इन पांच भारतीय एथलीटों का अंतिम ओलंपिक साबित हो सकता है टोक्यो

टोक्यो ओलंपिक में अपना सबकुछ दाव पर लगाकर पदक जीतने का प्रयास करेंगे ये एथलीट 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारत में विभिन्न क्षेत्रों में सालों से खेल नायकों की अपनी हिस्सेदारी रही है। कई ने ओलंपिक सहित विश्व के प्रतिष्ठित खेल मंचों पर देश को गौरवान्वित किया है।

इनमें अभिनव बिंद्रा, सुशील कुमार, पीवी सिंधु, लिएंडर पेस, एमसी मैरीकॉम, साइना नेहवाल, केडी जाधव, कर्णम मल्लेश्वरी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सहित और कई इस सूची में शामिल हैं।

कुछ ऐसे भी हैं जिनकी तुलना बहुत कम लोग कर पाये जैसे पीटी उषा, मिल्खा सिंह, जॉयदीप कर्माकर, दीपा कर्माकर आदि। 

ऐसे भी एथलीट हुए हैं जिन्होंने ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व तो किया लेकिन पदक का गौरव नहीं दिला सके।

टोक्यो 2020 का आयोजन नजदीक आता जा रहा है। भारत के बेहतरीन एथलीटों का पूरा ध्यान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर केंद्रित है। यह कई एथलीटों के लिए आखिरी ओलंपिक भी हो सकता है।

*आइए नजर डालते हैं ऐसे ही पांच एथलीटों पर, जो इस साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में अपना अंतिम प्रयास करेंगे- *

लिएंडर पेस

नित नये रिकॉर्ड तोड़ने वाले लिएंडर पेस ने अपने शानदार करियर के दौरान कई बार भारत को गौरवान्वित किया है। इस साल ये टेनिस दिग्गज 48 साल के हो गए हैं। टोक्यो ओलंपिक में स्थान पक्का करके उन्होंने आठवीं बार ओलंपिक में पहुंचने का रिकाॅर्ड बनाया है।

1996, अटलांटा में एकल में कांस्य पदक जीतने वाले पेस सात ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने वाले एकमात्र भारतीय हैं। उन्होंने 1992 के बार्सिलोना के बाद से हर ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

पेस ने आठ युगल और दस मिश्रित युगल ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। टोक्यो ओलंपिक के बाद वो अपने खेल करियर को समाप्ति की तरफ ले जाना चाहते हैं।

मार्च 2020 के बाद से उनका मैच खेलना अभी बाकी है। टोक्यो के लिए खेल कौशल में सुधार के लिए वो आगामी ऑस्ट्रेलियन ओपन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, बशर्ते वह इसके लिए क्वालिफाई कर सकें।

पेस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था, “लंबे ब्रेक के बाद मैं खुशी महसूस कर रहा हूं। मेरे मन में कोई संदेह नहीं है। मैं शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से टोक्यो के लिए तैयार हूं।” 

एमसी मैरी कॉम

मैरी कॉम भारतीय मुक्केबाजी सर्किल में प्रेरणादायक नाम है। मणिपुरी पगिलिस्ट के नाम कई रिकॉर्ड हैं और उन्होंने अपने लंबे करियर में कई बार भारत का गौरव बढ़ाया है। वह छह बार विश्व एमेच्योर मुक्केबाजी चैंपियन बनने वाली एकमात्र महिला मुक्केबाज हैं। इसके साथ ही वो आठ विश्व चैम्पियनशिप पदक जीतने वाली एकमात्र मुक्केबाज (पुरुष या महिला) हैं।

उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में फ्लाईवेट श्रेणी में कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। यह उपलब्धि उन्होंने दो बच्चों को जन्म देने के बाद हासिल की है। भारत में पद्म भूषण से सम्मानित होने वाली मॅग्नीफिसेन्ट मैरी’ पहली एमेच्योर एथलीट हैं।

