दमदार जीत के साथ एमसी मैरी कॉम ने क्वार्टरफ़ाइनल का टिकट हासिल किया

अपने से 16 साल छोटी मुक्केबाज़ बेनी टेसमिन के ख़िलाफ़ भारतीय दिग्गज ने तीनों ही राउंड में जीत हासिल की

लेखक सैयद हुसैन ·

जॉर्डन के अम्मान में चल रही एशियन/ओशियिना बॉक्सिंग क्वालिफ़ायर्स में शनिवार को भारत की दिग्गज महिला मुक्केबाज़ एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) ने वूमेंस फ़्लाईवेट (48-51 किग्रा) कैटेगिरी में न्यूज़ीलैंड की बेनी टेसमिन (Tasmyn Benny) को राउंड ऑफ़ 16 में मात दी।

बेनी से क़द में छोटी होने के बावजूद लंदन 2012 की कांस्य पदक विजेता मैरी कॉम ने शुरुआत से लेकर अंत तक बाऊट अपने नियंत्रण में रखी। इसकी वजह थी उनका अनुभव जिसका जवाब युना बेनी के पास नहीं था।

लेकिन न्यूज़ीलैंड की 21 वर्षीय युवा मुक्केबाज़ ने बेहतरीन खेल भावना दिखाई, जैसे ही बाऊट का फ़ैसला मैरी कॉम के पक्ष में गया तो बेनी ने भी उन्हें गले से लगाते हुए जीत की बधाई दी।

मैच के बाद ओलंपिक चैनल से बात करते हुए एमसी मैरी कॉम ने कहा, ‘’वह अभी युवा हैं, लेकिन अगले 3-4 सालों में वह एक बेहतरीन मुक्केबाज़ बन सकती हैं। सिर्फ़ उनकी लंबाई की ही वजह से नहीं, बल्कि उनकी लड़ाई करने की क्षमता उन्हें अच्छा मुक्केबाज़ बनाएगी।‘’

शुरुआत से ही मैरी ने जीत की नींव तैयार कर दी थी

मैरी ने जिस लड़ाई की क्षमता की बात कही थी, उसका नमूना बेनी ने पहले ही राउंड में दे दिया था, जब अपनी लंबाई का फ़ायदा उठाते हुए न्यूज़ीलैंड की मुक्केबाज़ बाएं और दाएं हाथ का तेज़ और अच्छा मिश्रण कर रहीं थीं।

हालांकि मैरी कॉम ने बेनी के सारे प्रहारों का सामना बेहतरीन अंदाज़ में किया, और इस बात का ख़्याल रखा कि काउंटर में वह तेज़ रहें। इस कीवी मुक्केबाज़ के ख़िलाफ़ भारतीय दिग्गज ने राइट क्रॉस का अच्छा इस्तेमाल किया।

न्यूज़ीलैंड की राष्ट्रीय चैंपियन बेनी ने भी अच्छा संयम दिखाया, लेकिन 37 वर्षीय मैरी कॉम के अनुभव और उनकी रणनीति का तोड़ बेनी नहीं ढूंढ पा रहीं थीं।

पहले राउंड के ख़त्म होने के ठीक पहले मैरी कॉम ने एक ख़ूबसूरत लीड हैंड शॉट खेलते हुए जजों को परफ़ेक्ट 10 देने पर मजबूर कर दिया था।

बेनी टेमसिन पीछे छूटती गईं

दूसरे राउंड में मैरी कॉम ने अपनी रणनीति में बदलाव लाते हुए अब बेनी टेमसिन के जैब्स का तोड़ निकालने में भी क़ामयाब थीं। ज़्यादातर मैरी अब बैकफ़ुट पर खेल रहीं थीं और उन्हें अब अपना रेंज मिल चुका था, अब भारतीय दिग्गज मुक्केबाज़ सटीक जैब्स भी जड़ रहीं थीं।

न्यूज़ीलैंड के प्रशंसकों की तरफ़ से बेनी के लिए लगातार ‘’वन-टू’’ के नारे लगा रहे थे, लेकिन बेनी के हर मूव को पहले से ही मैरी कॉम भांप ले रहीं थीं। मैरी कॉम अब दाएं हाथ से बॉडी शॉट्स भी लगा रहीं थीं।

दूसरे राउंड के ख़त्म होने के बाद जजों ने एक बार फिर इस मनिपुर की मुककेबाज़ को 5-0 से विजेता घोषित किया।

अपना 120 प्रतिशत दे रहीं हूं – मैरी कॉम

बेनी के लिए अब मैच बचाना क़रीब क़रीब नामुमकिन हो चला था, और ये तब और भी मुश्किल हो गया जब मैरी अपने बेहतरीन फ़ॉर्म में आ गईं थीं।

ओलंपिक पदक विजेता के काउंटर पंचों से बचने की कोशिश में बेनी अब जैब्स का सहारा ले रहीं थीं, लेकिन यहां भी वह ताक़तवर मैरी के सामने मानो बेबस हीं थीं।

रिंग का अच्छा इस्तेमाल करते हुए मैरी कॉम कभी कभी काफ़ी आगे आकर खेल रहीं थीं, और इसका ही असर था कि उनका लेफ़्ट और राइट कॉम्बिनेशन असरदार दिख रहा था।

नतीजा ये हुआ कि तीसरा राउंड भी मेरी कॉम ने बेहद आसानी से अपने नाम करते हुए क्वार्टरफ़ाइनल में जगह बना ली। जहां सोमवार को उनके सामने आयरिश मैगनो (Irish Magno) की चुनौती होगी।

क्वार्टरफ़ाइनल मुक़ाबले को लेकर मैरी कॉम ने कहा, ‘’मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश कर रही हूं और इसके लिए 120 फ़ीसदी दे रही हूं।‘’

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