टोक्यो 2020 में कम से कम चार पदक जीतना है लक्ष्य: बजरंग पुनिया

टोक्यो 2020 के लिए कोटा स्थान हासिल करने के बाद, भारतीय पहलवान मैट पर लौटने के लिए तैयार है।

लेखक सैयद हुसैन ·

कजाकिस्तान में हुई 2019 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद बजरंग पुनिया को घर लौटे क़रीब एक महीने हो गए हैं। इस प्रतियोगिता में 65 किग्रा वर्ग में चैंपियन बनने के प्रबल दावेदार के तौर पर बजरंग को देखा जा रहा था, लेकिन इस भारतीय पहलवान को सेमीफ़ाइनल में स्थानीय पहलवान दौलत नियाज़बेकोव के हाथों बेहद कड़े मुक़ाबले में हार का सामना करने के साथ ही उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

पुनिया मानते हैं कि उस हार को भुलाना बेहद मुश्किल है, "क्या बताएं आपको? ये लगातार तीसरी बार हो रहा है मेरे साथ।" ओलंपिक चैनल के साथ बात करते हुए 25 वर्षीय पुनिया की बातों में उस हार का दर्द साफ़ झलक रहा था।

सेमीफ़ाइनल तक का सफ़र बजरंग के लिए बेहद आसान रहा था, लेकिन अंतिम-4 के मुक़ाबले में पुनिया की क़िस्मत तब उनसे रूठ गई जब उनका एक फ़ैसला महंगा पड़ गया। नियाज़बेकोव और पुनिया के बीच मैच 9-9 से बराबर हो गया था और फिर एक मूव में 4 प्वाइंट लेने की वजह से नेयाज़बेकोव को विजेता घोषित कर दिया गया।

उन्होंने कहा "ऐसे कई मौक़े आए जब मेरे साथ नाइंसाफ़ी हुई, और इससे मेरे खेल पर असर पड़ा। मैंने इन चीज़ों के लिए यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग से भी बात की है, उन्होंने कहा है कि वे इसकी जांच करेंगे और उन्होंने आश्वस्त किया कि ऐसा आगे दोबारा नहीं होगा।"

हालांकि, भारतीय पहलवान ये भी मानते हैं कि पहले जो हुआ उसकी बात करने या सोचने से कुछ होने वाला नहीं है, अब भविष्य और ओलंपिक पर ध्यान देना ज़रूरी है। टोक्यो 2020 में स्थान पक्का करने के बाद अब ज़रूरत है कि पुनिया पोडियम पर पहुंचने के अपने सपने को सच करने के लिए अभी से ही मेहनत करें। 

इस बाबत उन्होंने कहा "जो हो गया, सो हो गया। अब हम लोग ख़ुद और भी बेहतर तरीक़े से और कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी चुनौती का सामना कर सकें।"

बड़े सपने देखना और उसे सच करने का लक्ष्य रखना ही बजरंग पुनिया के करियर में मददगार रहा है, शायद यही वजह रही कि कम समय में ही वह इस मुक़ाम तक पहुंचे हैं।

तक़दीर बदलने वाला साल

2013 में हुई एशियन चैंपियनशिप के 60 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने के बाद से ही पुनिया का करियर पूरी तरह बदल गया। हरियाणा के झज्जर में स्थित एक छोटे से गांव छारा के रहने वाले पुनिया ने बहुत ही तेज़ी के साथ क़ामयाबी की सीढ़ियों को पार किया है। साल 2018 वह साल बना जब पुनिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान बने।

2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के 65 किग्रा वर्ग और 2018 एशियन गेम्स के साथ-साथ 2019 एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही उन्होंने यह साबित कर दिया था कि वह हर टूर्नामेंट में भारत की सबसे बड़ी पदक की उम्मीद हैं।

तो इस युवा पहलवान की ज़िंदगी में पिछले कुछ सालों में क्या बदला?

"मैं मानता हूं कि इसके पीछे मेरी कड़ी मेहनत के साथ-साथ मेरे उन कोच का भी उतना ही योगदान है, जिनका साथ मुझे हमेशा मिला।"

"इसके अलावा फ़ेडरेशन का भी मुझे हमेशा साथ मिला, उन्होंने मेरे लिए ठीक उसी तरह सारे इंतज़ाम किए जैसा कि पिछले दो सालों में मैं चैंपियनशिप से पहले चाहता था। उन्होंने इसमें भी मेरा साथ दिया कि मैं कुश्ती के लिए कौन सी प्रतियोगिता में खेलना चाहता हूं और किसमें नहीं। हम तबसे अभ्यास कर रहे हैं, जब हम बच्चे थे लेकिन हमें जो इन टूर्नामेंट्स से सीखने को मिलता है वह उससे कहीं अलग होता है जो हम अभ्यास के दौरान सीखते हैं।"

"देश से बाहर ट्रेनिंग के लिए जाना भी मेरे लिए काफ़ी फ़ायदेमंद रहा, क्योंकि उससे मुझे हर स्थिति में ख़ुद को ढालने का मौक़ा मिला। फिर चाहे वह कुछ अलग तकनीक हो या फिर अलग तरह की चीज़ें। मैंने सब सीखा, जिससे मेरे खेल में बड़े स्तर पर और भी निखार आया।"

भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया टोक्यो 2020 में मेडल हासिल करने के प्रबल दावेदारों में से एक हैं। तस्वीर साभार: JSW स्पोर्ट्स

टोक्यो का टिकट

इस भारतीय को यह पता है कि अब तक चाहे जितनी भी क़ामयाबी हासिल कर ली हो, लक्ष्य अभी भी अधूरा है। अगर उन्हें अपने मेंटर योगेश्वर दत्त की तरह बनना है तो फिर ओलंपिक में पदक चाहिए ही चाहिए। पुनिया भी इस सपने को साकार करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाने से पीछे नहीं हटने वाले। पुनिया ने आगे कहा "वही असली सपना है।"

"अब तक हममें से चार पहलवानों ने 2020 ओलंपिक गेम्स के लिए क्वालिफ़ाई किया है। हमारा लक्ष्य है कि टोक्यो से हम कम से कम चार पदक ज़रूर लाएं। मुझे पता है कि यह एक बड़ी बात लग रही है, लेकिन जब देखेंगे कि हमने वर्ल्ड चैंपियनशिप में कैसा प्रदर्शन किया है तो फिर यह नामुमकिन नहीं लगेगा। आप यक़ीन मानिए हम इसे सच करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।"