टोक्यो ओलंपिक में आर्चरी की मिक्स्ड टीम से पदक की सबसे ज्यादा उम्मीद : धर्मेंद्र तिवारी

धर्मेंद्र तिवारी 2016 रियो ओलंपिक में भारत की मेंस टीम के कोच थे और उन्होंने अतानु दास और दीपिका कुमारी को शुरुआती दिनों में ट्रेनिंग दी थी।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता तीरंदाजी कोच धर्मेंद्र तिवारी (Dharmendra Tiwary) का मानना ​​है कि टोक्यो ओलंपिक में मिक्स्ड टीम इवेंट ने भारत के पदक जीतने की उम्मीद बढ़ा दी थी, अगर ऐसा होता है तो यह तीरदांजी में भारत का पहला पदक होगा

मिक्स्ड टीम तीरंदाजी इवेंट में एक पुरुष और एक महिला प्रतिभागी होते हैं और इस श्रेणी को पहली बार टोक्यो ओलंपिक में शामिल किया जाएगा। यह मेंस और वुमेंस एकल और टीम इवेंट से अलग श्रेणी है।

धर्मेंद्र तिवारी ने दी टेलीग्राफ से बातचीत में बताया कि “ये अच्छा है कि अगले साल ओलंपिक में मिक्स्ड टीम इवेंट को शामिल किया गया है। भारत की मिक्क्ड टीम ने वर्ल्ड कप में पदक जीता हुआ है और इसलिए मैं ओलंपिक को लेकर भी आशावादी हूं।”

धर्मेंद्र तिवारी 2016 रियो ओलंपिक में भारत की मेंस टीम के कोच थे और उन्होंने अतानु दास ( Atanu Das) और दीपिका कुमारी (Deepika Kumari) को शुरुआती दिनों में ट्रेनिंग दी थी।

अब इन दोनों ही

स्टार खिलाड़ियों ने आपस में शादी कर ली है और टोक्यो ओलंपिक का कोटा भी हासिल कर लिया है। इसके अलावा उम्मीद की जा रही है ये दोनों ही मिक्स्ड टीम का हिस्सा होंगे, क्योंकि दोनों अपने वर्ग के टॉप खिलाड़ी हैं।

तिवारी, वर्तमान में जमशेदपुर स्थित कुलीन टाटा तीरंदाजी अकादमी (Tata Archery Academy) के मुख्य कोच हैं, उन्होंने ओलंपिक जैसे बड़े इवेंट में दर्शकों के प्रेशर से निपटने की सलाह भी भारतीय तीरदांजों को दी।

धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि “ओलंपिक सहित कई इंटरनेशनल इवेंट में गैलरी के दोनों और दर्शक बैठते हैं और हमारे तीरदांजों ने इतने दर्शकों के बीच ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं की है।”

तीरदांजों के मेंटॉर ने कहा कि “भारतीय तीरदांजों की मदद के लिए मनोवैज्ञानिक की सहायता ली जा सकती है, इससे उन्हें काफी फायदा होगा। लेकिन मनोवैज्ञानिक को इस खेल की जानकारी होनी चाहिए क्योंकि तभी वह तीरदांजों की मानसिकता को अच्छी तरह समझ सकेंगे।”

इसके अलावा उन्होंने कहा कि “उन्हें (मनोवैज्ञानिक) ये पता होना चाहिए कि खिलाड़ियों  पर कितना दबाव होता है और वह खिलाड़ियों को इस दबाव से कैसे बाहर निकाल सकते हैं।कोरिया और अमेरिका जैसे देशों के पास सपोर्ट स्टाफ के रूप में मनोवैज्ञानिक होते हैं।”

इसके अलावा 46 साल के इस कोच ने उम्मीद जताई है कि मेंस और वुमेंस कैटेगिरी के सिंगल्स में भी खिलाड़ी पदक जीत सकते हैं लेकिन इसके लिए खिलाड़ियों को मानसिक रूप से काफी मजबूत बनना पड़ेगा।

वर्तमान में, भारत ने टोक्यो के लिए चार कोटा स्थान प्राप्त किए हैं। मेंस स्थानों के लिए अतानु दास, तरुणदीप राय (Tarundeep Rai) और प्रवीण जाधव (Pravin Jadhav) का नाम पक्का हो चुका है।

पूर्ण कोटा पहले से ही 2019 विश्व चैंपियनशिप में रिकर्व टीम के हिस्से के रूप में शिष्टाचार के लिए अतानु दास  तरुणदीप राय और प्रवीण जाधव के रजत पदक से सुरक्षित है। 

वहीं महिला खिलाड़ियों की बात करें तो अभी तक दीपिका कुमारी ही टोक्यो का टिकट कटवाने में कामयाब हो पाई है। दीपिका ने पिछले साल बैंकॉक में एशियन कॉन्टिनेंटल क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था। हालांकि बाकी तीरदांजों के पास पेरिस में अगले साल 18 से 21 जून तक आयोजित होने वाले अंतिम ओलंपिक क्वालीफिकेशन इवेंट में क्वालिफाई करने का मौका होगा।