भले ही मैरी कॉम ने रियो 2016 के लिए क्वालीफाई नहीं किया हो, लेकिन उन्होंने टोक्यो के लिए 51 किग्रा वर्ग में अपना स्थान पक्का कर लिया है। हालांकि, ओलंपिक में यह उनकी आखिरी उपस्थिति हो, लेकिन 37 वर्षीय यह एथलीट सभी को चैंकाते हुए अंतिम बार जरूर वाह-वाही लूटेगी।

मुकाबले में जीत हासिल करने के बाद एमसी मैरी कॉम

सुशील कुमार

संभवतया सुशील कुमार हाल के दिनों में भारत के सबसे सर्वश्रेष्ठ ओलंपियन हैं। बीजिंग 2008 (66 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती) में कांस्य और लंदन 2012 में एक रजत पदक जीतने वाले सुशील एकमात्र भारतीय हैं जिन्होंने देश की आजादी के बाद से दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीते हैं।

तीन बार के राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता सुशील अब 74 किग्रा वर्ग में स्थानान्तरित हो गए हैं और टोक्यो ओलंपिक में स्थान पक्का करना चाहते हैं। उनकी आखिरी प्रमुख उपस्थिति गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया में 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में थी।

रेसलिंग नेशनल से बाहर होने के बाद सुशील कुमार वर्तमान में आगामी ओलंपिक क्वालीफायर के लिए फिटनेस हासिल करने के लिए पसीने बहा रहे हैं।  

इस साल की शुरूआत में ओलंपिक चैनल को एक चैट के जरिये उन्होंने बताया, "मेरा पूरा ध्यान ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर है। इसके बाद ही दूसरी चीजों को लेकर योजना बनाऊंगा।" 

अगर वो क्वालीफाई करने में सफल रहते हैं तो 37 वर्षीय इस खिलाड़ी के पास शानदार करियर को खत्म करने से पहले देश के लिए तीसरा ओलंपिक पदक हासिल करने का मौका होगा।

अचंत शरत कमल

अनुभवी टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंत शरत कमल एक दशक से ज्यादा समय भारतीय टेबल टेनिस टीमों के वास्तविक नेतृत्वकर्ता रहे हैं। चार बार के राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता को भी लगता है कि टोक्यो 2020 उनके लिए अंतिम ओलंपिक होगा।

38 साल की उम्र में भी शरत कमल भारतीय टेनिस खिलाडियों में शीर्ष रैंक पर बने हुए हैं। उन्होंने अब तक तीन ओलंपिक - एथेंस 2004, बीजिंग 2008 और रियो 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

शरत कमल जर्मनी की यात्रा कर बुंडेसलिगा में अपने क्लब बोरूसिया डसेलडोर्फ के साथ खेलने के लिए तैयार हैं। ताकि वो ओलंपिक क्वालीफायर की तैयारी को पूरा कर सकें।

तरुणदीप राय

भारत के ख्यातनाम तीरंदाज तरुणदीप राय भी संभावित रूप से टोक्यो में अपने अंतिम ओलंपिक में शामिल होंगे। सिक्किम का 36 वर्षीय यह खिलाड़ी इससे पहले एथेंस 2004 और लंदन 2012 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2004 में पुरुषों की व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में वो 43वें स्थान पर रहे। 2008 में वो पुरुषों की व्यक्तिगत तीरंदाजी रैंकिंग में 31वें स्थान पर रहे जबकि उनकी टीम रिकर्व इवेंट में 12वें स्थान पर रही।

इस समय राय अपने करियर को अलविदा कहने से पहले ओलंपिक में एक पदक जीतने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। नामची के तीरंदाज उन चार भारतीयों में से एक है जिन्होंने रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में टोक्यो ओलंपिक के लिए अपना स्थान पक्का किया है। वो टीम स्पर्धा में अतनु दास और प्रवीण जाधव के साथ मुकाबला करेंगे।

तरुणदीप राय ने फर्स्टपोस्ट को बताया, "24 साल के करियर के बाद मुझे ओलंपिक में पदक जीतना बेहद जरूरी है। इस समय देश भी इसका हकदार है। इस खेल में मेरी 24 साल की यात्रा केवल तभी पूरी होगी, जब मैं टोक्यो ओलंपिक में पदक हासिल करूंगा। देश के लिए खेलते हुए मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बलिदान दिए हैं।"