लेंगे। शीर्ष क्रम के कांग चाए यंग सबसे कड़ी चुनौती पेश करते हुए देखे जा सकते हैं। वह मॉस्को वर्ल्ड कप फाइनल में और नेपल्स में हुए 2019 समर यूनिवर्सेड वर्ल्ड रैंकिंग इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे हैं।

चीन के 21 वर्षीय झेंग यिचई ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। वह अंताल्या और शंघाई वर्ल्ड कप में क्रमशः गोल्ड और सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। ऐसे में यह प्रतियोगिता काफी रोमांचक होगी, जहां तीन ओलंपिक कोटा के लिए भारतीय तिरंदाज़ों को इन अनुभवी और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यहां कोटा स्थान हासिल करना काफी मुश्किल साबित होगा।