भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के थाईलैंड ओपन के नतीजों का ज्यादा मतलब नहीं निकाला: अपर्णा पोपट  

सर्वश्रेष्ठ पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी का मानना है कि अभ्यास के अभाव और मैच खेलने का समय नहीं मिलने के बावजूद डबल्स में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

थाइलैंड में दो बैडमिंटन टूर्नामेंट के आयोजन में भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों की ज्यादा पदक जीतने और पोडियम फिनिश देखने की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकी, लेकिन पूर्व भारतीय बैडमिंटन स्टार अपर्णा पोपट का मानना है कि करीब 10 महीने के ब्रेक के बाद भारतीय खिलाड़ियों की कोर्ट में वापसी और मुकाबला करना एक अच्छी शुरुआत है।

दो टूर्नामेंटों में से दूसरे, टोयोटा थाईलैंड ओपन के युगल में भारत का प्रदर्शन दक्षिण पूर्व एशियाई देश में असाधारण रहा। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी इसके केंद्र में थे। उन्होंने चिराग शेट्टी के साथ पुरुष युगल के सेमीफाइनल में जगह बनाई और अश्विनी पोनप्पा के साथ मिश्रित युगल जीता।

पोपट ने ओलंपिक चैनल को बताया, "मैंने भारतीयों के हर एक प्रदर्शन का विशेष रूप से अध्ययन नहीं किया, क्योंकि इसकी पृष्ठभूमि में बहुत कुछ चल रहा था।"

“सबसे सकारात्मक बात यह है कि खिलाड़ी खेलने के लिए बाहर निकले। बिना तैयारी के साथ मुकाबला करना, विशेष रूप से युगल खिलाड़ियों का प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहा है।”

अक्टूबर में डेनमार्क ओपन में खेलने वाले किदाम्बी श्रीकांत को छोड़कर बाकी सभी भारतीय खिलाड़ी को मार्च, 2020 के बाद पहली बार थाईलैंड ओपन ने कोर्ट में पहुंचाया। कोरोना संक्रमण के मामलों में दूसरे नम्बर पर भारत के अधिकांश हिस्सों में करीब छह महीने तक लॉकडाउन रहा था।

डेनमार्क और थाईलैंड जैसे देशों में जहां महामारी का प्रकोप कम था, वहां के खिलाड़ियों के पास प्रशिक्षण और अभ्यास को फिर से शुरू करने के रास्ते थे, जो भारतीय एथलीटों के पास नहीं थे।

पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स रजत पदक विजेता पोपट कहती हैं, "इतने लंबे ब्रेक के बाद, इस बात पर ध्यान केंद्रित करना है कि कब क्या काम करना है, बहुत मुश्किल होता है।"

पूर्व भारतीय बैडमिंटन स्टार अपर्णा पोपट 

“जब आप लय में रहते हुए खेल रहे होते हैं और प्रशिक्षण ले रहे होते हैं, तो चीजें बहुत आसान होती हैं, क्योंकि आप जानते हैं कि क्या करना है। जब आप इस तरह लंबे ब्रेक के बाद वापसी करते हैं, तो अचानक आप थकने लगते हैं। घूमते समय, आप शारीरिक लय को भूल जाते हैं। लचीलेपन की समस्या पैदा हो जाती है और भी बहुत कुछ हो सकता है। यह प्रत्येक खिलाड़ी के लिए अलग होता है। इसके साथ ही कोरोना वायरस ने तनावग्रस्त भी बनाया है।”

कोर्ट से लंबे समय तक दूर रहने के बावजूद भारतीय खिलाड़ी थाइलैंड के दूसरे टूर्नामेंट में ज्यादा तेज तर्रार नजर आए। योनेक्स थाईलैंड ओपन के शुरुआती दौर में हारने बाद विश्व चैंपियन पीवी सिंधु ने पिछले सप्ताह क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। समीर वर्मा ने भी पुरुष एकल के अंतिम आठ में जगह बनाई।

पोपट महसूस करती हैं, "इसका मतलब ये है कि वे वापसी कर रहे हैं और यह उन्हें प्रेरित करेगा। प्रशिक्षण लेते समय आपके पास एक उद्देश्य होता है। अब टूर्नामेंट शुरू हो गये हैं, तो निश्चित रूप से इंडियन ओपन (मई में) को लेकर उनकी महत्वाकांक्षा होगी। ऐसे में जब उन्होंने महिनों तक प्रशिक्षण नहीं किया है, तो प्रशिक्षण करने के बाद बहुत फर्क आयेगा।”

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों का अगला कदम 27 जनवरी से बैंकॉक में वर्ल्ड टूर फाइनल है, क्योंकि सिंधु और किदांबी श्रीकांत ने प्रीमियर इवेंट में जगह बना ली है।