भारत में ओलंपिक पदकों के बाद बढ़ी बैडमिंटन की लोकप्रियता: चिराग शेट्टी

भारतीय बैडमिंटन शीर्ष युगल खिलाड़ी का मानना है कि साइना नेहवाल और पीवी सिंधु की ओलंपिक में जीत के बाद देश में इस खेल के प्रति लोकप्रियता बढ़ी है।

लेखक ओलंपिक चैनल ·

भारत के शीर्ष बैडमिंटन युगल खिलाड़ी चिराग शेट्टी का मानना है कि साइना नेहवाल और पीवी सिंधू के ओलंपिक में पदक जीतने से देश में इस खेल की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। प्रीमियर बैडमिंटन लीग के मौके पर बोलते हुए चिराग शेट्टी ने कहा कि देश में दो ओलंपिक पदक ने इस खेल के प्रति धारणा को बदलने का काम किया है।

उन्होंने कहा, “बैडमिंटन वर्तमान में क्रिकेट के बाद देश में दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है। इस खेल की लोकप्रियता साइना नेहवाल और पीवी सिंधु द्वारा जीते गए ओलंपिक पदकों के बाद काफी बढ़ी है।”

ओलंपिक सफलता ने निश्चित रूप से बैडमिंटन को भारत में सबसे आगे लाने में मदद की है। मुख्य रूप से इससे युवा खिलाड़ियों के खेल स्तर में काफी सुधार आया है। चिराग शेट्टी का मानना है कि यह सब साइना नेहवाल और पीवी सिंधु की जीत से मिली प्रेरणा के कारण ही संभव हो सका है।

शेट्टी ने कहा, “नेहवाल और सिंधु लोगों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं। इसकी हमारे देश में काफी जरूरत थी और अब हर कोई जो बैडमिंटन को पेशे के तौर पर चुनना चाहता है, वह बिना किसी झिझक के इस खेल को चुन सकता है।”

लंदन 2012 में अपना दूसरा ओलंपिक खेल खेलते हुए साइना नेहवाल ने पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनकर वेम्बली के मैदान में अपने कांस्य पदक के साथ ओलंपिक पदक जीता।

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साइना नेहवाल की पहली जीत

पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी साइना नेहवाल 2012 के ओलंपिक खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ीं। वह एक भी मैच हारे बिना सेमीफाइनल में जगह बनाने में सफल रहीं। हालांकि वह अंतिम चार में चीन की पूर्व विश्व चैंपियन यिहान वांग को हराने में असफल रहीं, लेकिन इस भारतीय शीर्ष खिलाड़ी ने किसी को भी निराश नहीं किया। उन्होंने एक अन्य चीनी बैडमिंटन खिलाड़ी वांग शिन को करारी शिकस्त देते हुए कांस्य पदक जीता।

पीवी सिंधु का प्रदर्शन और भी उम्दा

चार साल बाद रियो 2016 में एक और भारतीय पीवी सिंधु ओलंपिक खेलों में बैडमिंटन प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं। पीवी सिंधु का प्रदर्शन पूरे ओलंपिक में शानदार रहा। उन्होंने ताई त्ज़ु यिंग, वांग यिहान और नोज़ोमी ओकुहारा को हराते हुए फाइनल में प्रवेश किया और स्वर्ण पदक के लिए स्पेन की कैरोलिना मारिन के साथ मुकाबला किया।

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भले ही सिंधु ने शुरुआत शानदार की, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकीं। क्योंकि कैरोलिना मारिन ने स्वर्ण पदक जीतने के लिए शानदार प्रदर्शन किया और सिंधु को उनपर हावी होने का कोई भी मौका नहीं दिया। अब उस हार के चार साल बाद पूरा देश उस समय का इंतजार कर रहा है जब कुछ ही महीनों में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी टोक्यो 2020 में फिर कुछ बेहतर करते नज़र आएंगे।