BFI ने जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की तलाश के लिए शुरू किया जोनल प्रतिनिधित्व

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ अपने प्रतिभा खोज कार्यक्रम का किया विस्तार

लेखक भारत शर्मा ·

विजेंदर सिंह 2008 बीजिंग खेलों में ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज थे, जबकि एमसी मैरीकॉम ने 2012 में लंदन ओलंपिक में इस सूची में शामिल हुई थी। सिंह की सफलता के बाद से भारतीय मुक्केबाजी पारिस्थितिकी तंत्र काफी मजबूत हो गया है।

बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) ने अब आगे आते हुए जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान के लिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। BFI ने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान करने के लिए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व शुरू किया है।

शुरुआत में दो सदस्यों की समिति ही BFI की इस प्रक्रिया का संचालन करने वाली थी, लेकिन अब अब देश भर में प्रतिभाओं की तलाश के लिए सदस्य इकाई के प्रत्येक राज्य सचिव इस योजना का हिस्सा होंगे। BFI की ओर से अपनी योजना के बेहतर संचालन के लिए आठ क्षेत्रीय समितियों को गठन किया जाएगा।

BFI के अध्यक्ष अजय सिंह ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा, "भारत में मुक्केबाजी में बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन यदि देश की 130 करोड़ की आबादी के हिसाब से देखा जाए तो पंजीकृत खिलाड़ियों की वर्तमान संख्या बहुत कम है।"

एक मैच के बाद भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह

उन्होंने आगे कहा, "सरकार ने पहले ही हमें 150 खेलो इंडिया बॉक्सिंग एक्सीलेंस सेंटर आवंटित कर दिए हैं और हमारा प्रयास है कि देश के हर कोने में प्रतिभाओं को खोजा जा सके।"

उन्होंने कहा, "हमारे प्रयासों को परिणामोन्मुखी बनाने के लिए मेरा मानना ​​है कि प्रतिभा खोज प्रक्रिया में अधिक राज्य सदस्यों को शामिल करने से हमें एथलीट-प्रथम दृष्टिकोण और फेडरेशन के प्रयासों को समावेशी और प्रभावी बनाने के लिए एक मजबूत कदम फैलाने में हमारे मिशन में मदद मिलेगी।"

अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (AIBA) के अध्यक्ष उमर क्रेमलेव ने भी खेल पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने के लिए महासंघ द्वारा किए गए प्रयासों की प्रशंसा की है।

क्रेमलेव ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "मुझे भारत में मुक्केबाजी के विकास के लिए कोई बाधा नहीं दिख रही है। हमें केवल देश में बॉक्सिंग का विकास के लिए इसमें सहयोग करना चाहिए।"