दुती चंद के नक़्श-ए-क़दम पर हर भारतीय युवाओं को चलना चाहिए: धनराज पिल्लै

भारतीय एथलीट दुती चंद, जो खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं। भारतीय हॉकी दिग्गज धनराज पिल्लै का मानना है कि वह भारतीय एथलीटों की अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत बन सकती हैं

दुती चंद (Dutee Chand) महिलाओं की 100 मीटर दौड़ में मौजूदा नेशनल चैंपियन हैं। यही नहीं वह ओलंपिक में 100 मीटर स्पर्धा में हिस्सा लेने वाली तीसरी भारतीय महिला बन गई हैं। जल्द ही वह भुवनेश्वर में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (Khelo India University Games) में KIIT विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगी।

यह इवेंट उनके लिए 2020 ओलंपिक वार्म अप के तौर पर होगा, जिसके लिए वह क्वालिफाई करने की तैयारी कर रही हैं।

2018 एशियन गेम्स में भारत की दुती चंद 100 मीटर एथलेटिक्स इवेंट में रजत पदक जीतने के बाद जश्न मनाती हुईं
2018 एशियन गेम्स में भारत की दुती चंद 100 मीटर एथलेटिक्स इवेंट में रजत पदक जीतने के बाद जश्न मनाती हुईं2018 एशियन गेम्स में भारत की दुती चंद 100 मीटर एथलेटिक्स इवेंट में रजत पदक जीतने के बाद जश्न मनाती हुईं

भारत के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्लै (Dhanraj Pillay) ने कहा, “वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स की पूर्व विजेता स्प्रिंटर दुती चंद ने जिस तरह से ऊंचाइयों को छुआ है, वह भारतीय युवाओं के लिए मिसाल है। यूनिवर्सिटी गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उनकी उपस्थिति से लोगों में काफी उत्साह रहेगा।”

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स देशभर के कई महत्वाकांक्षी एथलीटों को अपने विश्वविद्यालयों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने का एक शानदार मंच है।

एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता दुती चंद ने 59वें राष्ट्रीय ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर स्पर्धा को 11.22 सेकंड में खत्म कर अपना ही नेशनल रिकॉर्ड तोड़ दिया था।

दुती चंद कहती हैं कि उनका मौजूदा 100 मीटर दौड़ का समय टोक्यो ओलंपिक में जगह पक्की करने के लिए पर्याप्त नहीं है। 2020 ओलंपिक के लिए महिलाओं की 100 मीटर कट-ऑफ का समय 11.15 सेकंड है, जिसके मुताबिक उन्हें अभी भी क्वालिफाई करने के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ समय में 0.07 सेकेंड की कमी करनी होगी।

धनराज पिल्लै ने क्रमशः 1998 और 2003 में कप्तान के रूप में एशियाई खेलों और एशिया कप ट्राफियों में भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व किया। उन्हें भी उम्मीद है कि इन खेलों से नए चेहरे उभर कर सामने आएंगे और उनकी प्रतिभा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, "मैंने मेरे प्रतिस्पर्धी दिनों में और टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए कई क्षेत्रों के सफर के दौरान बहुत सी नई अद्भुत प्रतिभाएं देखी हैं। मुझे उम्मीद है कि नए खिलाड़ी उभर कर सामने आएंगे।”

भारत का NCAA हो सकता है KIUG

पद्म श्री पुरस्कार विजेता ने तब संयुक्त राज्य अमेरिका के कॉलेजों के बीच होने वाले खेलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन एथलीटों के विकास में सहायता कर सकते हैं। नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन (NCAA) ने अतीत में कई खेलों में कई अमेरिकी एथलीटों को विकसित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।

51 वर्षीय धनराज पिल्लै ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका में कॉलेजों के बीच होने वाले खेलों को दुनियाभर में युवा प्रतिभाओं को आकर्षित किया।”

उन्होंने आगे कहा, "NCAA को चुनिंदा कॉलेजों के किशोरों को सभी खेलों में बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण और अवसर प्रदान करता है। जिनमें से कई असाधारण प्रतिभाएं उभरकर सामने आई हैं।"

भारतीय टेनिस स्टार सोमदेव देववर्मन (Somdev Devvarman) भी एक ऐसा उदाहरण हैं, जिन्होंने नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन से स्नातक किया है। NCAA के ज़रिए तैयार होकर सोमदेव देववर्मन ने डेविस कप टीम में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

इसी तरह अगर खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के उद्देश्यों को वास्तव में कुछ वर्षों तक सही से लागू किया गया तो भविष्य में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए आपको भविष्य में कई नई प्रतिभाएं मिलेंगी।

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